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Jyoti basu is dead

Dr.B.R.Ambedkar

Tuesday, October 29, 2013

स्वर्ण मृग मरीचिका

स्वर्ण मृग मरीचिका

पलाश विश्वास

धनतेरस पर सोना महंगा!

सोना

सोना या स्वर्ण अत्यंत चमकदार मूल्यवान धातु है। यह आवर्त सारणी के प्रथम अंतर्ववर्ती समूह में ताम्र तथा रजत के साथ स्थित है। इसका केवल एक स्थिर समस्थानिक प्राप्त है। विकिपीडिया


चिह्न: Au

गलनांक: 1,064 °C

इलेक्ट्रॉन विन्यास: [Xe] 4f14 5d10 6s1

परमाणु संख्या: 79

CAS आईडी: 7440-57-5

परमाणु द्रव्यमान: 196.96657 ± 0.000004 u


धनतेरस पर 33,000 रुपए

के पार जा सकता है सोना


नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कोयला खदान आबंटन मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की भूमिका की जांच करवाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें मांग की गई थी कि कॉरपोरेट घरानों को खदान आबंटन के लिए लिखे गए सभी सिफारिशी पत्रों की जांच करवाई जाए।


सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वो यह नहीं चाहते कि देश के प्रधानमंत्री की इस तरह से जांच हो। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने कोल ब्लॉक आबंटन के लिए लिखे गए सिफारिशी खतों की जांच की मांग भी ठुकरा दी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी।



स्वर्ण मृग मरीचिका के पीछे

दौड़ने वाले लोग आखिर

अपने अपने मरुद्यान

बसाने के खातिर तजिंदगी

होते रहते लहूलुहान


इस मृत्यु उपत्यका में

जिसे अपना देश नहीं

मानते थे कवि नवारुण

सत्तर के दशक में

जीने के लिए मृग मरीचिका

भी बेहद जरूरी है


कत्लेआम के लिए बहुत

माफिक होता है

जश्न का माहौल

फिजां बदलने की

औकात किसी की

होती नहीं मगर

हर शख्स फिजां

बिगाड़ने में लगा है


इसे चाहो धर्म कहलो

चाहे कहलो राजनीति

या फिर सीधे सीधे कह दो

जनसंहार संस्कृति

फर्क कुछ पड़ता नहीं

नतीजा हर मायने में

वही का वही,जो किसी

मृत्यु उपत्यका का

होता है रोजनामचा

जिसे भोगता सारा देश

लेकिन लिखता कोई नहीं


खाद्य मुद्रास्फीति

बीस फीसद पार

शरद पवार के लिए

राजनीति में कोई

नहीं अस्पृश्य

आयात निर्यात का

खेल जारी है


सुप्रीम कोर्ट का एक

और फैसला भी आ गया

सीबीआई न प्रधानमंत्री के

खिलाफ जांच करेगी

और न कोल गेट के

सिलसिले में उनके

खिलाप दायर होगी

कोई प्रथम सूचना रपट


बराबर है,आखिर वे

जनता की चुनी हुई

सरकार है

और जाहिर है

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

प्रधानमंत्री के

खिलाफ हो ही नहीं सकता


यह वैसा ही हुआ कि

तमाम घोटालों में

उछल रहा महामहिम

का नाम,कारपोरेट

लाबिइंग के सारे तार

जुड़े हैं रायसीना हिल्ज से

जैसे रिमोट कंट्रोल

अंदर भी है और

सात समुंदर पार भी है

असर एक सा है

दस जनपथ हो या

व्हाइट हाउस

कोई फर्क नहीं पड़ता


राष्ट्रपति के खिलाफ

कोई मुकदमा चल

नहीं सकता

कोई जांच हो

नहीं सकती

और कारपोरेट हितों

के विरुद्ध

न महाभियोग संभव है

और न अनास्था


संवैधानिक रक्षाकवच है

हर घोटाले से

बचने के लिए

प्रधानमंत्री के मातहत

सीबीआई उनके

किलाफ जांच कर

ही नहीं सकती

तो फाइल क्यों नहीं कर

देते बंद तुरंत

पहेली बूझने को यही

बस बाकी है


सशस्त्र सैन्य अधिकार

अधिनियम है

जनसंहार के लिए

सामूहिक बलात्कार के लिए

अपनी ही जनता के खिलाफ

प्रकृति,मनुष्य और

पर्यावरण के खिलाफ

सैन्य रक्षा कवच

वैसा ही रक्षा कवच है

भारत सरकार

और भारत राष्ट्र के

प्रधानों के लिए

बाकी सबकुछ

स्टिंग मात्र है

कारपोरेट हित में लीक

कारपोरेट हित में निपटान

और कारपोरेट हित में

उत्तेजक सेक्सी सुर्खियां


सबसे बड़ा घोटाला

तो बायोमेट्रीक है

डिजिटल है

प्रिज्म है

और है खुफिया

निगरानी हर नागरिक की

तकनीक है जनगण के विरुद्ध

तकनीक वाले हो रहे मालामाल

बिना संसदीय अनुमोदन के

आईटी कंपनीवाले कैबिनेट मंत्री

डिजिटल है सबकुछ

सबकुछ बायोमेट्रिक

सबकुछ स्पेक्ट्रम

सबकुछ थ्री डी

तकनीक मालामाल


सोने की खोज का भी

अजीब तमाशा

देख लिया हमने

दंगों के ठीक बाद

पुरतात्विक शोध

के सारे आयोजन बेनकाब

ऐसे ही होते हैं सारे

के सारे सरकारी खर्च

तमाम चमत्कार

स्वाप्नादेश से

चल रही है सरकारें

चाहे राजनीति कहो

या पिर कहो धर्म

या साफ साफ कह दो

जनसंहार

नतीजे पर कोई

फर्क नहीं पड़ता


चुनावी समीकरण

साधने के लिए

सामाजिक योजना

या नकद सब्सिडी

या आधार कार्ड

या प्रिज्म

या ड्रोन

की तरह

देस का हर कोना

अगर बन जाये

गोधरा या

मुजफ्परनगर

कोई ताज्जुब नहीं


आर्थिक सुधार के लिए

कहीं भी उगाया

जासकता है फुकोशिमा

जैसे ऊर्जा प्रदेश के लिए

अनिवार्य है धर्म पर्यटन

और ऊर्जा प्सल धर्म

के रसायन से

हो जाता जलप्रलय

विकास दर के लिए

अब कहीं भी हो सकती है

भोपाल गैस त्रासदियां


किसी को रोकने के लिए

किसी को तिलक लगाने

के लिए भी कहीं भी

पोड़ा जा सकता है

कभी भी कोई परमाणुबम

इसमें कोई ताज्जुब भी

नहीं है उस देश में

जहां हर किसान की

जीने की राह

खुदकशी की मंजिल

तक जाती है

और हर दूसरा शख्स

मानव बम है

इसे चाहे धर्म कह लो

या फिर राजनीति

कोई फर्क नहीं पड़ता


मजा बहुत आ रहा है

कीमतें चाहें

छू लें आसमान

अब हर मनुष्य

उपभोक्ता है

और खुले बाजार में

सरकारी मौद्रिक कवायद ऐसी

ऐसा अबाध कालाधन कारोबार

कि अब कोई नहीं

बचेगा भूखा कोई

हर शख्स नंगा इतना

कि कोई नंगा बचागा नहीं

कोई नंगा कहीं कोई


और खुश खबरी है कि

देहात चाहे खप रहा है

बाजार में बहुत तेज

लेकिन पूंजी की

आस्था और वर्ण वर्चस्व

जस का तस


खोज परिणाम

  1. कोल ब्लॉक आबंटन के लिए समाचार

  2. कोल ब्लॉक आबंटन :गायब फाईलों की खोज जारी

  3. www.deshbandhu.co.in/newsdetail/192731/1/20

  4. रायपुर ! केन्द्रीय कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने कहा है कि कोयला खदानों के आवंटन की जांच सुप्रीम कोर्ट व सीबीआई कर रही है। कोयला घोटाले से संबंधित गायब फाईले कल तक नही मिलने पर एफआईआर दर्ज करवायी जायेगी। इंटक के राष्ट्रीय ...

  5. छत्तीसगढ़ : भटगांव कोल ब्लॉक आबंटन रद्द - Online Hindi ...

  6. www.deshbandhu.co.in/newsdetail/169421/1/0

  7. रायपुर ! कोल मंत्रालय ने आईएमजी की अनुशंसा पर भटगांव एवं एक्सटेक्शन 2 कोल ब्लाक काआबंटन रद्द कर दिया गया है। इसकी विधिवत सूचना सीएमडीस को भेज दी गई है। इसके साथ ही बैंक गारंटी के रूप में कंपनी द्वारा जमा कराई गई राशि 1.59 करोड़ रुपए को ...

  8. Comments, Reader's Opinion on Hindi News Article | कोल ब्लॉक ...

  9. navbharattimes.indiatimes.com/pollopinions/24430560.cms?ordertype...

  10. 20-10-2013 - कोल ब्लॉक आबंटन में अपनी भूमिका स्वीकार करना प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की. नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने-आप साइट पर लाइव होते हैं। हमने फिल्टर लगा रखे हैं ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द या कॉमेंट लाइव न होने पाएं। लेकिन अगर ऐसा कोई ...

  11. कोल ब्लॉक आबंटन की चित्र

  12. - छवियों की रिपोर्ट करें

  13. कोल ब्लॉक आबंटन :गायब फाईलों की खोज जारी,Raipur ...

  14. news.raftaar.in/HindiNews/Raipur...%20...co/Entertainment

  15. नई दिल्ली ! डूरंड कप फुटबाल टूर्नामेंट के तहत गुरुवार को अंबेडकर स्टेडियम में हुए फाइनल मुकाबले में ओएनजीसी को 2-1 से मात देकर मोहम्मडन स्पोर्टिग क्लब ने दूसरी बार खिताब पर कब्जा कर लिया। इससे पहले मोहम्मडन स्पोर्टिग ने 1940 में डूरंड कप ...

  16. कोल ब्लॉक आबंटन : CHAUTHI DUNIYA : चौथी दुनिया

  17. www.chauthiduniya.com/tag/कोल-ब्लॉक-आबंटन

  18. ... गंभीर और सम्मानित व्यक्ति हैं और अपने तर्कों से विपक्ष को लाजवाब करने की योग्यता रखते हैं, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि वे अपनी बात रखने […] Tags: Chauthi Duniya, Kamal Morarka,कोल ब्लॉक आबंटन, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, पीडीएस, सीएजी, सीबीआई

  19. कोल ब्लॉक आबंटन - One.in

  20. www.one.in/search/कोल+ब्लॉक+आबंटन

  21. Get complete latest news on कोल ब्लॉक आबंटन & Explore more on कोल ब्लॉक आबंटनnews from one.in.

  22. IBN7 - कोल ब्लॉक आबंटन में सरकारों ने किया देश के ...

  23. https://www.facebook.com/ibnkhabar/posts/10151404110707773

  24. कोल ब्लॉक आबंटन में सरकारों ने किया देश के साथ विश्वासघात.

  25. भारतीय कोयला आवंटन घोटाला - विकिपीडिया, मुक्त विश्वकोश

  26. en.wikipedia.org/wiki/Indian_coal_allocation_scam

  27. Coal block allocation के लिए खोजे गए अंग्रेज़ी दस्तावेज़ का अनुदित परिणाम

  28. मार्च 2012 में जारी किए गए एक मसौदा रिपोर्ट में, भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) कार्यालय एक में आवंटन कोयला ब्लॉकों का भारत सरकार पर आरोप लगाया...

  29. सीबीआई ने हिंडाल्को को कोल ब्लॉक आवंटन पर पीएमओ फ़ाइल की संवीक्षा -...

  30. www.thehindu.com/news/national/cbi...pmo.../article5282096.ece

  31. Coal block allocation के लिए खोजे गए अंग्रेज़ी दस्तावेज़ का अनुदित परिणाम

  32. सीबीआई पर परिस्थितियों को समझने के लिए हिंडाल्को को कोयला ब्लॉक आवंटन पर प्रधानमंत्री कार्यालय से प्राप्त फाइल की छानबीन शुरू कर दी है...

  33. 10 को एफडीआई, कोल ब्लॉक आबंटन और महंगाई पर ...

  34. www.imnb.org/view-news.php?sno=1106

  35. रायपुर। (आईएमएनबी) प्रदेश भाजपा कार्यालय एकात्म परिसर में 10 अक्टूबर को एक कार्यशाला का आयोजन किया गया है। कार्यशाला में एफडीआई,कोल ब्लॉक आबंटन और महंगाई के मुद्दों पर चर्चा की जाएगी जिसका उद्घाटन प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ...

  36. नीति-नियम और तर्कसंगत से परे

  37. प्रभात खबर-20-10-2013

  38. इस जांच समिति ने सार्वजनिक क्षेत्र को कोल ब्लॉक आबंटन की संस्तुति की थी. ओड़िशा के झारसुगड़ा जिला में तालाबीरा-2 और तालाबीरा-3 कोयला ब्लॉक नियमानुसार-निर्णयानुसार सार्वजनिक क्षेत्र को आबंटित किये जाने थे.

