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Saturday, July 26, 2014

ले जलवा पीपीपी माडल गुजराती! कैग का खुलासा- रिलायंस, अदानी को गुजरात सरकार ने पहुंचाया करोड़ों का फायदा,25 हजार करोड़ रुपए की वित्‍तीय अनियमितताएं



ले जलवा पीपीपी माडल गुजराती!

कैग का खुलासा- रिलायंस, अदानी को गुजरात सरकार ने पहुंचाया करोड़ों का फायदा,25 हजार करोड़ रुपए की वित्‍तीय अनियमितताएं

पलाश विश्वास

गुजरात माडल का जलवा यह कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्रित्व  के पहले बजट पर ही नगाड़ों की चोट के साथ ऐलान होगया कि भारत दुनिया में सबसे बडे पीपीपी बाजार के रुप में उभरा है। करीब 900 परियोजनाएं विकास के विभिन्न चरणों में हैं।


गुजरात माडल का जलवा यह कि  कैग (भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) ने गुजरात सरकार पर रिलायंस और अदानी सहित कई दूसरी कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया है। कैग ने अपनी रिपोर्टों में कहा है कि राज्‍य सरकार द्वारा करीब 25 हजार करोड़ रुपए की वित्‍तीय अनियमितताएं की गईं और इनमें से 1500 करोड़ रुपए का इस्‍तेमाल रिलायंस पेट्रोलियम, एस्‍सार पावर और अदानी ग्रुप सहित अन्‍य कई कंपनियों को फायदा पहुंचाने में किया गया। अंग्रेजी अखबार टाइम्‍स ऑफ इंडिया ने इस बारे में रिपोर्ट प्रकाशित की है।



आम बजट पेश होने से पहले भारतीय रेल के निजीकरण का शुभारंभ हो गया।यह निजीकरण बी चरित्र में पीपीपी है,जो बुनियादी तौर पर गुजरात माडल है जिसका खुलासा ताजा कैग रपट में हुआ भी है।


देशभर में सरकारी स्कूल और अस्पताल अब पीपीपी होंगे।दसो दिशाओं में खुलने वाले आईआईटी आईएमएस आईआईएमएस सबकुछ पीपीपी माडल पर।


देश में सबसे मुखर मोदी विरोधी अग्निकन्या ममता बनर्जी और बिहार के पूर्व मुख्ममंत्री नीतीश कुमार दोनों इसी पीपीपी गुजरात माडल के खासमखास पैरोकार है जबकि धर्मनिरपेक्षता के वे सबसे बड़े स्वयंभू झंडेवरदार भी हैं।


बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने कार्यकाल में ऐलान किया था  कि सभी जिलों में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मोड में उच्चस्तरीय अस्पताल खुलेंगे। वहां राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के लाभान्वितों को विशेष सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी। सुपर स्पेशिलिटी सुविधाओं का भी प्रावधान होगा। योजना आयोग के उपाध्यक्ष के सलाहकार गजेंद्र हल्दिया व रवि मित्तल से मुलाकात के क्रम में मुख्यमंत्री ने यह बात कही।


दूसरी ओर ममता बनर्जी सेजविरोधी नंदीग्राम सिंगुर आंदोलन के जरिये सत्ता में आयीं और पैंतीस साल के वाम अपशान का अंत किया,पूरे विश्वभर में यह किंवदंती फैल गयी है।जबकि आंदोलन करने वाले और थे।जिसका कुछ खुलासा पिछली संसद के बागी सांसद कबीर सुमन ने किया है।फर्क यह कि आंदोलनकारी सत्ता में नहीं होते और आंदोलन का नकदीकरण ही सत्ता  त्रिकोणमिति है।अंबेडकरी,वामपंथी और गांधीवादी,समाजवादी आंदोलन की भी यही कथा व्यथा है।आंदोलन हाशिये पर सत्ता सिर मत्थे।अब वही ममता बनर्जी सेज के नवीनतम केसरिया संस्करण प्रस्तावित सौ स्मार्ट सिटीज में से दस बंगाल के नाम करने की अर्जी लेकर अगस्त में दिल्ली जा रही हैं।और तो और,दीदी तो अब शांतिनिकेतन को भी स्मार्ट सिटी बना देना चाहती हैं।


संसद में बजट पर चर्चा और वित्त विधेयक पास करने में सर्वदलीय गतिविधियों से जनसंहारी गुजरात माडल के सर्वव्यापी सत्य बन जाने के आसार हैं।


शैतानी औद्योगिक गलियारों,एक्सप्रेस वे,बुलेट ट्रेन,सेज महासेज और स्मार्ट सिटी के लिए अपना अपना हिस्सा बटोरने के लिए रंग बिरंगी राज्यसरकारों में बारकायदा विचारधाराओं के फेंस तोड़कर मारामारी है।


इस पर चर्चा से पहले जलवा गुजरात माडल का।


रिलायंस को पहुंचाया फायदा

कैग की रिपोर्टें बजट सत्र के आखिरी दिन शुक्रवार को गुजरात विधानसभा में पेश की गईं। 'इकोनॉमिक सेक्‍टर' पर कैग की ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया कि गुजरात मैरीटाइम बोर्ड ने कैप्टिव जेट्टी अग्रीमेंट के तहत रिलायंस पेट्रोलियम लिमिटेड से गलत शुल्‍क चार्ज किया। इस कदम से सरकार को 649.29 करोड़ रुपए कम हासिल हुए।

एस्‍सार को फायदा

कैग ने गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (जीयूवीएनएल) के मामलों पर भी रिपोर्ट पेश की। इसमें कहा गया कि बिजली खरीद संबंधी समझौता पूरा होने के बाद भी जीयूवीएनएल ने डिलीवरी को लेकर कदम नहीं उठाया। इसकी वजह से एस्‍सार पावर गुजरात लिमिटेड को 587.50 करोड़ रुपए का अनुचित फायदा मिला।

