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Sunday, March 11, 2012

बजट सत्र कल से: सरकार के लिए मुश्किलों के आसार

Sunday, 11 March 2012 18:02

नयी दिल्ली, 11 मार्च (एजेंसी) संसद के कल से  बजट सत्र शुरू हो रहे हैं। सरकार के लिए मुश्किलों के आसार नजर आ रहे हैं। हाल में हुए कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांगे्रस के निराशाजनक प्रदर्शन तथा संघवाद जैसे मुद्दों पर परस्पर विरोधी ताकतों के एकजुट होने की संभावनाओं की पृष्ठभूमि में सरकार के लिए मुश्किलें पैदा हो सकती हैं।
संप्रग का नेतृत्व कर रही कांगे्रस संभवत: ऐसी स्थिति में न हो जब वह अपने सहयोगी दलों को हल्के में ले सके। गठबंधन की एक महत्वपूर्ण घटक तृणमूल कांगे्रस पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि वह उर्वरक सब्सिडी में कटौती और पेट्रोलियम मूल्यों में वृद्धि का विरोध करेगा। तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी ने गैर कांगे्रसी सांसदों के साथ सुर मिलाते हुए प्रस्तावित राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केन्द्र का विरोध किया था।
विधानसभा चुनावों में निराशाजनक प्रदर्शन के कारण कांगे्रस के दबाव में आने के चलते विपक्ष के नेताओं ने संकेत दिया है कि संघवाद के मुद्दे पर विपक्ष तथा कांगे्रस के घटक दलों और सहयोगियों के साथ तालमेल हो सकता है। 
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी का तीन माह तक चलने वाले इस सत्र में कई अनचाही परिस्थितियों से जूझना पड़ सकता है। सत्र की शुरूआत संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति के अभिभाषण से शुरू होगी। राष्ट्रपति प्रतिभा सिंह पाटिल का कार्यकाल जुलाई में समाप्त हो रहा है और यह संसद में उनका अंतिम अभिभाषण होगा। 
बजट सत्र शुरू होने के चार दिन बाद 16 मार्च को वित्त वर्ष 2012..13 का आम बजट पेश किया जायेगा। 
रेल बजट 14 मार्च को तथा आर्थिक समीक्षा 15 मार्च को पेश की जायेगी। 
तृणमूल कांगे्रस नेता एवं रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी द्वारा मध्यावधि चुनाव की संभावना के बयान की गूंज भी बजट सत्र में सुनायी दे सकती है। हालांकि बाद में त्रिवेदी ने कहा कि उनकी पार्टी का संप्र्रग का साथ छोड़ने का कोई इरादा नहीं है।

बजट सत्र का पहला चरण 30 मार्च को संपन्न होगा तथा दूसरा चरण 24 अपै्रल से शुरू होगा। इस बीच तीन हफ्ते का अवकाश रहेगा जिस दौरान विभिन्न मंत्रालय के बजट प्रस्तावों पर संसद की स्थायी समितियां विचार विमर्श करेंंगी। सत्र 22 मई को संपन्न होने की उम्मीद है। 
बजट सत्र आमतौर पर फरवरी के तीसरे सप्ताह में शुरू होता है। इस साल उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के कारण बजट सत्र के कार्यक्रम को आगे बढ़ा दिया गया।
सत्र के पहले कांगे्रस ने अपने सहयोगी दलों से संपर्क कायम करने के संकेत दिये हैं। उसने यह भी संकेत दिये कि वह संप्रग समन्वय समिति के विचार के लिए खुली है।
विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद कांगे्रस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सहयोगियों के साथ नियमित संवाद का आश्वासन दिया। साथ ही उन्होंने उम्मीद जतायी कि सहयोगी और विपक्ष लोकोन्मुखी उपायों को समर्थन देंगे।
कांगे्रस इस बात पर कायम है कि राजनीतिक उथल पुथल की गाज बजट पर नहीं गिरनी चाहिए क्योंकि बजट तथा अन्य जरूरी विधेयक राष्ट्र की प्रगति और विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। 
भाजपा दावा कर रही है कि कांग्रेस के सहयोगी, संप्र्रग गठबंधन को बाहर से समर्थन दे रहे दल और विपक्ष संघवाद के मुद्दे को जोरशोर से उठायेंगे। 
भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, ''संघवाद का मुद्दा कांग्रेस के सहयोगी, संप्र्रग गठबंधन को बाहर से समर्थन दे रहे दल और विपक्ष के बीच अनूठा गठजोड़ बनाने के लिए एक उत्प्रेरक बन गया है। ''
उन्होंने कहा कि कपास निर्यात पर रोक लगाने के किसान विरोधी कदम सहित विभिन्न मुद्दों को विपक्ष बजट सत्र के दौरान उठायेगा।

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