  39. *
  40. चर्चा: क्या पूर्व कोल सचिव के बयानों पर पीएम को ...

  41. आईबीएन-7-16-10-2013

  42. पारख की मानें तो पहले कोल ब्लॉक का आबंटन सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी नैवेली को हुआ था। लेकिन इस बाबत आदेश जारी नहीं हुआ थे। इस बीच पारख से मिलने कुमार मंगलम बिड़ला आए। उन्होंने उनके ऑफिस में बाकायदा प्रेजेंटेशन देकर ...

  43. *
  44. पहली बार फंसे बड़े उद्योगपति : 'कोयले की कालिख ...

  45. देशबन्धु-15-10-2013

  46. सीबीआई ने कोयला ब्लाक आबंटन में कथित अनियमितता मामले में आज एक नई प्राथमिकी दर्ज कराई, जिसमें आदित्य बिडला समूह के ... सीबीआई सूत्रों के मुताबिककोल ब्लॉक की लापता फाइलों के मामले में कोल मंत्रालय के कई अधिकारियों पर भी शक है।

  47. +

  48. और अधिक दिखाएं

  49. *
  50. हिंडाल्को के बचाव में उतरा पीएमओ

  51. Raviwar-19-10-2013

  52. प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने हिंडाल्को को ओड़िशा के तालाबीरा में साल 2005 में किए गए कोल ब्लॉक आबंटन को जायज ठहराते हुए कहा है कि यह आबंटन योग्यता पर आधारित था. पीएमओ ने शनिवार को इस बारे में एक बय़ान जारी कर कहा है ...

  53. *
  54. कोल घोटाले में CBI का सामना करने को तैयार हूं ...

  55. आईबीएन-7-24-10-2013

  56. प्रधानमंत्री का ये बयान बिड़ला समूह की कंपनी हिंडाल्को को दिये गए कोयला ब्लॉकपर मचे बवाल के बाद आया है। 2005 में हुए उस आबंटन के सिलसिले में दर्ज एफआईआर में उद्योगपति कुमारमंगलम बिड़ला और पूर्व कोयला सचिव पीसी पारख को ...

  57. *
  58. Sahara Samay

  59. कोल घोटाले पर बोले पीएम, CBI के सामने पेशी को तैयार

  60. आईबीएन-7-24-10-2013

  61. प्रधानमंत्री का ये बयान बिड़ला समूह की कंपनी हिंडाल्को को दिये गए कोयला ब्लॉकपर मचे बवाल के बाद आया है। 2005 में हुए उस आबंटन के सिलसिले में दर्ज एफआईआर में उद्योगपति कुमारमंगलम बिड़ला और पूर्व कोयला सचिव पीसी पारख को ...

  62. *
  63. दस्तावेज के हर पन्ने को पीएम ने नहीं पढ़ा: खुर्शीद

  64. p7news-19-10-2013

  65. मगर, उनके इस बयान का मतलब क्या है? वो भी तब जब प्रधानमंत्री कार्यालय ये सफाई दे चुका है कि बिड़ला को कानून के तहत ही कोल ब्लॉक दिया गया। सबसे अहम बात ये कि, 2005 के जिस कोल ब्लॉक आबंटन घोटाले को लेकर इतनी हाय तौबा मची हुई है।


  1. किस देश के पास कितना है सोना, 1000 टन सोने का मतलब ...

  2. ABP News-18-10-2013

  3. नई दिल्ली. मान लीजिए एक हजार टन सोना निकल गया. एक हजार टन सोने का मतलब करीब तीन लाख करोड़ रुपये.

  4. 1000 टन सोना क्या लोहा भी नहीं मिलेगा!

  5. नवभारत टाइम्स-19-10-2013

  6. लखनऊ।। गंगा किनारे एक टीले रूपी किले में हजार टन सोना होने के साधु के सपने के बाद से शुरू हुई खोदाई ...

  7. *
  8. Sahara Samay

  9. किले में दबे 1000 टन सोने के खजाने पर राजा के ...

  10. Zee News हिन्दी-17-10-2013

  11. उन्नाव: डौडिया खेड़ा के अमर शहीद राजा राव रामबक्स सिंह के किले में 1000 टन सोना के दबे होने की खबर फैलने ...

  12. +

  13. और अधिक दिखाएं

  14. *
  15. साधु के सपने में आया 1000 टन सोना, अब होगी खुदाई

  16. आईबीएन-7-17-10-2013

  17. नई दिल्ली। यूपी के उन्नाव में आज भी एक सिद्धपुरुष हैं जिन्हें सुनहरे सपने आते हैं। ये हैं साधु शोभन सरकार।

  18. *
  19. किले में दबे '1000 टन सोने' के लिए खुदाई शुरू

  20. आईबीएन-7-18-10-2013

  21. नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सटे उन्नाव जिले के डौंडिया खेड़ा गांव में एक हजार टन सोना ...

  22. *
  23. Indo Politics

  24. डौंडियाखेड़ा में नहीं मिला 1000 टन सोने का ...

  25. Zee News हिन्दी-42 मिनट पहले

  26. उन्नाव/नई दिल्ली : संत शोभन सरकार के सपने के आधार पर 1000 टन सोना ढूंढने के लिए उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले ...

  27. +

  28. और अधिक दिखाएं

  29. साधु को आया सपना, उन्नाव में जमीन के नीचे 1000 टन ...

  30. ABP News-15-10-2013

  31. कथित संत ने भविष्यवाणी की है कि खंडहर हो चुके किले में 1000 टन सोना जमीन के भीतर छिपाकर रखा हुआ है.

  32. *
  33. 1000 टन स्वर्ण भंडार की खबर सुन किले पर बढ़ी भीड़

  34. अमर उजाला-16-10-2013

  35. उत्तर प्रदेश में उन्नाव के डौडिया खेड़ा के राव रामबक्स सिंह के किले में एक हजार टन सोना दबे होने के दावे ...

  36. 1000 टन सोना मिलने के दावे में दम नहीं: ASI निदेशक

  37. ABP News-19-10-2013

  38. क्या उन्नाव के किले में हजार टन सोना मिलने का सपना टूटने वाला है? भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के ...

  39. यूपी : सपने में दिखे एक हजार टन सोने के लिए खुदाई ...

  40. एनडीटीवी खबर-17-10-2013साझा करें

  41. साधु का भी दावा है कि पूरा हजार टन सोना निकलेगा न एक तोला ज्यादा न एक तोला कम और अगर ऐसा न हो तो सरकार उन पर देशद्रोह ...

  1. साधु के सपने का सोना

  2. खबरें l Deutsche Welle-18-10-2013

  3. शोभन के सपने के मुताबिक 19वीं शताब्दी के इस किले के नीचे 1000 टन सोना दबा है. इसे खोजने के लिए भारतीय ...

  4. *
  5. 1000 टन सोने के लिए खुदाई का काम शुरू, धारा 144 लागू

  6. अमर उजाला-18-10-2013

  7. उत्तर प्रदेश के उन्नाव के डौंडिया खेड़ा के राव राम बक्स सिंह के किले की किलेबंदी के बाद एएसआई की टीम ने खुदाई का काम ...

  8. '1000 टन सोने के सपने' से किले में 'दिवाली'

  9. नवभारत टाइम्स-19-10-2013

  10. -जांच में किले के नीचे किसी धातु के दबे होने की पुष्टि हुई है। यह धातु क्या है? अभी बता पाना बड़ा मुश्किल ...

  11. *
  12. क्या टूटने वाला है 1000 टन सोने का सपना?

  13. Webdunia Hindi-19-10-2013

  14. सैयद जमाल हसन ने यह कहकर सपना तोड़ दिया है कि 1000 टन सोना मिलने के दावे में दम नहीं है। अब सवाल यह है कि क्या सच में अब ...

  15. *
  16. 1000 टन सोने की खोज: डौंडिया खेड़ा में 'पीपली ...

  17. नवभारत टाइम्स-18-10-2013

  18. कल तक जो गांव अपनी बदहाली के लिए जाना जाता था आज वहां किसी साधु के सपने पर 1000 टन सोने की खोज के लिए ...

  19. *
  20. Webdunia Hindi

  21. उन्नाव में जमीन के नीचे 1000 टन सोना!

  22. नवभारत टाइम्स-12-10-2013

  23. एजेंसियां, उन्नाव : उन्नाव जिले में जमीन के नीचे करीब 1000 टन सोना दबा पड़ा है। 18 अक्टूबर को इसे निकालने ...

  24. +

  25. और अधिक दिखाएं

  26. *
  27. प्रभात खबर

  28. 1000 टन सोने की खोज जारीः अब तक तो नहीं मिला पर ...

  29. दैनिक भास्कर-22-10-2013

  30. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के डौडिया खेड़ा में चल रही 1000 टन सोने की खुदाई की निगरानी से ...

  31. अगर मिल गया 1000 टन सोना तो....? - (A)

  32. नवभारत टाइम्स-19-10-2013

  33. -किले में एक महीने तक खुदाई जारी रह सकती है और पुरातत्व अपने पेशेवर तरीके से खुदाई के काम को अंजाम देगा।

  34. 1000 टन सोना के लिए खुदाई आज

  35. Pressnote.in-17-10-2013

  36. लखनऊ देवी-देवता के स्वप्न देने और सुबह का सपना सच होने जैसी धारणा पर सदियों से बहस चल रही है. अब तक सरकार ...

  37. *
  38. 1000 टन सोने की तलाश,आज से खुदाई शुरू

  39. मेरी खबर.कोम-17-10-2013साझा करें

  40. यहां के एक साधु शोभन सरकार ने कहा है कि उन्हें सपने में बताया गया है कि इस किले में 1000 टन सोना गड़ा हुआ ...

  1. 1000 टन सोना क्या लोहा भी नहीं मिलेगा! - 1000 tons of ...

  2. navbharattimes.indiatimes.comलखनऊ

  3. 19-10-2013 - 1000 tons of iron will not get the gold! गंगा किनारे एक टीले रूपी किले में हजारटन सोना होने के साधु के सपने के बाद से ...

  4. '1000 टन सोने के सपने' से किले में 'दिवाली' - 1000 ...

  5. navbharattimes.indiatimes.comराज्यउत्तर प्रदेश

  6. 20-10-2013 - 1000 'dreams of tonnes of' fortress 'Diwali' -सोने के लिए खुदाई शुरू होने के बाद खंडहरनुमा किले में आई रौनक -जांच में ...

  7. 1000 टन सोने की खोजः किसने क्या कहा... - उत्तर ...

  8. navbharattimes.indiatimes.com/photomazza/national.../24388569.cms

  9. 19-10-2013 - उत्तर प्रदेश के डौंडियाखेड़ा गांव में चल रही है 1000 टन सोने की खोज। सोना मिले या न मिले, लेकिन खुदाई ...

  10. 1000 टन सोना के लिए समाचार

  11. आज तक

  12. किले में दबे '1000 टन सोने' के लिए खुदाई शुरू - IBN7

  13. khabar.ibnlive.in.com/news/110123/1

  14. 18-10-2013

  15. IBN Khabar: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सटे उन्नाव जिले के डौंडिया खेड़ा गांव में एक हजार टन सोना होने ...

  16. किस देश के पास कितना है सोना, 1000 टन सोने का मतलब ...

  17. abpnews.newsbullet.in/ind/34-more/57276--1000-

  18. 18-10-2013 - नई दिल्ली. मान लीजिए एक हजार टन सोना निकल गया. एक हजार टन सोने का मतलब करीब तीन लाख करोड़ रुपये.

  19. 1000 टन सोना मिलने के दावे में दम नहीं: ASI निदेशक

  20. abpnews.newsbullet.in/ind/34-more/57328--1000-

  21. 19-10-2013 - उन्नाव के डौड़िया खेड़ा किले में खजाने की खोज के लिए खुदाई का काम आज भी चल रहा है. पुरातत्व विभाग की ...

  22. खुदाई के साथ ही आ गए 1000 टन सोने के पांच ... - Inext Live

  23. inextlive.jagran.com/unnao-gold-hunt-and-five-claimant-for-1000-tonne...

  24. 18-10-2013 - उन्‍नाव में 1000 टन सोने के लिए एएसआई ने खुदाई शुरू कर दी. सोना मिलेगा या नहीं इसको लेकर कोई भी पक्‍के तौर ...

  25. 1000 टन सोना की चित्र

  26. - छवियों की रिपोर्ट करें

  27. साधु ने बताया 1000 टन सोने का राज... - Webdunia

  28. hindi.webdunia.comखबर-संसारसमाचारप्रादेशिक

  29. उन्नाव। अब तक आपने कहानियों में सुना होगा कि राजा-महाराजा अपना खजाना जमीन में गाड़ देते थे, लेकिन ...