अदानी को फायदा

ऑडिट एजेंसी ने कहा कि अदानी ग्रुप के स्‍वामित्‍व वाले मुंद्रा बंदरगाह पर फेज एक के तहत हो रहे निर्माण कार्यों पर निगरानी नहीं करने की वजह से सरकार को 118.12 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

वित्‍तीय प्रबंधन पर राज्‍य सरकार की आलाेचना

कैग ने अपनी रिपोर्ट में गुजरात सरकार द्वारा सोलर कंपनियों को ज्‍यादा पैसा देने के कदम की भी आलोचना की। रिपोर्ट में कहा गया, जीयूवीएनएल द्वारा सोलर पॉलिसी के तहत ज्‍यादा अनुबंधों की वजह से राज्‍य के उपभोक्‍ताओं पर 473.20 करोड़ रुपए का अतिरिक्‍त बोझ आया।


गुजरात के वित्‍तीय प्रबंधन मामलों पर कैग ने 'स्‍टेट फाइनेंसेस' नाम से अपनी रिपोर्ट पेश की। इसमें ऑडिट एजेंसी ने खराब वित्‍तीय प्रबंधन के मामले पर राज्‍य सरकार की आलोचना की। रिपोर्ट में कहा गया कि दो ऐसे मौके आए जब 13,049.67 करोड़ रुपए के ग्रांट्स बिना इस्‍तेमाल के रह गए।



राजस्थान में तो जनवितरण प्रणाली भी अब पीपीपी  है तो बंगाल में पीपीपी धूम धड़ाका जारी है।


दूसरी तरफ इस धारीदार विकास कामसूत्र में खाद्यसुरक्षा और गरीबी उन्मूलन की उदात्त घोषणाएं,भ्रष्टाचार मुक्त देश के लिए काला धन वापसी की इबारते भी काढ़ी जा रही हैं।


भारतीय राजनीति और विदेशनीति तेल अर्थव्यवस्था और तेलयुद्ध के हितो के साथ नत्थी हैं तो भारत आतंक के विरुद्ध अमेरिका के युद्ध में अरब देशों के साझा दुश्मन इजराइल का साझेदार भी है।


भारतीय संसद में विदेश मंत्री ने गाजा संकट पर बाकी मसले जोड़कर इस मामले को डायल्यूट ही नहीं किया जो कहा वह नईदिल्ली स्थित इजराइली दूतावास की ब्रीफिंग में सीमाबद्ध।


भारतीय संसद या भारत सरकार की तरफ से अभीतक गाजा पर इजराइली हमले की आधिकारिक निंदा हुई नहीं है।


लेकिन हैरतअंगेज ढंग से भारत ने संयुक्त राष्ट्र के इजराइल के विरुद्ध प्रस्ताव का समर्थन कर दिया। तो खाद्यसुरक्षा कानून बदलने पर उतारु भारत सरकार विश्व व्यापार संगठन में खाद्यसुरक्षा सुनिश्चित करने की शर्त पर अड़ गयी।


गौरतलब है कि पूर्ववर्ती यूपीए सरकार भी वृंदावन वन वीथिका में गीतगोविंदम अभिसार की इस शास्त्रीय प्राविधि का अनुसरण करती रही है।फिर वही ढाक के तीन पात अर्थात हाथी के दांत दिखाने के और ,तो खाने के और।


भारत ने अपनी संसद में इजराइल का बचाव करके इजराइल को संतुष्ट कर दिया तो तेलसंपन्न अरब देशों को खुश करने के लिए संयुक्त राष्ट्र में हाथ में उठा दिये।


इस सिलसिले में इकोनामिक टाइम्स का यह खुलासा गौरतलब हैः




TRYING TO SOOTHE NERVES South Block mandarins say there is no contradiction in India's foreign policy

A government that stubbornly refused to pass a resolution in Parliament against Israel's military action in Gaza, even in the face of adjournments and disruptions by a near-united Opposition, went ahead and raised its hand in favour of a UN resolution calling for probe into the Israeli campaign on Wednesday . But South Block mandarins insisted that there was no contradiction in the foreign policy extolled in the House and the one put to practice in Geneva.

"Israel is a nation with which our ties are steadily increasing. But that doesn't mean that we will carry their can everywhere. And they know it well," a top MEA official told ET.

"Bilateral friendship is one thing, but stands taken at multilateral fora are another," the official said, adding the pro-Israeli policies practiced by top BJP leaders in the past are unlikely to change India's well-articulated position with regard to the plight of the Palestinian people in global fora.

On Thursday , social networks were buzzing with angry right-wing posts questioning what they saw as India's abouttur n on Israel.

"Disg raceful vote a g ainst Israel at UNHRC (United Nations Human Rights Council) notwithstanding Indian public opinion is the most pro-Israel it's ever been," tweeted a policy hawk.

MEA spokesman Syed Akbaruddin refused to comment saying there was no contradiction in foreign policy .

Officials that ET spoke to justified the BJP-led government's stand by pointing out that India balanced its interests by bailing out Israel in Parliament and at the same time fulfilling its multilateral obligations by supporting the UN resolution. "We do not have a history of passing Parliamentary resolutions against any country . It has only been in rarest cases like Pakistan and China. The government maintained its friendship with Israel by not allowing a resolution. But at the same time sided with international actors in condemning Israeli actions at a global forum," an official source told ET.

"India is deeply concerned at the steep escalation of violence between Israel and Palestine, particularly heavy airstrikes in Gaza and disproportionate use of force on ground, resulting in tragic loss of civilian lives, especially women and children and heavy damage to property,'' according to the Indian statement at the human rights session.

