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सर्वोच्च आतंकवाद निरोधक संगठन बनाने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव के खिलाफ गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों और भाजपा शासित राज्यों के साथ ही कांग्रेस के सहयोगी तृणमूल ने कड़ा विरोध किया है। ममता बनर्जी के साथ कुल आठ मुख्यमंत्री पुरजोर तरीके से इसके खिलाफ खड़

 सर्वोच्च आतंकवाद निरोधक संगठन बनाने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव के खिलाफ गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों और भाजपा शासित राज्यों के साथ ही कांग्रेस के सहयोगी तृणमूल ने कड़ा विरोध किया है। ममता बनर्जी के साथ कुल आठ मुख्यमंत्री पुरजोर तरीके से इसके खिलाफ खड़े हो गए हैं।


Saturday, 18 February 2012 10:46

जनसत्ता ब्यूरो 
नई दिल्ली, 18 फरवरी। सर्वोच्च आतंकवाद निरोधक संगठन बनाने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव के खिलाफ गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों और भाजपा शासित राज्यों के साथ ही कांग्रेस के सहयोगी तृणमूल ने कड़ा विरोध किया है। ममता बनर्जी के साथ कुल आठ मुख्यमंत्री पुरजोर तरीके से इसके खिलाफ खड़े हो गए हैं। पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, हिमाचल, पंजाब, गुजरात, बिहार, ओडिशा व तमिलनाडु का कहना है कि यह भारतीय संघ की जड़ पर प्रहार है। राज्य की शक्तियां हड़पने की कोशिश है। वहीं, केंद्र सरकार ने सभी आलोचनाओं को खारिज कर दिया और राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्र (एनसीटीसी) के गठन की ओर आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता जताई। केंद्र की स्थापना करना गृह मंत्री पी चिदंबरम का विचार है।
ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने विरोध की शुरुआत की और पश्चिम बंगाल, बिहार और तमिलनाडु के मुख्यमंत्रियों के अलावा तेदेपा नेता व आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू को इस मुद्दे पर पत्र लिखा। सबसे पहली प्रतिक्रिया कांग्रेस की सहयोगी तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी की तरफ से आई जिन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर उनसे फैसले की समीक्षा कर उसे वापस लेने की अपील की। उन्होंने चिंता जताई कि एनसीटीसी राज्यों के संघीय ढांचे का अतिक्रमण करेगा। बनर्जी ने कहा कि राज्य सरकार के लिए केंद्र सरकार व केंद्रीय एजंसियों की स्वेच्छारी शक्तियों को स्वीकार करना कठिन है। प्रधानमंत्री को तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने भी चिट्ठी लिखी और कहा कि प्रस्तावित संस्था में 'खामियां' हैं और इसमें प्रावधान हैं कि वह राज्यों की वैधानिक शक्तियों को हड़प सकती है।
भाजपा ने शुक्रवार को कहा कि राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी केंद्र यानी एनसीटीसी गठन को लेकर कुछ राज्यों की आपत्तियां यूपीए सरकार की कार्यप्रणाली  के खिलाफ एक तरह से अविश्वास दर्ज कराना है। उसने कहा कि सरकार का यह फैसला राज्य सरकारों को विश्वास में लेकर नहीं किया गया है। इसलिए यह संघीय स्वयत्तता का उल्लंघन है।
पार्टी प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि यूपीए के घटक दल तृणमूल कांग्रेस के शासन वाले राज्य सहित अनेक राज्य केंद्र की कार्यप्रणाली से नाखुश हैं। एनसीटीसी का गठन संघीय स्वयत्तता के खिलाफ है। इसने केंद्र सरकार के काम काज के तरीके पर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में राज्य सरकारों को साथ लेकर नहीं चलना चाहती है।

रूडी ने कहा कि केंद्र के लिए राज्यों की ओर से दर्शाया गया यह अविश्वास बहुत ही चिंता की बात है। एक तरह से यह केंद्र के लिए अविश्वास जताने जैसा है। राज्यसभा सांसद ने साथ ही कहा कि आतंकवाद के खिलाफ किसी भी लड़ाई में भाजपा केंद्र की ओर से उठाए जाने वाले कदमों के साथ है बर्शते इसमें राज्यों को साथ लेकर चला जाए। 
उधर एनसीटीसी के गठन को लेकर गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों के विरोध को केंद्र सरकार ने यह कहते हुए नकार दिया है कि इसके गठन से राज्यों के अधिकारों का किसी तरह हनन नहीं होगा। वहीं एनसीटीसी की आलोचनाओं को लेकर केंद्रीय गृह सचिव आर के सिंह ने कहा कि एनसीटीसी देशहित में है। इसके बारे में अधिसूचना जारी करने से पहले राज्यों से सलाह मशविरा करने की कोई जरूरत नहीं थी। इसका गठन मौजूदा कानूनों के तहत ही हो रहा है।
एनसीटीसी पर तृणमूल कांग्रेस व दूसरे विपक्षी दलों के विरोध को तवज्जो नहीं देते हुए कांग्रेस ने कहा कि इनके कुछ प्रावधान राजग के शासन काल के दौरान बने थे जब 2002 में विवादास्पद पोटा पास हुआ था। पार्टी प्रवक्ता रेणुका चौधरी ने पत्रकारों से कहा कि राजग सरकार में कई सहयोगी थे जब कठोर कानून पारित हुआ था। जब कठोर कानून बनाए गए थे तो इनमें कई लोग उनसे जुड़े थे। कानून की समीक्षा व इसे वापस लेने को लेकर ममता बनर्जी के प्रधानमंत्री को लिखे पत्र के बाद उनकी यह टिप्पणी आई है। तृणमूल और बीजद दोनों 2002 में राजग सरकार में शामिल थे। चौधरी ने आतंकवाद से निपटने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी की भी बात की।
पार्टी के एक और प्रवक्ता मनीष तिवारी ने भी एनसीटीसी के मूल में राजग सरकार को बताते हुए कहा कि राजग सरकार के दौरान गठित मंत्री समूह की अनुशंसाओं के तहत एनसीटीसी का गठन हो रहा है। रेणुका चौधरी ने उन सवालों का जवाब नहीं दिया कि ममता बनर्जी का यह प्रयास क्या अमित्रवत है या वे यूपीए के विवेक को जगाने का काम कर रही हैं या वे विपक्ष के साथ हो गई हैं। चौधरी ने कहा कि हम हमेशा उन्हें सहयोगी के रूप में देखते हैं। हमारा उनसे कोई झगड़ा नहीं है। राज्य सरकार में हम उनकी मजबूरियों को समझते हैं और प्रशंसा करते हैं।

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