  30. साधु के सपने का सोना | दुनिया | DW.DE | 18.10.2013

  31. www.dw.de/साधु-के-सपने-का-सोना/a-17168583

  32. 18-10-2013 - शोभन के सपने के मुताबिक 19वीं शताब्दी के इस किले के नीचे 1000 टन सोना दबा है. इसे खोजने के लिए भारतीय ...

  33. सोना खरीदने की हड़बड़ी में भूल न जाएं ये पांच बातें

  34. www.amarujala.comलाइफस्टाइलफैशनफैशन टिप्स

  35. शादियों और निवेश के मद्देनजर सोने के गहनें खरीदने का इससे सही समय भला क्या होगा। अगर आपसोने के गहने खरीदने का मन बना चुके हैं तो इन पांच बातों पर जरूर ध्यान दें, जिससे सोने का दाम गिरने के बावजूद भी आप खुद को ठगा हुए न महसूस करें।

  36. सोना - विकिपीडिया

  37. hi.wikipedia.org/wiki/सोना

  38. सोना या स्वर्ण (Gold) अत्यंत चमकदार मूल्यवान धातु है। यह आवर्त सारणी के प्रथम अंतर्ववर्ती समूह (transition group) में ताम्र तथा रजत के साथ स्थित है। इसका केवल एक स्थिर समस्थानिक (isotope, द्रव्यमान 197) प्राप्त है। कृत्रिम साधनों द्वारा प्राप्त ...

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  45. दीवाली खरीदारी के चलते सोना-चांदी में फिर उछाल. Last Updated: Saturday, October 26, 2013, 18:35. विदेशों में मजबूत रुख के बीच दीपावली त्यौहार के मद्देनजर स्टाकिस्टों और आभूषण निर्माताओं की भारी लिवाली के चलते दिल्ली सर्राफा बाजार में ...

  46. डौंडियाखेड़ा में सोना नहीं, लेकिन जारी रहेगी ...

  47. navbharattimes.indiatimes.comराज्यउत्तर प्रदेश

  48. 4 घंटे पहले - No hidden treasure in Unnao, but excavation will not stop एएसआई ने डौंडियाखेड़ा में सोना न होने की बात स्वीकारी, लेकिन कहा कि ऐतिहासिक महत्व की चीजों के लिए जारी रहेगी खुदाई...

  49. सोना - अन्य हिन्दी ख़बरें

  50. khabar.ndtv.comविषय

  51. सोना homepage on NDTVKhabar.com Find Hindi News articles about सोना. सोना News, Photos, Video & More न्यूज़, ताज़ा ख़बर on NDTV India, NDTVKhabar.com.

  52. अभी जो खरीदा सोना तो पड़ सकता है रोना - आज तक

  53. aajtak.intoday.inख़बरेंकारोबार

  54. अगर आप सोना खरीदने जा रहे हैं तो अभी रुक जाइये क्‍योंकि सोने की कीमतों में आ सकती है बड़ी गिरावट. उन्‍नाव के डौंडिया खेड़ा गांव में होने वाली खुदाई में अगर सचमुच का सोना मिल गया तो एक या दो नहीं बल्कि प्रति 10 ग्राम सोने की कीमतों में ...

  55. जितना चाहिए, उतना सोना पैदा कर देंगे... - आज तक - India ...

  56. aajtak.intoday.inख़बरेंदेश

  57. बदहाल अर्थव्यवस्था और रुपये की घटती कीमत से जूझ रही भारत सरकार सिर्फ ये बताए कि आर्थिक हालात सुधारने के लिए, पाउंड के मुकाबले रुपये को मजबूत करने के लिए उसे कितना सोना चाहिए. कानपुर के शोभन सरकार उतना सोना पैदा कर देंगे.

  58. डौंडिया खेड़ा में नहीं मिला सोना, बंद होगी खुदाई

  59. hindi.yahoo.com/asi-not-continue-daundia-kheda-gold-hunt-073217058...

  60. 12 घंटे पहले - Read 'डौंडिया खेड़ा में नहीं मिला सोना, बंद होगी खुदाई' on Yahoo. उन्नाव के डौंडिया खेड़ा में एक हजार टन सोना मिलने का सपना अब सपना ही बना रह जाएगा। अभी तक की खुदाई मेंसोने का नामो-निशान भी नहीं मिलने से निराश भारतीय ...

  61. सोना निकालकर दिखाऊंगा : शोभन - Desh - LiveHindustan.com

  62. www.livehindustan.com/.../article1-Unnao-treasure-hunt:-Seers-disciple-...

  63. 18-10-2013 - बक्सर के डौंडियाखेड़ा गांव में राजा राव रामबख्श सिंह के किला परिसर में दबे खजाने को लेकर देश में मचे कौतूहल का पटाक्षेप करते हुए संतश्री शोभन सरकार ने एक और भविष्यवाणी कर हर किसी को सकते में डाल दिया।


ओएनजीसी को पीछे छोड़

रिलायंस इंडस्ट्रीज बनी़

शीर्ष ऊर्जा कंपनी

रिलायंस इंडस्ट्रीज सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) को पछाड़कर वैश्विक ऊर्जा कंपनियों की सूची में शीर्ष भारतीय कंपनी बन गई है। प्लैट शीर्ष 250 वैश्विक ऊर्जा कंपनियों की रैकिंग-2013 में अरबपति मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपनी स्थिति आठ स्थान सुधारते हुए 19वां स्थान हासिल किया है।

ओएनजीसी 22वें स्थान पर कायम है। 2012 में भी वह इसी स्थान पर थी। पिछले साल रिलायंस इंडस्ट्रीज 27वें स्थान पर थी। इस साल सूची में शीर्ष पर एक्सॉन मोबिल कार्प है, जबकि शेवरान कार्प दूसरे स्थान पर है। इन अमेरिकी कंपनियों के बाद रायल डच शेल तथा रूस की गैज्प्राम, नार्वे की स्टैट आयल, फ्रांस की टोटल और रूस की लुकआयल का स्थान है। चीन की कंपनी पेट्रोचाइना 8वें तथा ब्रिटेन की बीपी पीएलसी 11वें स्थान पर हैं।


डीजल 5 रुपये, गैस 250 रुपये होगी महंगी!

Published on Oct 29, 2013 at 11:27 | Updated Oct 29, 2013 at 13:30

नई दिल्ली। जल्द ही आपको डीजल और रसोई गैस के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक पेट्रोलियम प्रोडक्ट का प्राइसिंग फॉर्म्यूला तय करने के लिए बनाई गई किरीट पारिख कमेटी डीजल में एकमुश्त 5 रुपये और एलपीजी के दाम में 250 रुपये की एकमुश्त बढ़ोतरी की सिफारिश की है। साथ ही वो चाहते हैं कि सब्सिडी वाले सिलिंडर 9 के बजाए 6 कर दिए जाएं।

साथ ही पारिख कमिटी डीजल प्राइसिंग के मौजूदा फॉर्मूले में कोई बदलाव के पक्ष में नहीं हैं। वहीं केरोसिन की कीमत में भी एकमुश्त 4 रुपये प्रति लीटर की बढ़त का सुझाव है। पेट्रोलियम मंत्री को ये रिपोर्ट 30 अक्टूबर को सौंपी जाएगी।

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सुप्रीम कोर्ट: कोलगेट में पीएम नहीं होगें पार्टी

मंगलवार, 29 अक्तूबर, 2013 को 23:33 IST तक के समाचार

तत्कालीन कोयला सचिव पीसी पारेख ने प्रधानमंत्री को जाँच में शामिल नहीं किए जाने पर सवाल उठाए थे

सुप्रीम कोर्ट ने कोयला क्लिक करेंघोटाला मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नाम जाँच एजेंसी सीबीआई की प्रथम जाँच रिपोर्ट में शामिल किए जाने की याचिका खारिज कर दी है.

याचिका में अदालत से अपील की थी कि वो प्रधानमंत्री को आदेश दे कि वो कोयला खान आवंटन मामले में हलफ़नामा दाखिल करे, लेकिन अदालत ने इस मांग को भी ठुकरा दिया.

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समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार अदालत ने कहा, "जाँच अभी भी चल रही है और सीबीआई अधिकारी छानबीन कर रहे हैं."

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की उस अपील को स्वीकारा जिसमें सीबीआई ने जाँच टीम में एक और अफ़सर को शामिल करने की बात की थी.

कोयला आवंटन में कथित क्लिक करेंघोटाले की जाँच कर रही सीबीआई की टीम में 39 सदस्य शामिल हैं.

मामला

पूर्व में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से कहा था कि जाँचकर्ताओं की टीम में कोई बदलाव नहीं किया जाए, इसलिए सीबीआई को ये अपील दाखिल करनी पड़ी थी.

गौरतलब है कि कोल ब्लॉक आवंटन मामले में सीबीआई ने हिंदुस्तान के प्रमुख उद्योगपति कुमार मंगलम क्लिक करेंबिरला और उनकी दो कंपनियों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है.

सीबीआई ने तत्कालीन कोयला सचिव पीसी पारेख के ख़िलाफ़ भी नया मामला दर्ज किया है.

भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ कोयला घोटाला एक लाख 86 हज़ार करोड़ रुपए का अनुमानित घोटाला है.

इन कंपिनयों को कोयला की खाने बिना कोई बोली लगाए दी गई थीं.

विश्लेषकों का कहना था कि अगर इन कोयला खानों की नीलामी की गई होती तो सरकार को इतना घाटा नहीं उठाना पड़ा होता.

कैग की रिपोर्ट के मुताबिक एसार पावर, हिंडाल्को, टाटा स्टील, टाटा पावर, जिंदल स्टील एंड पावर सहित 25 कंपनियों को विभिन्न राज्यों में कोयले की खानें दी गईं.

कैग की यह रिपोर्ट संसद में पेश की गई थी.

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http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/10/131029_supreme_court_vk.shtml


डौंडियाखेड़ा में नहीं मिला 1000 टन सोने का खजाना, ASI ने रोकी खुदाई

Tag:  पुरातत्व विभाग,  डौंडियाखेड़ा,  सोना,  शोभन सरकार,  खजाना,  उन्नाव में खजाना, उत्तर प्रदेश, 1000 टन सोना,  राजा रा

Last Updated: Tuesday, October 29, 2013, 20:57  ज़ी मीडिया ब्यूरो

उन्नाव/नई दिल्ली : संत शोभन सरकार के सपने के आधार पर 1000 टन सोना ढूंढने के लिए उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के डौडियाखेड़ा गांव में भारतीय पुरात्तव विभाग (एएसआई) की ओर से शुरू की गई खुदाई को अब बंद कर दी गई है। खबर है कि संत का सपना झूठ साबित हुआ और वहां खुदाई में सोने का खजाना नहीं मिला। एएसआई के अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि खुदाई में राजा राव रामबक्श सिंह के किले में खजाने होने के कोई सबूत नहीं मिले हैं। हालांकि, खुदाई में बौद्ध काल के समय के कुछ बर्तन मिले हैं। गौरतलब है कि साधु शोभन सरकार ने सपने में देखा था कि किले में 1000 टन सोना दबा पड़ा है। इसके बाद सरकार ने 18 अक्टूबर को 19वीं सदी के इस किले में खुदाई शुरू कर दी थी।


बुद्धजीवी वर्ग सपने को अंधविश्वास मानकर भले ही नकार रहा हो लेकिन बुंदेलखंड के बुजुर्ग इससे इत्तेफाक नहीं रखते। वह उन्नाव जिले के डौंडियाखेड़ा किले में सोने के खजाने का सपना सच मान रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि बांदा जिले के गौर-शिवपुर गांव में एक मुस्लिम परिवार को जमीन में खजाना होने का सपना "जिन्नात" ने दिया था और वह मिला भी, लेकिन उस खजाने की रखवाली जिन्नात सांप बनकर अब भी कर रहा है।


उन्नाव जिले के डौंडियाखेड़ा किले में सपने को सच मानकर कथित सोने के खजाने की खोज के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) पिछले 18 अक्टूबर से खुदाई करवा रहा है। बुद्धजीवी वर्ग सपने को सिर्फ सपना मानता है, लेकिन बुंदेलखंड के बुजुर्ग इन सपनों को सच मानते हैं। जब संवाददाता ने बुजुर्गों से इस बारे में जानना चाहा तो बड़े रोचक तथ्य उभर कर सामने आए। इस संवाददाता ने बांदा जिले के गौर-शिवपुरा गांव का दौरा किया, जहां जिन्नात द्वारा करीब 35 साल पहले एक मुस्लिम परिवार को सोने के खजाने की बात सपने में बताई थी।


