दार्जिलिंग। दार्जिलिंग जिले के अधिकारियों ने स्थानीय केबल ऑपरेटरों को खबरें न दिखाने का आदेश दिया है। उनका कहना है कि वे गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के पक्ष में हैं और उनसे हिल्स में तनाव पैदा हो रहा है। अधिकारियों के इस आदेश को जीजेएम अध्यक्ष विमल गुरूंग ने ''तालिबानी पाबंदी'' करार दिया है । सरकारी सूत्रों ने यहां बताया कि खबरों की विषय-वस्तु बहुत हद तक जीजेएम के पक्ष में नजर आती है और इनसे हिल्स में तनाव पैदा हो रहा है । अधिकारियों के आदेश पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए विमल गुरूंग ने कहा कि यह ''तालिबानी तरीका'' है और लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करता है । सिंगमारी के पास गुरूंग ने कहा, ''यदि मोबाइल सेवाएं रोक दी जाएं, तो भी हमें हैरत नहीं होगी । हम अपना प्रदर्शन जारी रखेंगे और पश्चिम बंगाल सरकार से कोई बातचीत नहीं करेंगे ।'' गुरूंग ने कहा कि वह अभी दिल्ली नहीं जा रहे और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात का वक्त तय करने की कोशिशें जारी हैं । इस बीच, जीजेएम समर्थक और शारीरिक तौर पर नि:शक्त पूर्वा शेरपा :32: की हालत दार्जिलिंग सदर अस्पताल में गंभीर बनी हुई है । पूर्वा ने कल आत्मदाह की कोशिश की थी । दार्जिलिंग के नए जिलाधिकारी पुनीत यादव आज से कार्यभार संभालने वाले हैं । ईद के मौके पर भी आज बंद में कोई ढील नहीं दी गयी । बेमियादी बंद पिछले शनिवार से ही जारी है । सूत्रों ने बताया कि बेमियादी बंद की वजह से दार्जिलिंग हिल्स और इसके आसपास के इलाकोें में जन वितरण प्रणाली के तहत खाद्य सामग्री की भारी कमी है । बंद की वजह से वाहनों की आवाजाही पर असर पड़ा है । राष्ट्रीय राजमार्ग 31 ए पर भी यातायात प्रभावित हुआ है । सूत्रों के मुताबिक, सीपीआरएम, गोरखालैंड टास्क फोर्स और गोरखा निर्माण मुक्ति जैसे विपक्षी दल भी इस प्रदर्शन में हिस्सा लेने पर विचार कर रहे हैं। बहरहाल, एक अन्य बड़े संगठन आॅल इंडिया गोरखा लीग ने अलग राज्य के लिए अलग से प्रदर्शन आयोजित करने की मांग की है । कुछ साल पहले लीग के नेता मदन तमांग की हत्या कथित तौर पर जीजेएम कार्यकर्ताओं ने की थी । (भाषा) |
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