एपडीआई,विनिवेश और पीपी माडल के जरिये पूरी अर्थव्यवस्था कालाधन रीसाइकिल,यानी कालाधन को सफेद धन बनाने की कला कौशल में परिवरर्तित है तो दूसरी तरफ कालेधन पर अब मोदी सरकार यह संकेत देना चाहती है, कि वह उसे देश में वापस लाए जाने का लंबा इंतजार करने के मूड में नहीं है। शुक्रवार को लोकसभा में वित्त विधेयक पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि अब कालेधन पर और इंतजार नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मैं यह भरोसा दिलाना चाहता हूं कि काले धन को वापस लाने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना होगा।जेटली के अनुसार मोदी सरकार कालेधन को विदेश से वापस लाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। वित्त मंत्री ने कहा कि इस समय कालेेधन को लेकर जो भी जानकारी सरकार को दूसरे देशों से प्राप्त हो रही है, उसे वह सुप्रीम कोर्ट को दे रही है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। एसआईटी जो भी कदम चाहती है, सरकार उसमें पूरा सहयोग करेगी। कालेधन को लेकर भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे बृहस्पतिवार को कह चुके है, कि हम अपने जीवन में स्विटजरलैंड से कालेधन को वापस नहीं ला सकेंगे। देश में कालाधन वापस लाने के वादे के साथ आई मोदी सरकार के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती है।

काले धन की अर्थव्यवस्था और एफडीआई  विनिवश पीपीपी माडल के  अर्ततंत्र की दिशा में वित्तीयसुधार और कर प्रणाली संशोधन सबसे अहम सुधार है।संसद में वित्त विधेयक पास कराते हुए कारपोरेट वकील वित्त प्रतिरक्षा मंत्री ने यह प्रक्रिया भी शुरु कर दी है जिसके तहत सरकार ने देश में औद्योगिक गतिविधियों व रोजगार को बढ़ावा देने के लिए कर की दरों को हल्का रखने की प्रतिबद्धता जताते हुये ऋण पत्रों में निवेश करने वाले म्यूचुअल फंड उद्योग और आय कर दाताओं के लिए कुछ राहत की शुक्रवार को घोषणाएं कीं।


हम पहले ही बार बार लिखते रहे हैं कि मलाईदार नवधनाढ्य उच्चमध्यवर्ग,मध्यवर्ग और नौकरीपेशा पेशेवर तबको को मामूली राहत देते हुए पूरा देश बेचने का बंदोबस्त है यह बजट।इसी सिलसिले को साबित करते हुएलोकसभा में शुक्रवार को वित्त विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि ऋण म्यूचुअल फंड पर प्रस्तावित 20 प्रतिशत की ऊंची कर की दर अब एक अप्रैल 2014 से नहीं बल्कि बजट पेश होने के दिन 10 जुलाई से लागू होगी। उन्होंने देरी से आय कर रिटर्न दाखिल करने वाले करदाताओं को जुर्माने के मामले में कुछ राहत पहुंचाने की घोषणा की।


जेटली ने कहा कि वह पिछली तिथि से नए कारारोपण के विरुद्ध कांग्रेस के नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया और कुछ अन्य सदस्यों के सुक्षाव को स्वीकार करते हैं क्यों संबंधित प्रस्ताव से करारोपण तीन माह पीछे से प्रभावी हो गया था। देर से रिटर्न दाखिल करने और उसपर प्रतिदिन के आधार पर जुर्माना भरने वाले कर दाताओं को कुछ राहत प्रदान करते हुए जेटली ने कहा कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) को ऐसे मामलों में अपने विवेक से फैसला लेने का अधिकार दिया जायेगा।


वित्त मंत्री के जवाब के बाद सदन ने वर्ष 2014--15 के वित्त विधेयक को पारित कर दिया। इसके साथ ही लोकसभा में आम बजट पारित होने की प्रक्रिया पूरी हो गई। वित्त मंत्री ने चर्चा में भाग लेने वाले अपनी ही पार्टी के सदस्य निशिकांत दुबे के इस आशंका को निर्मूल बताया कि कालाधन के बारे में सरकार ने जो नीति अपनायी है उससे जिंदगी भर भी कालाधन लौटने की उम्मीद नहीं की जा सकती।


उन्होंने कहा कि मैं उनकी दीर्घायु की कामना करता हूं लेकिन साथ ही उन्हें भरोसा दिलाता हूं कि उन्हें बहुत लम्बे समय तक प्रतीक्षा (विदेशों से कालाधन लाने की) नहीं करनी पड़ेगी। निम्न कर दरों वाले ढांचे और सरल कर प्रणाली की वकालत करते हुए जेटली ने कहा कि सरकार निवेशकों का भरोसा बहाल करना चाहती है जो डगमगा गया था। उन्होंने कहा कि निम्न कर दरों से औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और सामाजिक कल्याण की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिये अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे।


उन्होंने कहा कि निम्न कर ढांचे से भारतीय सामान प्रतिस्पर्धी बनेंगे और इस संबंध में उन्होंने चीन का उदाहरण भी दिया। जेटली ने कहा कि वित्त विधेयक में प्रस्तावित बदलाव से कर ढांचे को सरल और सहज बनाने के साथ अधिक राजस्व जुटाने में मदद मिलेगी, क्योंकि हमें राजकोषीय घाटे को कम रखने के लिए इस वर्ष अधिक राजस्व की जरूरत है।


देर से आयकर रिटर्न भरने वाले लोगों के लिए नियमों में राहत के अपने प्रस्ताव के बारे में वित्त मंत्री ने कहा कि देर से आयकर रिटर्न भरने के मामले में एक प्रावधान है जो कि काफी कष्टकारी हो जाता है क्योंकि इसमें प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाया जाता है। इसमें छूट देने का भी कोई अधिकार नहीं है। जेटली ने कहा कि ऐसे में यदि कोई कहता है कि उसने एक साल बाद रिटर्न दाखिल की है तो फिर प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना काफी अधिक हो जाता है।