यहां चुपचाप खुदाई हुई और सोने-चांदी के ढेर सारे सिक्के मिले हैं। परन्तु अब तक यह कुनबा एक भी सिक्का खर्च नहीं कर सका है। बताया जा रहा है कि जब भी इस्तेमाल करने की सोची तो काला नाग बनकर हिफाजत करने वाला जिन्नात गृहस्वामी को डस लेता है, अब तक वह उसे 48 बार डस चुका है। इस परिवार के मुखिया ने नाम का खुलासा न करने की शर्त बताया कि करीब 35 साल पहले उसकी दादी को एक जिन्नात ने सपने में बताया कि केन नदी के किनारे खंडहरनुमा जानवर बाड़े में खजाना गड़ा है। खुदाई की गई तो वहां करीब दो किलोग्राम सोने और 20 किलोग्राम चांदी के सिक्के मिले थे, जो अब भी उनके पास मौजूद हैं।


इस व्यक्ति ने बताया कि इस धन की हर साल पूजा-अर्चना तो कर रहे हैं, लेकिन जब भी उसे खर्च करने के बारे में सोचा जाता है, काला नाग डस लेता है। उसने बताया कि अब तक यह काला नाग उसे 48 बार डस चुका है। इसी गांव के साकिर ने बताया कि जमीन में गड़े धन की जानकारी यहां हर किसी को है, लेकिन जब खर्च नहीं कर सकते तो वह मिट्टी के बराबर है। उन्नाव जिले के डौंडियाखेड़ा किले में सोने के खजाने से संबंधित सपने को भी यहां के बुजुर्ग सच मान रहे हैं। बुजुर्गों को उम्मीद है कि संत शोभन सरकार का सपना सच होगा और वहां सोने का खजाना जरूर मिलेगा।


इतिहास में यहां का खजाना अंग्रेजों से बचाने के लिए छिपाने के तथ्य हैं। राजा के अभियोग से संबंधी पत्रावली में उनके घर के नक्शे में नारंगी के वृक्ष के नीचे कोष होने की बात दर्शायी गई है। पत्रावली के अनुसार राजा साहब के पूर्वज बसंत सिंह की यह बारादरी थी। अंग्रेजी जनरल होम ग्रांट द्वारा 10 मई,1857 को डौडिया खेड़ा दुर्ग ध्वस्त करने के बाद रामबक्स सिंह इसी घर में रहते थे। इसके बाद राजा साहब अपनी ससुराल काला काकड़, फिर बनारस चले गए। यहां के नगवा ग्राम में किराए पर रह रहे राजा को जब गिरफ्तार किया गया तो उनके पास बनारस के कोषागार के अभिलेखों के अनुसार चार हजार स्वर्ण मुद्राएं थीं।


संसद के शीतकालीन सत्र में आ सकता है DTC बिल: चिदंबरम

नई दिल्ली : प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) विधेयक संसद के शीतकालीन सत्र में आ सकता है। वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने आज यहां संवाददाताओं से कहा कि हम डीटीसी को संसद के अगले सत्र में लाने का प्रयास कर रहे हैं। यह दशकों पुराने आयकर कानून का स्थान लेगा। संसद का शीतकालीन सत्र पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद दिसंबर के शुरू में बुलाया जा सकता है।


डीटीसी विधेयक के अंतिम मसौदे में आयकर छूट की सीमा को 2 लाख रपये पर अपरिवर्तित रखा गया है। इसमें चौथा स्लैब लागू करने का प्रस्ताव है। इसके तहत 10 करोड़ रपये से अधिक की सालाना आमदनी पर 35 फीसदी की दर से कर लगाने का प्रस्ताव है। विधेयक के अंतिम मसौदे की मंत्रिमंडल जांच करेगा।


अन्य बातों के अलावा इस विधेयक में एक करोड़ रपये से अधिक की लाभांश आय पर 10 फीसद की दर से कर लगाने का प्रस्ताव है। सूत्रों ने कहा कि न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) कंपनी की सकल परिसंपत्ति की बजाय खाता-लाभ पर लगाने का प्रावधान होगा। इसके अलावा प्रतिभूति लेनदेन कर (एसएसटी) कायम रखा जा सकता है। हालांकि वित्त पर स्थायी समिति ने इसे समाप्त करने की सिफारिश की है।


फिलहाल 2-5 लाख रुपये की आय पर 10 प्रतिशत की दर से आयकर लगता है। 5 से 10 लाख रपये की आय पर 20 प्रतिशत और 10 लाख रपये से अधिक की आय पर 30 प्रतिशत कर लगता है। वहीं एक करोड़ रपये से अधिक सालाना कमाने वालों को 10 प्रतिशत का अधिभार देना पड़ता है।

आंख मूंदकर महंगाई से मुकाबला नहीं करेगा RBI: रघुराम राजन

मुंबई : रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने आज कहा कि कंद्रीय बैंक आंख मूंदकर महंगाई से मुकाबला नहीं करेगा। मुद्रास्फीति के पीछे पड़ने के लिए राजन की आलोचना हो रही है। उन्होंने कहा कि कोई भी 'उचित केंद्रीय बैंक' वृद्धि की चिंता छोड़कर सिर्फ महंगाई के पीछे नहीं पड़ेगा।


मौद्रिक नीति की समीक्षा के बाद परंपरागत संवाददाता सम्मेलन में राजन ने कहा, मैं यह नहीं कहना चाहता कि केंद्रीय बैंक महंगाई के पीछे पागलपन की तरह पड़ा है। उन्होंने कहा कि घरेलू चिंता की वजह से वह सिर्फ महंगाई पर ध्यान कंेद्रित नहीं कर सकते। वृद्धि की भी चिंता है। राजन ने कहा कि किसी भी केंद्रीय बैंक के लिए महंगाई को उचित स्तर पर लाने के अलावा वृद्धि को भी देखना होता है। वृद्धि आने से महंगाई की ताकत को कम किया जा सकता है।


गत 4 सितंबर को रिजर्व बैंक के गवर्नर का पद संभालने के बाद से राजन दो बार रेपो दर में चौथाई-चौथाई फीसद की वृद्धि कर चुके हैं। इससे रेपो दर बढ़कर 7.75 प्रतिशत हो गई है। हालांकि राजन ने स्पष्ट किया कि तत्काल केंद्रीय बैंक की निगाह महंगाई पर अंकुश की है, क्योंकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति बढ़ रही है।


महंगाई के लक्ष्य के बारे में पूछे जाने पर राजन ने कहा, रिजर्व बैंक समय-समय पर कह चुका है कि वह महंगाई को लेकर चिंतित है। लेकिन मैं मुद्रास्फीति लक्ष्य नहीं कहना चाहता क्योंकि एक बार यह बोलने पर लोगों का ध्यान सिर्फ महंगाई पर चला जाता है। रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि वह वृद्धि की चिंताओं को जानते हैं। उन्होंने कहा कि यदि वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति खराब होती है तो 5 प्रतिशत की वृद्धि दर के अनुमान के नीचे जाने का जोखिम है।


महंगाई के खिलाफ रिजर्व बैंक के संघर्ष के बारे में रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि हालांकि परंपरागत रूप से केंद्रीय बैंक डब्ल्यूपीआई को संकेतक के रूप में देखता है, लेकिन हम सीपीआई को भी नजरअंदाज नहीं कर सकते। यह लंबे समय से तेजी से बढ़ रही है। थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति सितंबर में बढ़कर सात माह के उच्च स्तर 6.46 प्रतिशत पर पहुंच गई। वहीं उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 9.84 प्रतिशत पर पर है।

इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को

रिलीफ देने का प्लान

ईटी | Oct 29, 2013, 10.56AM IST

दीपशिखा सिकरवार

नई दिल्ली।। फाइनेंस मिनिस्ट्री इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को रिलीफ देने का प्लान बना रही है। वह इसके लिए बैड एसेट्स की पहचान का पूरा तरीका बदल सकती है। इससे बैंक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को बचाने के लिए आगे आएंगे और इस सेक्टर में इनवेस्टमेंट भी बढ़ेगा।


फाइनेंस मिनिस्ट्री इस स्कीम को आरबीआई से बातचीत के बाद अगले 2-3 महीने में पेश कर सकती है। इसका मकसद उन एसेट्स को बचाना है, जो लोन चुका सकते हैं। मिनिस्ट्री का मानना है कि सिर्फ प्रोजेक्ट में देरी के चलते उसे बैड एसेट नहीं माना जाना चाहिए। फाइनेंस मिनिस्ट्री के सीनियर ऑफिशियल ने कहा, 'हमारा मानना है कि इसे नॉन-परफॉर्मिंग एसेट नहीं माना जाना चाहिए।' उन्होंने यह बात मानी कि सरकार मुश्किलों में फंसे सेक्टर्स को राहत देने के लिए रूल्स बदलने के बारे में सोच रही है। सरकार की नजर खासतौर पर इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर है।


रीस्ट्रक्चर्ड लोन (जिन्हें स्टैंडर्ड लोन माना जाता है) के साथ ग्रॉस एनपीए मार्च महीने के आखिर तक कुल लोन का 17.43 फीसदी हो गया था। यह 2009 में 4.66 फीसदी था। इससे बैंकों की बैलेंस शीट पर प्रेशर बढ़ रहा है। इस बारे में फीडबैक इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन विनायक चटर्जी ने कहा, 'इस तरह के लोन बैंकिंग सेक्टर के लिए गंभीर मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। पॉलिसी पैरालिसिस के चलते जो लोन बैड एसेट्स में बदले हैं, उनके लिए न ही प्रमोटर जिम्मेदार हैं और ना ही बैंक।' पिछले कुछ साल से क्लीयरेंस में देरी के चलते इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स रुके हुए हैं। सरकार को इन पर काम तेज करने के लिए खास उपाय करने पड़े हैं। वह इकनॉमिक ग्रोथ तेज करने के लिए इनके जरिए इनवेस्टमेंट बढ़ाना चाहती है। लोकसभा चुनाव से पहले इकनॉमिक ग्रोथ तेज होने पर उसे चुनावी फायदा हो सकता है।

फाइनेंस मिनिस्ट्री यह प्रपोजल रख सकती है कि अगर किसी मजबूत प्रोजेक्ट में देरी हो रही है, तो उसे दिए गए लोन की रीस्ट्रक्चरिंग का प्रोविजन होना चाहिए, इसमें इंटरेस्ट और प्रिंसिपल अमाउंट के पेमेंट से कुछ समय तक छूट मिलनी चाहिए और इसका बोझ न ही कंपनी और ना ही बैंक पर डाला जाना चाहिए। बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में अक्सर इस तरह का प्रावधान होता है।

बढ़ गई आपकी EMI

रिजर्व बैंक ने बढ़ाया रीपो रेट

इकनॉमिक टाइम्स | Oct 29, 2013, 11.12AM IST


मुंबई।। महंगाई को कंट्रोल करने के अपने सख्त उपायों के तहत रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने कयास के मुताबिक रीपो रेट में इजाफा कर दिया है। आरबीआई ने 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी रीपो रेट में की है। जाहिर है कि इसका सीधा असर लोन चुकाने और लेने वालों पर भी पड़ेगा। आपकी ईएमआई में भी इस परसेंटेज के मुताबिक इजाफा होगा।


रिजर्व बैंक के इस कदम से आने वाले समय में कारोबार और व्यक्तिगत उपभोक्ता के लिए बैंकों से कर्ज लेना और महंगा हो सकता है। रिजर्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन ने मंगलवार को दूसरी तिमाही की मौद्रिक नीति समीक्षा जारी करते हुए प्रमुख नीतिगत दर रीपो को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 7.75 प्रतिशत कर दिया। रीपो वह दर है जिस पर रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को एकाध दिन के लिए नकद राशि उधार देता है। वाणिज्यिक बैंक नकदी की तात्कालिक जरूरत के लिए केंद्रीय बैंकों से हर रोज करीब एक लाख करोड़ रुपए की नकदी उधार लेते हैं।


लेकिन दूसरी तरफ बैंकों की बढ़ी हुई अतिरिक्त नकदी की सुविधा के लिए रिजर्व बैंक से धन लेने का सस्ता करते हुए सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ) दर को 0.25 प्रतिशत घटाकर 8.75 प्रतिशत कर दिया। राजन की यह पहली पूर्ण मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक थी। उन्होंने 4 सितंबर को कार्यभार ग्रहण किया था और 20 सितंबर को पहली मध्य तिमाही समीक्षा में रीपो दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि कर बाजार को चौंका दिया था।

राजन ने कहा, 'इन उपायों से जहां एक तरफ वृहद आथिर्क और वित्तीय स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा वहीं इससे आर्थिक वृद्धि की मजबूती के लिए बेहतर परिवेश बनेगा। रिजर्व बैंक आर्थिक वृद्धि को ध्यान में रखते हुए मुद्रास्फीतिकारी जोखिम की भी नजदीकी से निगरानी रखेगा।'


केन्द्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपनी आर्थिक वृद्धि के अनुमान को भी 5.5 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है। पिछले वित्तीय वर्ष में भी आर्थिक वृद्धि एक दशक के निचले स्तर 5 प्रतिशत तक गिर गई थी। रिजर्व बैंक ने रीपो दर और एमएसएफ के अलावा अन्य दरों को पूर्ववत रखा है।


बैंकों के लिए रिजर्व बैंक के पार रखनी जाने वाली आरक्षित नकदी का का अनुपात (सीआरआर) उनके पास जमा राशि के 4 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया जबकि सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश किए जाने वाले सांविधिक तरलता अनुपात (एसएलआर) को भी 23 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। सीआरआर के तहत रिवर्ज बैंक के पास पड़ी जमा पर बैंकों को कोई ब्याज नहीं मिलता।


बहरहाल, रिजर्व बैंक गवर्नर ने बैंकिंग तंत्र में नकदी बढ़ाने के लिए बैंकों को उनकी सात और 14 दिन की रीपो व्यवस्था के तहत उनकी नकदी की स्थिति यानी नेट डिमांड ऐंड टाइम लायबलिटी (एनडीटीएल) के समक्ष उधार सीमा को दोगुना कर 0.5 प्रतिशत कर दिया। यह व्यवस्था तुरंत प्रभाव से लागू होगी।


रीपो दर बढ़ने और एमएसएफ दर कम करने से रिजर्व बैंक ने मुख्य दर रीपो के साथ एमएसएफ के अंतर को फिर से एक प्रतिशत पर ला दिया है। 20 सितंबर की मध्य तिमाही समीक्षा में रिजर्व बैंक ने इसका जिक्र किया था।


रिजर्व बैंक ने कहा था उसकी मुख्य नीतिगत दर रीपो दर ही होगी। रीपो दर से एक प्रतिशत नीचे रहेगी रिवर्स रीपो और इससे एक प्रतिशत ऊपर रहेगी एमएसएफ की दर। पिछले दिनों डॉलर के मुकाबले रुपए में भारी गिरावट आने पर रिजर्व बैंक ने एमएसएफ दर को दो प्रतिशत बढ़ाकर 10.25 प्रतिशत कर दिया था। रीपो के मुकाबले इसमें तीन प्रतिशत का फासला हो गया था, लेकिन अब यह कम होकर वापस एक प्रतिशत के फासले पर आ गई है।


रिजर्व बैंक के तुरंत प्रभाव से किए गए ताजा बदलाव के बाद रीपो दर 0.25 प्रतिशत बढ़कर 7.75 प्रतिशत, रिवर्स रीपो दर तदनुसार 6.75 प्रतिशत होगी जबकि एमएसएफ 0.25 प्रतिशत घटकर 8.75 प्रतिशत पर आ गई है। इसके साथ ही बैंक दर भी 8.75 प्रतिशत हो गई है।


मूल्य सूचकांक के मोर्चे पर खुदरा मुद्रास्फीति को सबसे बड़ा खतरा बताते हुए रिजर्व बैंक ने कहा है कि यह 9 प्रतिशत से ऊपर बनी रहेगी। थोक मुद्रास्फीति मामले में बैंक ने कहा है कि रुपए की विनिमय दर में आई गिरावट और ईंधन के दाम में वृद्धि से इसमें वर्ष की शेष तिमाहियों में वृद्धि होगी।


बैंक ने ऊंची मुद्रास्फीति को लेकर चिंता जताई है। थोक मुद्रास्फीति बैंक के लिहाज से सामान्य स्तर से ऊपर बनी हुई है जबकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित उच्च मुद्रास्फीति भी चिंता का विषय है। समीक्षा में कहा गया है- 'अच्छे मॉनसून का खाद्य मुद्रास्फीति पर अनुकूल असर होगा लेकिन पहले से ही ऊंची खाद्य और ईंधन मुद्रास्फीति पर पड़ने वाले एक और दौर का असर दूसरी उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं पर भी पड़ेगा।'

देश के शहरों

और कस्बों में

बेरोजगारी दर घटी


एक सरकारी अध्ययन के मुताबिक 2009-2010 के दौरान आगरा, लुधियाना और मेरठ में बेरोजगारी दर तेजी से बढ़ी है, हालांकि देश के कस्बों और शहरों में कुल मिलाकर इसमें कमी आई है।


भारत के कस्बों और शहरों में रोजगार और बेरोजगारी की स्थिति पर राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (एनएसएसओ) ने खुलासा किया है कि आगरा में बेरोजगारी दर 2004-05 के 0.2 पर्सेंट से बढ़कर 2009-10 में 5.5 पर्सेंट पर पहुंच गई।


लुधियाना में बेरोजगारी दर 2004-05 के 1.2 पर्सेंट से बढ़कर 2009-10 में 6.3 पर्सेंट पर पहुंच गई, जबकि मेरठ में यह 2.1 पर्सेंट से बढ़कर 3.9 पर्सेंट हो गई। अधिकतम बेरोजगारी का औसत पटना और कानपुर में देखने को मिला जहां यह दर 2009-10 में क्रमश: 13.2 पर्सेंट और 7.7 पर्सेंट रही।


2009-10 में बेरोजगारी की सर्वाधिक कम दर भोपाल में 0.1 पर्सेंट की दर्ज की गई, जिसके बाद सूरत में सर्वाधिक कम दर 0.6 पर्सेंट और इंदौर में 0.8 पर्सेंट दर्ज की गई।


नगरों और शहरों में रोजगार की स्थिति में सुधार को दिखाते इस सर्वे में खुलासा किया गया है कि पांच साल की अवधि के दौरान देश के शहरों और कस्बों में कुल मिलाकर बेरोजगारी दर 3.8 पर्सेंट से घटकर 2.8 पर्सेंट रह गई।


यह सर्वे एनएसएस के 66वें दौर में जुलाई 2009 से जून 2010 के दौरान रोजगार और बेरोजगारी पर किए गए आठवें पंचवर्षीय सर्वेक्षण में किया गया। सर्वे में 7,402 गांवों और 5,252 शहरी क्षेत्रों को कवर किया गया। इसमें करीब 1,00,957 घरों में सर्वे हुआ। इसमें करीब 4,59,457 व्यक्तियों से बातचीत की गई जिसमें से 2,81,327 ग्रामीण क्षेत्र में और 1,78,457 शहरों से थे।


2009-10 में रोजगार प्राप्त पुरुषों का अनुपात पहली श्रेणी के शहरों में 73 पर्सेंट, दूसरी श्रेणी के शहरों में 74 पर्सेंट और तीसरी श्रेणी के शहरों में 76 पर्सेंट रहा। वहीं महिलाओं के मामले में यह अनुपात 17 पर्सेंट, 18 पर्सेंट और 21 पर्सेंट रहा।


सर्वे के अनुसार 2004-05 से 2009-10 के बीच रोजगार प्राप्त पुरुषों का अनुपात पहली श्रेणी के शहरों में 3 पर्सेंट, दूसरी तथा तीसरी श्रेणी के शहरों में प्रत्येक में दो पर्सेंट घट गया। दूसरी तरफ इसी दौरान महिलाओं के मामले में यह गिरावट क्रमश: तीन पर्सेंट, चार पर्सेंट और सात पर्सेंट रही। सर्वे में शहरों का वर्गीकरण 2001 की जनगणना के आधार पर किया गया है। पहली श्रेणी के शहरों में 10 अथवा इससे अधिक की आबादी वाले शहर हैं।


ईटी | Oct 28, 2013, 01.23PM IST

नई दिल्ली।। एक्सपर्ट्स और बुलियन ट्रेडर्स का कहना है कि फेस्टिवल सीजन में बढ़ी मांग और कमजोर सप्लाई के कारण गोल्ड का दाम इस साल धनतेरस के दिन 3 फीसदी बढ़कर 33,000 रुपए प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है।


ट्रेडर्स का कहना है कि कीमत में बढ़ोतरी के बावजूद 1 नवंबर को धनतेरस के दिन मांग पिछले साल जितनी बने रहने की संभावना है, लेकिन कॉइन और गोल्ड बार्स की बिक्री में 50 फीसदी की कमी आ सकती है।


भारत दुनिया में गोल्ड का सबसे बड़ा कंज्यूमर है। गोल्ड का सबसे ज्यादा इंपोर्ट भी भारत ही करता है। धनतेरस का दिन गोल्ड की खरीदारी के लिए शुभ माना जाता है। ट्रेड डाटा के अनुसार, फिलहाल गोल्ड का दाम दिल्ली में 32,570 रुपए प्रति 10 ग्राम और मुंबई में 31,700 रुपए प्रति 10 ग्राम है। 28 अगस्त को दिल्ली में सोना 34,500 रुपए के लेवल तक पहुंच गया था। यह इसकी अब तक की सबसे ज्यादा कीमत थी। ब्रोकरेज फर्म एसएमसी कॉमट्रेड के चेयरमैन और एमडी डी के अग्रवाल ने कहा, 'अभी गोल्ड बेयरिश फेज में है। हालांकि, सप्लाई कम होने की वजह से इसके दाम में कुछ बढ़ोतरी हो सकती है। धनतेरस के दिन दाम 300-1000 रुपए तक बढ़ सकता है।' उन्होंने कहा कि अगर फेस्टिवल के दिन डिमांड और सप्लाई के बीच अंतर बढ़ता है, तो गोल्ड पर प्रीमियम 1,500 से 2,000 रुपए के मौजूदा लेवल से भी ज्यादा हो सकता है।


हालांकि, पिछले साल के मुकाबले इस साल धनतेरस के दिन गोल्ड के घरेलू दाम में कम अंतर रहेगा। ट्रेड डाटा के अनुसार, 2012 में धनतेरस के दिन गोल्ड की कीमत 20 फीसदी बढ़कर 32,485 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई थी। वहीं, इससे एक साल पहले 2011 में गोल्ड 37 फीसदी उछलकर 27,130 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था। 2010 में धनतेरस के दिन गोल्ड की कीमत 19,740 रुपए थी।


सप्लाई कम होने से घरेलू बाजार में गोल्ड की बिक्री प्रीमियम पर हो रही है। सरकार के आयात शुल्क बढ़ाने और कई तरह की पाबंदी लगाने से गोल्ड की सप्लाई पर दबाव बढ़ा है। ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वैलरी ट्रेड फेडरेशन के चेयरमैन हर्ष सोनी ने बताया, 'गोल्ड पर ज्यादा प्रीमियम का असर धनतेरस के दिन इसके दाम पर दिखाई देगा। सरकारी पाबंदियों के चलते पिछले तीन महीनों के दौरान गोल्ड इम्पोर्ट में कमी आई है।'


फेस्टिवल और वेडिंग सीजन की डिमांड पूरी करने के लिए ज्वैलरी मेकर्स पुराने गोल्ड पर निर्भर हैं। उन्होंने कंज्यूमर्स को लुभाने के लिए कई आकर्षक योजनाओं की भी तैयारी की है। सोनी ने कहा कि ज्वैलरी की डिमांड स्टेबल रह सकती है, लेकिन कॉइन और बार की बिक्री पिछले साल के मुकाबले 50 फीसदी तक घट सकती है। बॉम्बे बुलियन एसोसिएशन के फॉर्मर प्रेसिडेंट सुरेश हुंडिया ने बताया, 'सरकार ने बार और कॉइन के इम्पोर्ट पर पाबंदी लगा दी है। फेस्टिवल सीजन में इनकी डिमांड पूरी करने के लायक सप्लाई नहीं है।'


एफएमसीजी कंपनियों की फेस्टिव तैयारी

Published on Oct 29, 2013 at 11:29 | Updated Oct 29, 2013 at 11:31

नई दिल्ली। आर्थिक मंदी और मंहगाई की मार फेस्टिव सीजन पर साफ दिखाई दे रही है। हर सेक्टर अपने मुताबिक त्योहारों के लिए कमर कस रहा है। लेकिन एफएमसीजी सेक्टर की बात करें तो, आर्थिक मंदी का असर अच्छे मॉनसून ने काफी हद तक कम कर दिया है, जिसके चलते एफएमसीजी कंपनियों को 20-35 फीसदी ग्रोथ की उम्मीद है।

एफएमसीजी सेक्टर पर आर्थिक मंदी की मार सबसे आखिर में पडती है, क्योंकि खरीदार अपने जरूरी खर्चों में कटौती सबसे आखिर में करते हैं। ऐसे में अगर माहौल हो त्योहारों का तो ग्राहकों को त्योहारी सौगात देने में एफएमसीजी कंपनियां पीछे नहीं हैं। मंहगाई के चलते इस साल एफएमसीजी कंपनिया ग्राहकों को डिस्काउंट तो नहीं लेकिन नई रेंज की ऑफरिंग ले कर आई हैं।

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इन्फोसिस पर सबसे बड़ा जुर्माना?