ऐसे में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) को देरी से रिटर्न दाखिल करने वाले मामलों में अपने विवेक से कुछ फैसला करने का अधिकार दिया गया है। हालांकि जुर्माने का प्रावधान इसमें बना रहेगा। निपटान आयोग के प्रस्ताव पर जेटली ने कहा कि यह ऐसे मामलों को देखेगा जहां नये सिरे से आकलन की प्रक्रिया शुरू की गई है। ऐसे मामले जहां किसी न्यायाधिकरण अथवा आयुक्त के आदेश के बाद नये सिरे से आकलन करना लंबित है।


जेटली ने कहा कि हमारी सरकार कर की ऊंची दरें रखने की पक्षधर नहीं है, उपभोक्ता उत्पाद खरीदना चाहते हैं, कर नहीं। आप यदि सभी वस्तुओं पर ज्यादा कर लगायेंगे, तब आपका उत्पाद कम प्रतिस्पर्धी हो जायेगा। उन्होंने कहा कि चीन ने कम लागत के उत्पाद की कला सीख ली है।


कर मामलों से जुड़े कानूनी विवादों की बढ़ती संख्या में कमी लाने को लेकर जेटली ने कहा कि ट्रांसफर प्राइसिंग से जुड़े विवादों के निपटान के लिये एडवांस रूलिंग की और पीठें स्थापित करने का प्रस्ताव है। पवन ऊर्जा क्षेत्र को गति देने के इरादे से उन्होंने क्षेत्र के लिये एक्सीलरेटेड डिप्रिशिएसन बेनिफिट योजना का विस्तार किये जाने की घोषणा की। कर रियायातों पर सदस्यों की चिंता दूर करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि इससे अंतत: फायदा उपभोक्ताओं को होता है और घरेलू उत्पाद की कीमतें प्रतिस्पर्धी होती हैं।


जेटली ने कहा कि उन्होंने वाहन और पूंजीगत उत्पादों पर रियायती शुल्क की अवधि दिसंबर तक बढ़ा दी है ताकि विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा दिया जा सके। पूर्ववर्ती संप्रग सरकार ने 30 जून तक के लिए यह रियायत दी थी। उन्होंने कहा हम ऐसी स्थिति तैयार करना चाहता हैं कि जहां उद्योगों के रुझान पर प्रतिकूल प्रभाव हुआ है वह ठीक हो जाए। उद्योग समर्थक होने और गरीब समर्थक होने में कोई अंतर्विरोध नहीं है। जब अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन ठीक होगा तभी हम निचले तबके का ध्यान रख सकते हैं जो 30 प्रतिशत है।


जेटली ने विपक्ष के इस आरोप को खारिज किया कि सरकार कंपनियों के फायदे के लिए कर रियायत दे रही है। उन्होंने कहा कि यह गलत धारणा है, कर रियायत से मूल्य कम होता है और आखिरकार इससे उपभोक्ताओं को रियायत मिलती है। विवादित सामान्य कर परिवर्जन नियम (गार) के बारे में वित्त मंत्री ने कहा कि वह इस पर बाद में फैसला करेंगे। तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कर चोरी रोकने के लिए गार का प्रावधान किया था जिसका कार्यान्वयन घरेलू और विदेशी निवेशकों की चिंता के मद्देनजर दो साल तक के लिए टाल दिया गया था। पिछली तारीख से आयकर वसूली से जुड़े संशोधन से प्रभावित निवेशकों का रुझान बेहतर करने की कोशिश के बारे में मंत्री ने कहा कि सरकार सैद्धांतिक रूप से ऐसा कोई कानून नहीं लाएगी जिससे पिछली तिथि का कोई नया उत्तदायित्व तय हो।


हालांकि, ऐसे पहले के मामलों के संबंध में जेटली ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।


कारगिल विजय दिवस की पूर्व संध्या पर अपने जवाब में जेटली ने कहा कि उन्होंने संप्रग सरकार द्वारा रक्षा क्षेत्र के पूंजीगत खर्च के लिए अंतरिम बजट में आवंटित राशि में 5,000 करोड़ रुपए की वृद्धि का प्रस्ताव किया है। इसमें से 1000 करोड़ रुपए सीमावर्ती क्षेत्रों में रेलवे प्रणाली के विकास पर खर्च किया जाएगा।


उन्होंने कहा कि सरकार रक्षा बलों में एक-पद-एक-पेंशन के फार्मूले पर काम कर रही है। जेटली ने कहा कि 1947 के बाद देश के लिए कुर्बान हुए 21,000 सैनिकों के सम्मान में युद्ध संग्रहालय और युद्ध स्मारक स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। जेटली ने बजट में इसके लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है।


वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ढांचागत क्षेत्र की खासकर सार्वजनिक-निजी भागीदारी के अंतर्गत आने वाली परियोजनाओं में तेजी लाने के लिये कई उपायों की घोषणा की। उन्होंने जोर देकर कहा कि बुनियादी ढांचे की कमी से आर्थिक वृद्धि प्रभावित नहीं होने दी जाएगी।


जेटली ने कहा, ''देश अब बुनियादी ढांचे की कमी तथा उदासीन राजकाज को और भुगतने को तैयार नहीं है। आज हमारे सामने बेहतद चुनौतीपूर्ण कार्य है क्योंकि हमें वृद्धि को गति देने की जरुरत है। खासकर विनिर्माण और ढांचागत क्षेत्र में पर्याप्त संसाधन जुटाने की चुनौती है जो हमारे विकास के लिये जरुरी है।''