वॉशिंगटन।। भारत की मशहूर सॉफ्टवेयर कंपनी इन्फोसिस के खिलाफ वीजा फ्रॉड के मामले में अमेरिका का जस्टिस डिपार्टमेंट बुधवार को फैसला सुनाएगा। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अपनी रिपोर्ट में अफसरों के हवाले से दावा किया है कि इन्फोसिस पर 35 मिलियन डॉलर (करीब 210 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया जा सकता है। अमेरिका में इस तरह के मामलों में यह सबसे बड़ा जुर्माना होगा।


इन्फोसिस पर आरोप है कि उसने अनगिनत कर्मचारियों को वर्क वीजा के बजाय आसानी से मिलने वाले विजिटर्स वीजा पर अमेरिका ले जाकर काम कराया। अमेरिका जस्टिस डिपार्टमेंट और होमलैंड सिक्यॉरिटी डिपार्टमेंट 2011 से इस मामले की जांच कर रहा है।


इन्फोसिस भी सेटलमेंट चाहती है। अक्टूबर की शुरुआत में कंपनी ने कहा था कि संभावित सेटलमेंट के लिए उसने 35 मिलियन डॉलर की रकम अलग निकालकर रखी हुई है। यह फैसला ऐसे समय आ रहा है, जब अमेरिका में देसी कंपनियों के बजाय विदेशी कंपनियों और कर्मचारियों से काम कराने के खिलाफ आवाजें बुलंद हो रही हैं। राष्ट्रपति ओबामा भी इसका विरोध करते रहे हैं।

देश में तेजी से पैर फैला सकेंगे विदेशी बैंक

Updated on: Tue, 29 Oct 2013 08:43 PM (IST)

में तेजी से पैर फैला सकेंगे विदेशी बैंक

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। आने वाले दिनों में देश में विदेशी बैंकों का तेजी से प्रसार हो सकता है। दरअसल, आरबीआइने भारत में पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी खोलने वाले विदेशी बैंकों को एक भारतीय बैंक की तरह रियायतें देने की घोषणा की है। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने यह स्पष्ट किया है कि विदेशी बैंकों को आवश्यक तौर पर पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी नहीं खोलनी पड़ेगी। उन्हें स्वैच्छिक तौर पर सब्सिडियरी खोलने के लिए कहा गया है।

वार्षिक मौद्रिक नीति की समीक्षा करते हुए गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि अगस्त, 2010 से पहले से भारत में स्थापित विदेशी बैंकों को उक्त सब्सिडियरी खोलने पर राष्ट्रीयकृत बैंकों के समान सुविधाएं मिलेंगी। यानी नई शाखा खोलने को लेकर तमाम तरह की मंजूरियां लेने की जरूरत नहीं होगी। विदेशी बैंक उक्त सब्सिडियरी को 500 करोड़ रुपये की इक्विटी पूंजी के साथ खोल सकते हैं। इस बारे में विस्तृत नीति की घोषणा अगले 15 दिनों के भीतर होगी।

पिछले महीने अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष की वाशिंगटन में हुई बैठक में वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने विदेशी बैंकों को भारत में ज्यादा सहूलियत देने का एलान कर दिया था। इसका प्रमुख विपक्षी दर भाजपा ने काफी विरोध किया था। लेकिन आज केंद्रीय बैंक ने सरकार के एलान को एक तरह से अमल में ला दिया।

देश में नए बैंकिंग लाइसेंस देने के मुद्दे पर राजन ने कहा है कि इस पर गठित समिति की पहली बैठक दो दिन बाद यानी एक नवंबर को होगी। पूर्व आरबीआइ गवर्नर बिमल जालान की अध्यक्षता में गठित यह समिति निजी क्षेत्र की तरफ से आए आवेदनों की जांच पड़ताल करेगी। केंद्र सरकार जल्द से जल्द इस बारे में फैसला करने का दबाव रिजर्व बैंक पर बनाये हुए है। आरबीआइ गवर्नर पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि मार्च, 2014 से पहले नए बैंकिंग लाइसेंस दिए जाएंगे।

पीडीएस का नया नाम होगा इंदिराम्मा अन्न योजना

नई दिल्ली, प्रेट्र। कांग्रेसनीत संप्रग सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून लागू कराने का पूरा श्रेय लेने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली का नाम बदलकर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नाम पर 'इंदिराम्मा अन्न योजना' करने जा रही है। दरअसल, कांग्रेस चाहती है कि विपक्ष किसी भी तरह से इस योजना को लागू कराने का श्रेय नहीं लेने पाए। उम्मीद है कि बुधवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की बैठक में इस पर अंतिम फैसला ले लिया जाएगा।

खाद्य मंत्री केवी थॉमस ने बताया, 'ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश से चर्चा कर निर्धारित सार्वजनिक वितरण प्रणाली का नाम बदलकर इंदिराम्मा अन्न योजना करना तय कर लिया गया है।' जल्द ही इसे मंजूरी के लिए कैबिनेट को भेज दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिर्फ योजना का नाम बदला जा रहा है। कानून में किसी तरह का फेरबदल नहीं किया जाएगा। इसके अलावा योजना के प्रचार-प्रसार के लिए एक लोगो बनवाने पर भी विचार किया जा रहा है। थॉमस ने कहा, 'पांच किलो के पैकेटों में अनाज के वितरण से अन्न की बर्बादी पर अंकुश लग सकेगा। इसके लिए पंजाब, आंध्र प्रदेश सहित अन्य उत्पादक राज्यों से बातचीत की जा रही है।'

कांग्रेस का मानना है कि योजना को इंदिरा गांधी के नाम से जोड़ने पर लोकसभा चुनाव में पार्टी की गरीबोन्मुखी छवि को फायदा मिलेगा। कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी की महत्वाकांक्षी खाद्य गारंटी योजना को इंदिरा गांधी के 'गरीबी हटाओ' अभियान का अगला चरण माना जा रहा है। पिछले महीने ही संसद ने देश की 67 फीसद आबादी को छूट पर अनाज मुहैया कराने वाले कानून को पारित किया था। कांग्रेस शासित दिल्ली, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश ने पहले ही योजना को शुरू कर दिया है, जबकि अन्य राज्य इसकी तैयारी में जुटे हैं। बुधवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में कानून से जुड़े कुछ संशोधन प्रस्तावों पर मंजूरी की उम्मीद है। लेखक ए. सूर्यप्रकाश के अनुसार राष्ट्रीय पार्क, अस्पताल, शोध व वैज्ञानिक संस्थान, उत्सव, सड़कों, भवनों आदि को मिलाकर 450 से ज्यादा योजना-परियोजनाएं गांधी-नेहरू परिवार के नाम पर हैं।


मुकेश अंबानी लगातार छठे साल सबसे अमीर भारतीय

वॉशिंगटन।। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी देश में अमीरों की लिस्ट में लगातार छठे साल नंबर वन पर हैं। भारतीय अमीरों पर अमेरिकी बिजनेस मैगजीन फोर्ब्स की लिस्ट में मुकेश अंबानी की प्रॉपर्टी 21 अरब डॉलर (12.88 खरब रुपये) आंकी गई है। इस लिस्ट में दूसरे पायदान पर हैं स्टील किंग लक्ष्मी निवास मित्तल।


मित्तल एलएनएम नामक उद्योग समूह के मालिक हैं। सन फार्मा के फाउंडर दिलीप संघवी अपनी दौलत में जोरदार बढ़ोतरी के दम पर पहली बार इस लिस्ट में तीसरे पायदान पर जगह बनाने में कामयाब रहे हैं। भारत के बिल गेट्स माने जाने वाले विप्रो के चेयरमैन अजीम प्रेमजी चौथे नंबर पर हैं। पांचवें नंबर पर हैं कंस्ट्रक्शन किंग पालोनजी मिस्त्री। अपने बेटों के साथ मिलकर उनकी टाटा संस में भी 18.5 फीसदी हिस्सेदारी है।


महिलाओं की हिस्सेदारी कम: आपको यह जानकर हैरानी होगी कि 100 भारतीय अमीरों की लिस्ट में केवल 5 महिलाएं ही अपना स्थान पक्का कर पाई हैं। इन पांच महिलाओं में 2 महिलाएं ही ऐसी हैं, जो टॉप-50 में शामिल हैं। सूची में शामिल पांच सबसे धनी महिलाओं में सबसे ऊपर ओ पी जिंदल समूह की अध्यक्ष सावित्री जिंदल हैं, जिन्हें 14वां स्थान दिया गया है। इनकी संपत्ति 4.9 अरब डॉलर (3.0 खरब रुपये) आंकी गई है।


दौलत पर इकॉनमी का ग्रहण: छठे, सातवें और आठवें नंबर पर हैं बैंकिंग और हेल्थ केयर में छा जाने वाले हिंदुजा ब्रदर्स, एचसीएल के फाउंडर और चेयरमैन शिव नादर और ग्रैंड गोदरेज फैमिली के वंशज और गोदरेज ग्रुप के वर्तमान चेयरमैन आदि गोदरेज। नौवें नंबर पर हैं आदित्य बिड़ला ग्रुप के अध्यक्ष कुमार मंगलम बिड़ला और दसवें पायदान पर हैं देश की सबसे बड़ी जीएसएम आधारित मोबाइल फोन कंपनी भारती ग्रुप के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर सुनील भारती मित्तल।


हालांकि देश के 100 सबसे बड़े रईसों की दौलत पिछले 1 साल में सिर्फ 3 फीसदी ही बढ़ी है। इसकी वजह इकॉनमी पर छाई मंदी बताई जा रही है। फोर्ब्स इंडिया की लिस्ट में इस बार 65 अरबपति हैं जो पिछले साल से 4 ज्यादा है। लिस्ट में शामिल होने वाले कुछ अरबपतियों की किस्मत भारत में नहीं, बल्कि मिडिल ईस्ट में चमकी है। लिस्ट में शामिल होने वाले नए नामों में बहरीन में कंस्ट्रक्शन बिजनेस चलाने वाले रवि पिल्लई और अबु धाबी के एम ए यूसुफ अली शामिल हैं। अली मध्य-पूर्व में लुलु सुपरमार्केट सीरीज के मालिक हैं। फोर्ब्स इंडिया के ताजा संस्करण के मुताबिक, देश के 100 सबसे ज्यादा दौलतमंद लोगों की कुल संपत्ति साल भर में बढ़कर 259 अरब डॉलर हो गई है।


खराब वक्त में माल्या की संपत्ति घटी

किंगफिशर में समस्याएं जारी हैं और इस खराब वक्त विजय माल्या की कुल संपत्ति पिछले एक साल में 5 करोड़ डॉलर (करीब 3 अरब रुपये) घटकर 75 करोड़ डॉलर (करीब 46 अरब रुपये) पर आ गई। इससे विजय माल्या देश के 100 अमीर व्यक्तियों की सूची में 11 पायदान नीचे खिसककर 84वें स्थान पर आ गए। पिछले साल वह 73वें स्थान पर थे।


फोर्ब्स की निगाह में भारतीय धनपति

1- मुकेश अंबानी - 21 बिलियन डॉलर (12.88 खरब रु.)

2- लक्ष्मी निवास मित्तल - 16 बिलियन डॉलर (9.8 खरब रु.)

3- दिलीप संघवी - 13.9 बिलियन डॉलर (8.5 खरब रु.)

4- अजीम प्रेमजी - 13.8 बिलियन डॉलर (8.4 खरब रु.)

5- पलोनजी मिस्त्री - 12.5 बिलियन डॉलर (7.6 खरब रु.)

6- हिंदुजा ब्रदर्स - 9 बिलियन डॉलर (5.5 खरब रु.)

7- शिव नाडर - 8.6 बिलियन डॉलर (5.2 खरब रु.)

8- आदि गोदरेज - 8.3 बिलियन डॉलर (5.0 खरब रु.)

9- कुमार मंगलम बिड़ला - 7.6 बिलियन डॉलर (4.6 खरब रु.)

10- सुनील मित्तल- 6.6 बिलियन डॉलर (4.0 खरब रु.)