संसद में अपना पहला बजट पेश करते हुए जेटली ने कहा, ''एक संस्थान गठित किया जाएगा जो पीपीपी (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) को दुरुस्त करने मदद करेगा. 3 पी इंडिया नाम से इसका गठन 500 करोड के कोष से किया जाएगा।''  उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में सबसे बडे पीपीपी बाजार के रुप में उभरा है। करीब 900 परियोजनाएं विकास के विभिन्न चरणों में हैं। पीपीपी ने कुछ अच्छी ढांचागत परियोजनाएं दी हैं जिसमें हवाईअड्डा, बंदरगाह तथा राजमार्ग शामिल हैं। इसे वैश्विक स्तर पर विकास के एक मॉडल के रुप में देखा जा रहा है।


जेटली ने कहा कि लेकिन हमने पीपीपी की रुपरेखा में कमजोरी तथा अनुबंधात्मक व्यवस्थाओं में कठोरता देखी है। हमें अनुबंध के अत्याधुनिक माडल के विकास तथा त्वरित विवाद निपटान प्रणाली की जरुरत है। वित्त मंत्री ने यह चिंता ऐसे समय जतायी है जब नियामकीय बाधाओं के कारण 110 केंद्रीय ढांचागत परियोजनाओं में देरी हुई है।


वित्त मंत्री ने कहा कि उनकी सरकार सडक, बंदरगाह, हवाईअड्डों, रेलवे, शहरी, गरीबी तथा औद्योगिक ढांचागत समेत सभी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा में सुधार को लेकर प्रतिबद्ध है। साथ ही पर्याप्त कोष प्रवाह तथा परियोजनाओं के वित्त पोषण की व्यवस्था करने को लेकर दृढ संकल्प है।


जेटली ने रीयल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट्स तथा बुनियादी ढांचा निवेश ट्रस्ट के लिए अनुकूल कर प्रावधान करने की घोषणा भी की। नगरपालिकाओं के लिये उनके ऋण दायित्वों को पूरा करने के लिये बनाये गये मौजूदा कोष को बढाने की घोषणा की। बजट में शहरी क्षेत्रों में ढांचागत परियोजनाओं के वित्त पोषण के लिये कई बैंकों की भागीदारी के साथ कोष बढाकर 50,000 करोड रुपये किया गया है।



देश के हर ब्लाक में एक राष्ट्रीय आदर्श स्कूल खोलने की योजना को नए सिरे से हकीकत में बदलने की तैयारी की जा रही है। इस काम में निजी क्षेत्र की भागीदारी (पीपीपी) बढ़ाने के लिए केंद्रीय मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रालय नियमों में जरूरी बदलाव कर रहा है। छह साल पुरानी इस योजना में भागीदारी के लिए अब तक निजी क्षेत्र खुल कर सामने नहीं आया है।

मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि राष्ट्रीय आदर्श विद्यालय योजना में पीपीपी को लागू करने के लिए नए सिरे से तैयारी शुरू हो गई है। ये बताते हैं, "मंत्रालय के शीर्ष स्तर पर यह निर्देश दिया गया है कि इस मामले में लाल फीताशाही और अनावश्यक अड़चनों को खत्म किया जाए। सरकार का आकलन है कि निजी क्षेत्र इस योजना में खुलकर भागीदारी करना चाहता है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में यह मुमकिन नहीं हो पा रहा है।" देश भर के हर ब्लाक में एक राष्ट्रीय आदर्श विद्यालय खोला जाना है। ऐसे छह हजार स्कूलों में से 3,203 पीपीपी माडल पर खोले जाने हैं।

मंत्रालय के मुताबिक अब तक तीन चरण में इस योजना के लिए निजी क्षेत्र से साझीदारी के प्रस्ताव मांगे गए हैं। इसके तहत कुल 614 प्रस्ताव मिले, मगर मौजूदा नियमों की वजह से इनमें से 422 प्रस्ताव खारिज करने पड़े। इस तरह अब तक निजी क्षेत्र के सिर्फ 192 प्रस्ताव ही मंजूर हुए हैं। इस योजना में कारपोरेट कंपनियां और निजी शैक्षणिक संस्थान ही नहीं सामाजिक सेवा के उद्देश्य से गठित ट्रस्ट भी शामिल हो सकते हैं। इन स्कूलों में केंद्रीय विद्यालयों के सरीखी सुविधाएं और मापदंड होंगे। इनमें बेहतर शिक्षा के साथ ही खेलकूद और अन्य गतिविधियों पर पूरा जोर दिया जाएगा। इनमें इंटरनेट सुविधा, कंप्यूटर प्रशिक्षण और अन्य आइटी सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएंगी।




राजस्थान में अब उचित मूल्य की दुकानें पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के आधार पर चलाई जाएंगी। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री हेमसिंह भड़ाना ने बुधवार को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की अनुदान मांगों पर जवाब देते हुए विधानसभा में यह घोषणा की।

योजना के तहत 2014-15 में प्रायोगिक तौर पर कुछ उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से कई ब्राण्ड की उपभोक्ता वस्तुएं प्रतिस्पर्घी दरों पर उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए मल्टी ब्राण्ड चैन के साथ निजी जन-सहभागिता के आधार पर एक मॉडल विकसित किया जाएगा उक्त माडल राजस्व अर्जित करने वाला मॉडल होगा। प्रायोगिक योजना सफल होने पर सभी जिलों में विस्तार किया जाएगा।

ये घोष्ाणाएं भी

- समस्त उपभोक्ताओं को सितंबर 2014 तक नए राशन कार्ड उपलब्ध कराया जाएगा

- 2500 नई उचित मूल्य की दुकानें नवसृजित होगी, रिक्त चल रही 1232 दुकानें एवं नवसृजित होने वाली 2500 दुकानों के लिए डीलर नियुक्त किए जाकर पात्र आवेदकों को रोजगार उपलब्ध करवाया जाएगा।

- सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत छत्तीसगढ़, गुजरात, आन्ध्र प्रदेश की तर्ज पर गोदाम से उचित मूल्य की दुकान तक सामग्री की पहुंच एवं लक्षित उपभोक्ता को समय पर वितरण की सुनिश्चितता की जाएगी