पटेल को लेकर भिड़े मोदी और मनमोहन सिंह

नवभारतटाइम्स.कॉम | Oct 29, 2013, 10.52PM IST

अहमदाबाद।। बीजेपी के पीएम कैंडिडेट नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मौजूदगी में सरदार वल्लभ भाई पटेल के देश के पहले पीएम न बनने पर अफसोस जता दिया। परोक्ष रूप से देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर मोदी के इस दूसरे 'वार' ने मंच पर बैठे मनमोहन सिंह के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी। मगर, मनमोहन सिंह भी उन्हें जवाब देने में पीछे नहीं रहे। अपने अंदाज में ही सही, लेकिन उन्होंने मोदी को याद दिला दिया कि सरदार पटेल कांग्रेसी भी थे और सेकुलर भी। गौरतलब है कि इससे पहले मोदी ने एक रैली में कहा था कि नेहरू और पटेल के बीच गहरे मतभेद थे और पटेल के निधन के बाद नेहरू उनके अंतिम संस्कार में नहीं पहुंचे थे।


अहमदाबाद में सरदार वल्लभ भाई पटेल को समर्पित एक संग्रहालय के उद्घाटन समारोह में मंगलवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी एक साथ मंच पर मौजूद थे। मोदी ने अपने भाषण में पटेल का जिक्र करते हुए कहा,'देश को हमेशा एक गिला शिकवा रहेगा, एक दर्द रहेगा... हर हिंदुस्तानी के दिल में ये दर्द रहेगा कि काश सरदार साहब हमारे पहले प्रधानमंत्री होते तो आज देश की तस्वीर भी अलग होती, तक़दीर भी अलग होती। सरदार साहब की कमी यह देश सदा सर्वदा महसूस करेगा।'


मोदी के इस वार का पीएम ने अपने भाषण में करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा,' मुझे इस बात का गर्व है कि मैं उसी राजनीतिक दल से हूं, जिससे पटेल थे। हम सभी का कर्तव्य बनता है कि देश की जनता को खासकर युवाओं को बेहतर तरीके से वाकिफ कराएं।' पीएम की ये लाइनें मोदी पर कटाक्ष मानी जा रही हैं। उन्होंने आगे कहा, 'मैं पटेल के नेहरू और गांधी के साथ संबंधों का जिक्र करना चाहूंगा। सरदार पटेल का मानना था कि गांधी उन्हें पिता जैसा प्यार देते हैं। गांधी जी भी पटेल को बेटे की तरह मानते थे।'


उन्होंने आगे कहा, 'दोनों, नेहरू और पटेल के बीच कई बार मतभेदों का जिक्र आता है, लेकिन यह याद रखना बेहद जरूरी है कि दोनों के बीच सहमति के विषय कहीं ज्यादा थे। दोनों एक दूसरे का बड़ा सम्मान करते थे। खुद सरदार पटेल के शब्द थे कि शासन और संगठन के क्षेत्रों में नेहरू को सलाह देना मेरा सौभाग्य रहा है। दोनों ने हमेशा एक-दूसरे की सलाहों का सम्मान किया।


पीएम ने कहा, 'सरदार पटेल का नजरिया पूरी तरह सेकुलर था। उन्हें भारत की अखंडता में गहरा यकीन था। उन्होंने कहा था कि पूरा भारत उनका गांव है और सभी संप्रदाय के लोग उनके दोस्त और रिश्तेदार हैं।'


कार्यक्रम खत्म होने के बाद मोदी ने गुजरात के मुद्दों पर चर्चा के लिए समय न देने के लिए मनमोहन सिंह पर कटाक्ष किया। उन्होंने ट्वीट किया, 'हमने नर्मदा बांध की ऊंचाई, किसानों के मुद्दे और बाढ़ सहित गुजरात से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री से समय मांगा। दुर्भाग्य से प्रधानमंत्री ने गुजरात के प्रमुख मुद्दों पर विचार के लिए समय देने से इनकार कर दिया और प्रदेश कांग्रेस के कार्यालय राजीव गांधी भवन की यात्रा को प्राथमिकता दी।'

पढ़ें: मोदी के भाषण का नीतीश ने दिया जवाब!

आईबीएन-7 | Oct 29, 2013 at 04:15pm | Updated Oct 29, 2013 at 08:10pm


नई दिल्ली। पटना में मोदी की हुंकार रैली के दो दिन बाद आज बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बीजेपी के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर जमकर हमला बोला है। राजगीर में जेडीयू के सम्मेलन में नीतीश कुमार ने नरेंद्र मोदी की हुंकार रैली की जमकर खिल्ली उड़ाई। नीतीश ने मोदी के हर उस बयान का तुर्की बा तुर्की जवाब दिया, जो उन्होंने अपने भाषण में कहे थे। नीतीश ने मोदी के ज्ञान पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मोदी ऐतिहासिक तथ्यों के साथ फरेब करते हैं। वे खुलेआम झूठ बोलते हैं। मोदी के बयानों को झूठा बताते नीतीश के तीखे बोल कुछ ऐसे रहे-

मोदी के ज्ञान की खिल्ली

भाई इतिहास का तो महाज्ञान प्रदर्शित हुआ। इतिहास का अदभुत ज्ञान है उन्हें। चंद्रगुप्त को गुप्त वंश का बता दिय गया। मौर्य वंश के सिरमौर, संस्थापक चंद्रगुप्त का पोता ही अशोक था। हम उनकी बात सुन रहे थे और हमको अचरज हो रहा था। तक्षशिला को भी बिहार में ही बता दिया गया। तक्षशिला उत्तर पश्चिम में है। हम होकर आए हैं। अब वो पाकिस्तान में पड़ता है। तक्षशिला नालंदा विश्वविद्यालय से भी पुराना है। चाणक्य वहीं प्रोफेसर थे पहले। वहां से आए पाटलीपुत्र। सिकंदर को गंगा नदी के किनारे तक पहुंचा दिया गया। वो तो सतलज से उस पार से ही भाग गया था। रास्ते में उसकी मौत भी हो गई थी।

इतना पसीना क्यों आ रहा था भाई

पानी पी-पीकर मुझको कोसा गया। क्या उतावलापन था उनका। कितने बार पसीने पोंछे जा रहे थे। इतना पसीना क्यों आ रहा था? किस बात का एक्साइटमेंट? देश के सर्वोच्च पद की तमन्ना रखने वाले आदमी को धैर्यवान होना चाहिए। उसमें उतावलापन नहीं दिखना चाहिए।

मीठा खाते हो तो जुबान पर असर क्यों नहीं

विरोधियों की आलोचना की जानी चाहिए। लेकिन किस बात का, झूठ का सहारा लेकर के? गुजरात के एक भोज की बात उन्होंने कही। लेकिन हम उनके गेस्ट नहीं थे। पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के घर में शादी थी। वो वहीं के रहने वाले हैं। उनका आग्रह था कि हम भी आएं। हम भी गेस्ट थे, वे भी गेस्ट थे। दोनों को जज साहब ने खिलाया था। ढोकला खिलाया, जो भी खिलाया, उन्होंने खिलाया। हां, एक बात मुझे याद है। वहां हमको जानकारी मिली थी कि गुजरात के लोग आइसक्रीम बहुत खाते हैँ। देशभर में जितनी आइसक्रीम की खपत है, उसकी आधी गुजरात में खपत है। मीठा तो खाते हैं, लेकिन मीठा खाने का असर भी होना चाहिए। जुबान मीठी क्यों नहीं है। तीखी से तीखी बात मीठी जुबान में की जा सकती है। उसके लिए पानी पीने की जरूरत नहीं है। पसीने-पसीने होने की जरूरत नहीं है। धैर्य रखिए। प्रधानमंत्री का पद इस देश के नेता का पद है। 120 करोड़ लोगों की रहनुमाई करने वाले आदमी को धैर्यवान होना चाहिए।

आसाराम का हश्र ध्यान में रखना

एक कथा सुनाई गई। झूठी कथा सुनाई गई। पीएम के किसी भोज की टेबल पर हम और वो आमने-सामने कभी नहीं बैठे। ये कथा बनावटी है। ठीक वैसे ही जैसे हवा बनावटी है। ये कुदरती हवा नहीं है, ब्लोअर से दी जा रही हवा है। वो कथा सुना रहे थे, एक कथावाचक जो वहीं(गुजरात) के हैं उनका हश्र तो देख ही रहे हैं(आसाराम का) ना आप लोग। जब कथा बनावटी तो हवा भी बनावटी। निश्चिंत रहिए।

तुकबंदी के लिए फिजूल की बातें

तुकबंदी हो रही है भई। जेपी को छोड़ दिया तो बीजेपी को छोड़ दिया। जेपी को कब छोड़ा? मैं जानना चाहता हूं कि कब छोड़ा जेपी को। इसलिए क्योंकि बीजेपी में भी बी के बाद जेपी है इसलिए जेपी से तुकबंदी बना दी। अरे कुछ तो स्तर होना चाहिए। लोहिया जी की पीठ में हमलोगों ने खंजर भोंका? अरे लोहिया जी वो शख्सियत हैं जिन्होंने जनसंघ और कम्युनिस्टों को एक साथ पानी पिला दिया। नौ राज्यों में सरकारें बनीं। बाद में जब जयप्रकाश नारायण से किसी ने पूछा कि आपकी संपूर्ण क्रांति है क्या तो उन्होंने जवाब दिया कि लोहिया की जो सप्त क्रांति है वही मेरी संपूर्ण क्रांति है। उन्होंने भई गैरकांग्रेसवाद का नारा दिया और चार पार्टियों को एक कर जनता पार्टी बनाई। उन्होंने चार पार्टी को मिला दिया और यहां गठबंधन तुड़वाने वाले कह रहे हैं कि पीठ में खंजर भोंका।

गैरकांग्रेसवाद किसने कमजोर किया

हमने कहा कि बीजेपी बड़ी पार्टी है नेता तो आप ही का होगा। लेकिन ऐसा नेता चुनो जो सबका ख्याल रखे। सबका विश्वास जीते। सबको साथ लेकर चले। सबको मिलाए। सबको मंजूर हो। देश के जो पिछड़े इलाके हैं, उनके विकास की भी चिंता करे। हमने क्या गलत कहा था। हमने कोई गुनाह नहीं किया था। ये हमारा सुझाव था। हमारे सुझाव को मानते तो आज का समय कुछ और होता। उन्होंने देखा कि मौका ऐसा कि अकेले बाजी मार लेंगे। हम उनको बताना चाहते हैं। एक बार में एक लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। कांग्रेस को हराने का लक्ष्य रखते तो जरूर कामयाबी मिल जाती लेकिन उसे हटाएंगे और खुद बैठ जाएंगे, ये दो लक्ष्य रखने वाला कुशल रणनीतिकार नहीं होता। गैरकांग्रेसवाद जो लोहिया की देन है, उसको कमजोर किया है बीजेपी ने। हमने नहीं कमजोर किया।

हुंकार का मतलब होता है अहंकार

रैली का नाम था हुंकार। हुंकार का क्या मतलब होता है। डिक्शनरी उठाकर देख लीजिए। दंभ के साथ अगर ऊंचा स्वर लगाया जाए तो उसे हुंकार कहते हैं। दंभ यानी घमंड, अहंकार। हुंकार में अहंकार समाहित है। जब हम साथ थे तभी से हुंकार करने लगे और साथ छूट गया तो कहते हैं विश्वासघात। क्या विश्वासघात हुआ है हम भेद खोल दें। बोलेंगे तो फिर कभी आज सिर्फ संकेतों में बताते हैं। हमको किसने कहा था कि नितिन गडकरी जी आपसे बात करना चाहते हैं। गडकरी से हमारी बात हुई। क्या बात हुई। गडकरी उस समय राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। उन्होंने जो बात कही क्या वो उसपर टिके? खुद ही हटा दिए गए। बाद में जब टूट हो रहा था तो आडवाणी जी ने हमें फोन किया। कहा कि आपको राष्ट्रीय अध्यक्ष जी ने कुछ वचन दिया था। वो अध्यक्ष का वचन है। उसे निभाया जाएगा। हमने विनम्रतापूर्वक कहा कि आडवाणीजी अब आपकी कोई सुनता नहीं है। अब वो दौर चला गया बीजेपी में।

दान के बखान का ये कैसा संस्कार

2010 में कोसी में त्रासदी आई। बहुत लोगों ने मदद की। बिहार के लोगों ने अपना पेट काटकर राहत में योगदान दिया। हजारों करोड़ के राहत कार्य चलाए गए। हर राज्य ने सहायता भेजी। हम भी दूसरे राज्य में इस तरह की आपदा आती है तो सहायता भेजते हैं। पांच करोड़ की सहायता भेजी। उसका गुणगान किया गया कि विपत्ति के काल में हमने मदद की। अरे जो दान दिया जाता है उसका बखान नहीं किया जाता है। मेरी शिकायत इस बात पर थी कि बिहार की त्रासदी में जहां हजारों करोड़ लगे, पांच करोड़ का क्या बखान। देते हो, बखान करते हैं ले जाओ अपना पैसा। उस समय तकलीफ लगी लेकिन उस समय जो चेक लौटाया उसे भुना लिया गया। दान दिया, फिर बखान किया, पैसा लौटाया तो वापस ले लिया। ये कहीं देखा है। ये भारतीय संस्कार है। हम लोग तो समाजवादी हैं, संस्कार वगैराह की बात वो करते रहते हैं, ये है संस्कार।

मैं तो इस्तीफे के लिए तैयार था

हम तो तैयार थे इस्तीफा देने के लिए। अपने सहयोगी सुशील कुमार मोदी जो हमने कह दिया था कि मैं तो तैयार हूं। डेढ़ मिनट का फासला है यहां से राजभवन का लेकिन कौन पीछे हटा? अगर इतने आहत थे तो 2010 में क्यों साथ चुनाव लड़े? दरअसल मेरे बिना उस समय काम नहीं चलने वाला था इसलिए साथ लड़े तो अवसरवादी कौन? जब जैसा तब तैसा किसका आचरण? 2010 में हमारी जरूरत थी तो कह रहे हैं अपमान का घूंट पीकर रहे और 2014 में?