- राजस्थान राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड के माध्यम से नॉन पी.डी.एस. वस्तुएं चाय, नमक, मिर्च व मसालों के पाउडर, साबुन आदि वस्तुओं के वितरण की व्यवस्था शुरू होगी

- राज्य में खाद्य सुरक्षा योजना समीक्षा के लिए बनाई गई टास्क फोर्स के सुझावों के बाद योजना को ठीक कियाज ाएगा - कुष्ठ रोग आश्रमवासी व घुमन्तु भेड़पालकों जैसी श्रेणी के वर्गो को पात्र परिवारों में शामिल करने पर विचार किया जाएगा। यह कार्यवाही आगामी माह से आयोजित होने वाले भामाशाह कार्ड नामांकन शिविरों में व्यक्तियों के सत्यापन के आधार पर करवाई जाएगी

- निर्घारित अवधि सितम्बर, 2014 तक समस्त उपभोक्ताओं को नए राशन कार्ड उपलब्ध करा दिए जाएंगे




नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने मुंबई हवाई अड्डा के लिए पीपीपी माडल की यह कहते हुए आलोचना की है कि जोखिम को उचित ढंग से निजी पक्ष को हस्तांतरित नहीं किया गया जिससे परियोजना की लागत दोगुनी हो गई और इसके अंतर की भरपाई विकास शुल्क के जरिए यात्रियों से की जा रही है। कैग ने परियोजना को समय विस्तार देने और हवाई अड्डा संचालक मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (मायल) को दंडित नहीं करने के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय को भी आड़े हाथों लिया। यह परियोजना चार साल देरी से चल रही है। संसद में पेश कैग रिपोर्ट में कहा गया, "अंकेक्षण से संकेत मिला कि छत्रपति शिवाजी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, मुंबई के विकास में रियायतग्राहियों को जोखिम का उचित हस्तांतरण नहीं किया गया।''रिपोर्ट के मुताबिक, "परियोजना की लागत 5,826 करोड़़ रुपये से बढ़कर 12,380 करोड़़ रुपये पहुंच गई, लेकिन हवाई अड्डा आर्थिक नियामकीय प्राधिकरण (एईआरए) द्वारा इस साल मार्च तक इसे 11,647.46 करोड़़ रुपये तक सीमित रखा गया।'' यद्यपि परियोजना की लागत दोगुनी हो गई, रियायतग्राही को इसके लिए वित्तीय जोखिम का सामना नहीं करना पड़ा क्योंकि अंतर की भरपाई विकास शुल्क लगाकर यात्रियों से वसूली गई, भले ही इस तरह के शुल्क का परिचालन, प्रबंधन, विकास समझौता (ओएमडीए) में प्रावधान नहीं था।


विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में भारत ने अपने खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम को लेकर कड़ा रुख अपना लिया है। डब्ल्यूटीओ की आम सभा में भारत ने साफ कह दिया है कि खाद्य सुरक्षा पर भारत की चिंता का स्थायी समाधान निकले बगैर व्यापार की सहूलियत बढ़ाने के समझौते का समर्थन नहीं किया जाएगा।

वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, डब्ल्यूटीओ के ट्रेड फेसिलिटेशन एग्रीमेंट के साथ खाद्य सुरक्षा और अल्प विकसित देशों की मदद के पैकेज के मुद्दे को शामिल करना जरूरी है। शुक्रवार को जेनेवा में डब्ल्यूटीओ जनरल काउंसिल की बैठक में भारत ने औपचारिक तौर पर अपना रुख स्पष्ट किया है।

आगामी 31 जुलाई तक विश्व व्यापार संगठन अंतरराष्ट्रीय व्यापार की बढ़ावा देने के लिए एक समझौते को अंतिम रूप देने में जुटा है। यह कदम गत दिसंबर में डब्ल्यूटीओ के बाली सम्मेलन में बनी सहमति के आधार पर उठाया जा रहा है। लेकिन विश्व व्यापार से जुड़े समझौते पर आगे बढ़ते हुए के साथ खाद्य सुरक्षा की चिंताओं के स्थायी समाधान को नजरअंदाज किया जा रहा है।

भारत ने डब्ल्यूटीओ के सामने कुछ चार बिंदु रखे हैं। जिसमें खाद्य सुरक्षा के लिए भंडारण सीमा तय करने के मुद्दे पर एक विशेष सत्र बुलाने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा 31 दिसंबर, 2014 तक खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के समाधान के लिए संस्थागत व्यवस्था बनाने की जरूरत बताई गई है।


Jul 26 2014 : The Times of India (Ahmedabad)

CAG's Rs 25k cr question to Gujarat







The Comptroller & Auditor General of India (CAG), the country's apex auditor, has slammed the Gujarat government in its five different audit reports for the year ended March 2013, for severe mismanagement of the state's financial resources. The CAG has called into question transactions amounting to more than Rs 25,000 crore. The reports were tabled in the assembly on Friday, the last day of the budget session, and covered the period when Narendra Modi won the last state election in Gujarat. The highlights:

Deficiencies in financial management I n two financial years -1999-2000 and 2011-12 -grants totalling `13,049.67 crore remained unused, which points to the inability of various government departments to spend grants. "Budgetary control should be strengthened to avoid deficiencies in financial management," the CAG noted.

Staff shortage in engg colleges E ngineering colleges are facing acute staff scarcity. In 16 government engineering colleges, 90% of professors' posts, 81% of principals', and 23% of assistant professors' are vacant. In 26 government polytechnics, 85% posts of principals, 74% of HODs, and 69% of laboratory assistants are vacant. Grants for machinery and equipment have not been adequately utilized.

Girls' edu scheme bungled T he Vidyalaxmi scheme that provides financial assistance of `2,000 to girls enrolling in class 1 and class 8 is riddled with irregularities. There are multiple instances of purchase of bonds for a single beneficiary, and eligible beneficiaries were deprived.

Loopholes in jail security T he system for maintaining work records in the office of the inspector general of prisons and the Gujarat State Police Housing Corporation Limited (GSPHCL) is inadequate. The GSHPCL truncated the scope of the construction of yard walls meant for hardcore criminals at the Sabarmati Central Prison without the consent of prison authorities. Lapses in security led to the excavation of a tunnel at the jail.

Heritage: Monumental apathy N o monument was identified for state protection after 2007.

Deficiencies were found in the manner of preservation of monuments. Survey work, excavation and research were negligible. No long-term planning for preservation and conservation.

Undue benefits to corporates G ujarat Maritime Board applied incorrect full wharfage rate under the Captive Jetty Agreement with Reliance Petroleum Ltd which resulted in the short recovery of `649.29 crore. The Gujarat Urja Vikas Nigam Ltd, by not fixing delivery points after the finalization of the power purchase agreement, passed undue benefit of `587.50 crore to Essar Power Gujarat Limited. The CAG also said that the non-monitoring of the construction quay in phase 1 of Adani Group-owned Mundra port led to the short recovery of `118.12 crore.

Professionalism crunch in state PSUs O f the 69 PSUs, 19 incurred a loss of `426.94 crore. Heavy losses were incurred by the Gujarat State Road Transport Corporation (`141.99 crore), Gujarat State Financial Corporation (`113.17 crore) and Alcock Ashdown (Gujarat) (`76.48 crore). There is a need for greater professionalism and accountability in the functioning of PSUs, the CAG said.

Poor tax recovery R O ver the past five years, the CAG had pointed to cases of short levy, c non-realization, U underassessment and e suppression of turnover by taxpayers to the commercial tax department.

Renewable energy burden T he state burdened electricity consumers with `473.20 crore. The state-owned Gujarat Urja Vikas Nigam Limited entered into contracts for purchasing excess power under the solar policy which resulted in . the increased burden.









Jul 26 2014 : The Economic Times (Mumbai)

NDA GOVT COMMITTED TO LOWER TAXES, ASSERTS FM - Jaitley Offers Only Partial Tax Relief for Investors in Debt MFs


NEW DELHI

OUR BUREAU





Tax sops for wind power sector to stay; Decision on tax avoidance rules soon

Finance Minister Arun Jaitley had some cheerful news for investors in debt-oriented mutual funds who had sold their holdings ahead of the Union Budget by sparing them from higher capital gains tax, even as he extended tax sops to the wind power sector as part of the Modi government's plan to promote clean energy .

Winding up the debate on the Finance Bill in the Lok Sabha on Friday , Jaitley said the government is committed to boosting economic activity to put the country back on a high-growth trajectory , creating more jobs without burdening people and would soon take a decision on controversial tax avoidance rules.

The minister said the high tax rate of 20% on debt mutual funds will apply from July 11, the day after the budget was presented, and not from April 1. The Finance Bill was subse quently passed by the Lok Sabha by voice vote.

The change is aimed at ending the tax arbitrage en joyed by short-term investors in debt funds compared with other avenues such as bank deposits. In terest income from banks and other debt investments is clubbed with income and taxed at the marginal rate.

The budget had raised the capital gains tax on debt funds to 20% from 10% and increased the holding period for levy of long-term capital gains tax to 36 months. The indexation benefit, or adjustment for inflation, will still be available to investors.

Jaitley said though the facility was provided for small and retail investors, it was mostly being used by large investors. High net worth investors were investing for a 12month period in these schemes to avail of 10% capital gains tax on income that would otherwise have been taxed at 30%.

Some MPs and the industry had termed the measure as being retrospective in nature, contradicting the government's pledge. The problem has arisen because usually the budget is presented in February.

This year it had to be done in July because of the election, but direct tax changes are effective from the start of the financial year. The minister moved an amendment to the Finance Bill that says units that have been sold and redeemed before July 10 will be considered as long-term capital assets if they were held for a period of more than 12 months.

The same treatment has also been extended to shares of unlisted companies.

The mutual fund industry wasn't happy with the extent of the move. "It's just a marginal relief," said Kilol Pandya, senior fund manager, LIC Nomura MF.

Experts said it would be a double whammy of sorts for some investors.

"Those investors who invested before July 10, 2014, with the belief that the holding period for classification was 12 months and the rate of capital gains is 10% are in for a nasty surprise," said M Lakshminarayanan, partner, Deloitte Haskins & Sells LLP. "They are doubly impacted since not only do they have to pay taxes on those units which are redeemable within a period of just over one year, they have to pay capital gains tax at 20%." Sameer Gupta, tax leader for financial services, EY, said, "While the proposed amendment mitigates the higher tax burden for unit redemptionssale in the current financial year before the budget announcement was made, the industry participants' demand that these provisions apply only to new investments has not been met." Some mutual funds withdrew fixed maturity plans after the change in tax rules.

Jaitley also said the government will soon review the General Anti-Avoidance Rules (GAAR) and take a stand. Industry and investors have been seeking a further deferral of GAAR, at present set to be rolled out from April 1.

"I have not gone into the details of it yet due to the budget exercise. But I now intend to spend some time on it. The government then will take a final view as to what to do," Jaitley said. He also said his government was in favour of lower taxes.

"We want to revive investor sentiment which had been disturbed… Ours is not a high-tax government… A high-tax government cannot promote business activity, since it will make domestic products non-competitive," he said.

High taxes also drive consumers away, Jaitley said, assuring the House the government would not resort to indiscriminate levy of taxes with retrospective effect that create additional liabilities on businesses and send wrong signals to foreign investors, a dig at the previous government, which did precisely that.

He said the decision to extend excise duty cuts for cars and other consumer goods until the end of this year and give tax breaks for individual taxpayers would perk up demand and help an economic rebound.

"We want to revive the manufacturing sector… We want to put more money in the hands of the average citizen so that his spending also increases and this larger economic activity will then lead to an enhancement of the growth rate itself," he said.

India's manufacturing growth fell to -0.7% in 2013-14, the first contraction since 199192, pulling overall GDP growth down to below 5% for the second consecutive year.

The finance minister said he will attempt to get the new goods & services tax (GST) legislation finalised within the fiscal year. He said he had held discussions with state governments on comprehensive indirect taxes reform and was "trying to find resources" to compensate them for cuts in central sales tax.

Jaitley also announced the setting up of new benches for the authority of advance rulings, extended the settlement commission's scope to cut down tax disputes and gave discretionary powers to

the apex direct taxes body — the Central Board of Direct Taxes — to waive or curtail penalties on late filing of income-tax returns. In the case of indirect taxes, the penal rate of interest will only apply to the original tax demand.

Jaitley assured investors the government would not use the retrospective amendment on taxing indirect transfers to create new liabilities. But he said Parliament had a sovereign right to enact legislation retrospectively.

"The present government will not use that right to create new liabilities. That is an assurance we wanted to give to investors within the country and investors outside so that we are able to assure people of a stable tax regime… I have allowed the judicial process to sort out the past and for the future we won't allow this problem to take place in India," he said.

The finance minister rejected the notion that stagflation had taken hold in India. "I think it will be too extreme to say that we had reached that situation (stagflation). Our growth had slowed down, but that there was stagnation may be perhaps an overstatement. It is this slowdown which we really need to fight today," he said.

The minister pointed out that inflation cannot be tackled just by raising interest rates. "When you have larger economic activity, you tackle the supply side also.

You make more goods, more products, more commodities, and more agricultural items available in the market. That is one way of fighting inflation. Therefore, the whole approach of the budget and the road map which we have in mind is intended to be in that direction," he said.

The RBI is due to make the next monetary policy announcement on August 5.

Jaitley said the new government is committed to addressing tackling black money. "I can assure that you don't have to wait for long to see that we have brought back the black money," the finance minister said.


Jul 25 2014 : The Economic Times (Kolkata)

Taqa Pulls Out of Rs 10,500-cr Deal for Jaypee Hydro Plants

ARIJIT BARMAN & RACHITA PRASAD MUMBAI

MUMBAI





Changing Dynamics Prospects improve for potential suitors Adani Group and Sajjan Jindal's JSW on Abu Dhabi company's sudden exit

In a sudden and unexpect ed move, the Abu Dhabi National Energy Co (TAQA) on Thursday pulled out of its Rs 10,500-crore ($1.6-billion) deal to buy two hydro power plants from the diversified infrastructure conglomerate Jaypee Group. This, say multiple sources, considerably improves the prospects of at least two other potential suitors, Adani and JSW, both of whom have already approached the Jaypee Group to buy out either their entire hydro portfolio or merge the power businesses.

According to the sources mentioned above, both Gautam Adani and Sajjan Jindal have personally met the Jaypee Group top brass led by Manoj Gaur for these specific discussions. While Adani is believed to have offered to buyout the entire hydro portfolio to diversify his already large thermal portfolio, Jindal is keen on a merger between the two power businesses ­ JSW Energy and Jaiprakash Power Ventures to create a powerhouse with an existing portfolio of 5340 MW of operational assets.

If successful, these dialogues could lead to the largest power sector consolidation in the country and will catapult either Adani or JSW as the leading private sector power generator. For Jaypee ­ among the top 10 indebted cor porate groups in India with group net debt at over Rs 63,000 crore in FY 14 ­ large scale divestments is also the only way out to lessen the strain on its highly stretched balance sheet. Jaypee Power alone has accumulated crore Rs 29,000 crore of debt largely on account in its new capaci ties in UP and Madhya Pra desh which are due to commence.

Most believe that the JSW discussions are still pre liminary and therefore more fluid in nature.

If a merger for the entire Jaypee portfolio becomes unwieldy , then JSW may also negotiate for the 3 thermal assets of Jaypee Power. JSW is also parallely in final stages of discussions to buy the Udipi power plant from Lanco. A detailed mail sent to JSW Group spokesperson did not generate any response. Top company executives ET reached out to on Thursday declined to talk on what they said were "rumours."

JSW Energy, has a capacity of 3,140 mw with aspirations to scale it up to 11,770 mw.

Sources said that the Sajjan Jindal-led company may find it easier to takeover the thermal power projects of Jaiprakash Power as it will help them to add capacity with projects with secured fuel supplies.

JSW Energy is strategically moving from a merchant power model to a long term pact based electricity supplier and by acquiring projects like that of Jaiprakash's, it will reduce its exposure to the short term market. On the other hand, sources say the AdaniJaypee discussions around the hydro projects seem to have progressed more.











Jul 24 2014 : The Economic Times (Kolkata)

TCS Crosses Rs 5 Trillion Market Cap







TCS, India's most valuable company based on market cap, crossed Rs 5 lakh crore in market value on Wednesday , a big achievement considering the business environment it's been operating in. It has also found itself a berth among the global top five business software companies. The market value of TCS is more than that of the next four Indian IT companies combined, and exceeds that of the other Tata Group firms put together as well. Sustained growth momentum over the past four years relative to peers is the key factor that has kept the stock buzzing. In addition, a special dividend of `40 declared last week has attracted investors. VROOMING VALUATION: The TCS stock has gained 47% over the past year following a stellar financial performance. It has remained a stock of preference among portfolio managers despite the recent exodus of market participants to stocks in core sectors. At Wednesday's close of Rs 2,586.9, the stock traded at a trailing price-earnings ratio of 25.












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