ये तो हिटलर की भाषा है

क्या बोल रहे हैं? कैसी भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। किस तरह की उत्तेजना पैदा कर रहे हैं? पब्लिक से पूछ रहे थे कि सजा दोगे! सजा दोगे! सजा दोगे! जाहिर है सभा में कार्यकर्ता कहेंगे-हां। उसके बाद पूछा कि चुन-चुनकर साफ करोगे! एक बार नहीं तीन बार पूछा चुन-चुनकर साफ करोगे। लोकतंत्र में चुन-चुनकर साफ किया जाता है या चुनाव में हराया जाता है? ये लोकतंत्र है या फासीवाद है। ये कैसी भाषा है? हम देश की जनता को आगाह कर देना चाहते हैं। ये भाषा लोकतांत्रिक नहीं है। नोबेल विजेता अर्थशास्त्री ने बिहार की तारीफ क्या कर दी क्या हुआ सोशल साइट्स पर? कैसे उनके चरित्र हनन का प्रयास किया गया। जब फासिज्म में विश्वास हो तो हिटलर आदर्श हो जाता है।

(पूरा भाषण सुनने के लिए वीडियो देखें)



पीएम ने नहीं दिए बातचीत के लिए वक्त: मोदी

मोदी ने टि्वटर पर कहा कि मैंने नर्मदा बांध की ऊंचाई, किसानों के मसले और बाढ़ जैसे महत्वपूर्ण मसलों पर चर्चा के लिये प्रधानमंत्री से समय मांगा था।

कांग्रेस को तालाबों में खिले कमल से भी दिक्कत

मध्य प्रदेश में तालाबों में खिले कमल के फूलों को ढकने की कांग्रेस की मांग को हास्यास्पद बताते हुए कहा है कि ऐसा हुआ तो कांग्रेस का चुनाव चिन्ह हाथ को किससे ढका जाएगा।

http://khabar.ibnlive.in.com/politics/

RBI गवर्नर रघुराम बोले, मैं भारत का नागरिक हूं


मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने उनकी नागरिकता को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर आज बड़े ही निराले अंदाज में कहा कि मैं भारतीय नागरिक हूं। किसी और देश की नागरिकता नहीं है मेरे पास। यह बड़े ही आश्चर्य की बात है कि एक देश के केन्द्रीय बैंक के गवर्नर से हर बार उसकी नागरिकता को लेकर सवाल किया जाता है।

राजन रिजर्व बैंक की दूसरी तिमाही की मौद्रिक समीक्षा जारी करने के बाद यहां संवाददाताओं के सवालो का जवाब दे रहे थे। एक पत्रकार ने जब उनसे उनकी नागरिकता को लेकर उठे विवाद पर पूछा तो राजन ने कहा कि मुझे यह सब एक मजाक लगता है। मैं यह सोच भी नहीं सकता कि कोई व्यक्ति इतने हल्के में इतना बड़ा सवाल कर सकता है। मैं इसे बारे में बस एक बार ही जवाब दूंगा और वह यह कि मैं एक भारतीय नागरिक हूं और हमेशा रहूंगा।

उन्होंने कहा कि पता नहीं यह सवाल कहां से और कैसे उठा है जबकि उन्होंने कभी किसी और देश की नागरिकता के लिए आवेदन नहीं किया। उन्होंने कहा कि वह विदेश में इसलिए रह सके क्योंकि उनके पिता विदेश सेवा में थे। इसके अलावा वित्त मंत्रालय में रहते हुए वह हमेशा ही आधिकारिक पासपोर्ट पर विदेश यात्रा करते रहे। ऐसी खबर है कि राजन के पास अमेरिका का ग्रीन कार्ड है। जो कि वहां नागरिकता पाने का पहला चरण है हालांकि इस काड से वह वहां फिलहाल नौकरी भर कर सकते हैं। इस कार्ड की वैधता अवधि जल्दी ही समाप्त होने वाली है और अगर राजन को इसे बनाए रखना है तो उन्हें इसके लिए अमेरिका में एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा।

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'तोते' की आजादी के पक्ष में नहीं दिखती सरकार

Published on Oct 29, 2013 at 21:50

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट से 'पिंजड़े में बंद तोता' की उपमा पा चुके केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सरकार आसानी से आजादी देने के पक्ष में नहीं दिख रही है। देश की प्रमुख जांच एजेंसी ने सरकार से दो सुविधाएं प्रदान किए जाने की मांग अदालत में रखी, जिसका सरकार के वकील ने पुरजोर विरोध किया। सीबीआई ने कोयला ब्लॉक आवंटन मामले की सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट पीठ के सामने अपनी दलील में कहा था कि उसके निदेशक को सरकार के सचिव के बराबर पदेन अधिकार निहित हो ताकि नौकराशाही के जाल में उलझे बगैर निदेशक कार्मिक मंत्रालय से सीधे संपर्क साध सकें। शीर्ष अदालत ने मंगलवार को सरकार से सीबीआई की दलीलों पर अपना पक्ष रखने के लिए कहा।

अदालत ने सरकार से सीबीआई की उस दलील पर अपनी स्थिति साफ करने के लिए कहा, जिसमें एजेंसी ने अदालतों के सामने उसका प्रतिनिधित्व करने के लिए स्वतंत्र वकील रखने का अधिकार जांच एजेंसी के निदेशक को दिए जाने की मांग की थी। सरकार की ओर से पैरवी करते हुए सोलिसीटर जनरल मोहन पराशरन ने सीबीआई की दोनों दलीलों का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह प्रशासनिक भावना के खिलाफ होगा। इससे गलत संकेत जाएगा। इसमें शक्ति संतुलन बनाए रखा गया है। सीबीआई को ढेर सारी शक्तियां प्रदान की गई हैं।

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सदा के लिए उड़ गया हिंदी साहित्य का 'हंस'

Published on Oct 29, 2013 at 20:15

नई दिल्ली। हिंदी साहित्य का हंस अपने विद्रोही तेवर, बेबाक विचार से इस दुनिया को झकझोरने के बाद अचानक दूसरी दुनिया के लिए उड़ गया। हिंदी साहित्य के प्रमुख हस्ताक्षर राजेंद्र यादव का सोमवार की देर रात निधन हो गया। राजेंद्र यादव ने हिंदी साहित्य में मोहन राकेश और कमलेश्वर के साथ नई कहानी आंदोलन की शुरुआत की। बाद में राजेंद्र यादव ने मुंशी प्रेमचंद की शुरू की गई साहित्यिक पत्रिका हंस का पुनर्प्रकाशन शुरू किया और इसे हिंदी साहित्य का एजेंडा तय करने वाले मंच में बदल दिया। उनके उपन्यास और कहानियों में गहरा समाजशास्त्रीय अध्ययन दिखाई देता है।

एक ऐसा साहित्यकार संपादक जिसके नीर-क्षीर विवेक, बेबाकी और जिंदादिली की दूसरी मिसाल नहीं थी, जिसके बगैर हिंदी साहित्य के मौजूदा परिदृश्य पर चर्चा ही नहीं हो सकती थी, वो राजेंद्र यादव अचानक दीवार में जड़ी एक तस्वीर में बदल गए। सोमवार रात दिल्ली के मयूर विहार मोहल्ले के आकाश दर्शन अपार्टमेंट में 84 साल की उम्र में खुद को युवा समझने वाले राजेंद्र यादव ने आखिरी सांस ली। राजेंद्र की बेटी रचना यादव ने बताया कि तबियत तो ज्यादा खराब नहीं थी। सांस की प्रॉबल्म थी, शुगर भी था। मेडिटेशन के कारण कंट्रोल में था। दफ्तर जाते थे। कल थोड़ा ब्रीदिंग बढ़ गई थी। कल हालत खराब होने पर अस्पताल ले कर गए लेकिन रास्ते में उन्होंने शरीर छोड़ दिया।

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मुंबई। देश के शेयर बाजारों में मंगलवार को तेजी दर्ज की गई। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 358.73 अंकों की तेजी के साथ 20,929.01 पर और निफ्टी 119.80 अंकों की तेजी के साथ 6,220.90 पर बंद हुआ। बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 23.21 अंकों की तेजी के साथ 20,593.49 पर खुला और 358.73 अंकों या 1.74 फीसदी की तेजी के साथ 20,929.01 पर बंद हुआ। दिन भर के कारोबार में सेंसेक्स ने 20,952.55 के ऊपरी और 20,493.66 के निचले स्तर को छुआ।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 6.45 अंकों की तेजी के साथ 6,107.55 पर खुला और 119.80 अंकों या 1.96 फीसदी तेजी के साथ 6,220.90 पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में निफ्टी ने 6,228.05 के ऊपरी और 6,079.20 के निचले स्तर को छुआ।

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ibnlive.com
ASI finds no gold at Unnao fort, stops excavation
http://ow.ly/qgZHi
The ASI has only managed to excavate living quarters and pieces of pottery from the Buddhist period at the site.

#Unnao #ASI
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Tehelka
What Modi wants you to believe and what Sardar Patel really said about RSS

It is hard to miss the irony that the CCC of the BJP, who talks of creating a Congress-free India has to cling on to one of the tallest leaders of the Congress party for his personal gains. But what better can one expect from a person whose entire propaganda is built on such duplicity? |http://tinyurl.com/kkzexm2

बेरोज़गारी में नंबर वन है पटना और लास्ट है भोपाल

टाइम्स न्यूज नेटवर्क | Oct 27, 2013, 12.57PM IST


मरेंद्र सिंह

नई दिल्ली: बिहार में नीतीश कुमार के विकास के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। पटना देश का सबसे बेरोज़गार शहर है और भोपाल में बेरोज़गारी की दर सबसे कम है। एक लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में 2009-2010 में करवाए गए एक सर्वे में यह तथ्य सामने आया है। सरकार द्वारा यह सर्वे पुरुषों में बेरोज़गारी की दर का आंकलन करने के लिए करवाया गया था जिसमें पटना नंबर एक पर रहा।


नैशनल सैंपल सर्वे ऑर्गनाइज़ेशन द्वारा करवाए गए सर्वे में यह भी सामने आया कि महिलाओं में 2009-10 में बेरोज़गारी की दर 5.6% रही। जबकि 2004-05 में यह आंकड़ा 4.3% था। पुरुषों में बेरोज़गारी 3.4% ही बनी रही।


लेकिन, भारत के छोटे शहरों और कस्बों समेत पूरे शहरी इलाके में बेरोज़गारी की दर 2004-05 के मुकाबले पूरे एक प्रतिशत गिरी है जो कि यूपीए-2 के रिपोर्टकार्ड में वज़न डाल सकता है। 2004-05 में संपूर्ण बेरोज़गारी दर 3.8% थी जबकि 2009-10 में यह 2.8% थी।


पटना में पुरुषों की बेरोज़गारी दर सबसे अधिक (13%) पाई गई। एक समय उत्तर प्रदेश का इंडस्ट्रियल हब रहा कानपुर दूसरे नंबर पर रहा। यहां पुरुषों में 8% बेरोज़गारी पाई गई। भोपाल में 2004-05 के मुकाबले 2009-10 में पुरुषों की बेरोज़गारी में भारी गिरावट दर्ज की गई। पहले जहां यह दर 6% थी वहीं पांच साल बाद 2009-10 में यह सिर्फ 1% रह गई। इसी तरह पश्चिम बंगाल के हावड़ा में भी बेरोज़गारी की दर 4.9% से 1.4% तक गिरी।


लुधियाना और आगरा में बेरोज़गारी दर में भारी उछाल देखा गया। लुधियाना में जहां करीब 5% की बढ़त रही वहीं आगरा में 3.5% अधिक लोग बेरोज़गार हुए।


महिलाओं के मामले में पटना के बाद चेन्नै और पुणे का नज़दीकी इंडस्ट्रियल एरिया पिंपरी-चिंचवाड़ रहे। यहां 19% महिलाएं बेरोज़गार पाई गईं।


पटना में बेरोज़गारी दर 13% तक पहुंचने के बारे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि 2009-10 में पड़े सूखे के कारण हुआ जिसके चलते शहर आने वाले लोगों को रोज़गार नहीं मिल सका।


नैशनल स्टैटिस्टिक्स कमिशन के चेयरमन प्रणब सेन ने कहा कि 2004-05 में कृषि की परिस्थितियां सामान्य थीं जबकि 2009-10 में सूखा पड़ा था। इसीलिए स्थितियां अलग हैं।


उन्होंने बताया कि सारी बातों का लब्बोलुआब यह है कि बेरोज़गारी की दर में कोई खास बदलाव नहीं आया है इसलिए जो लोग शहरों की तरफ माइग्रेट कर रहे हैं उन्हें देर-सवेर नौकरियां मिल रही हैं।


दिल्ली में भी पुरुषों और महिलाओं दोनों की ही बेरोज़ागारी दर में गिरावट दर्ज की गई। वहीं, गुजरात में जॉब सिचुएशन काफी बेहतर रही । सूरत, अहमदाबाद और वडोदरा में भी रोज़गार की परिस्थिति काफी बेहतर रही।

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Aaj Tak
कभी राहुल महाजन की दुल्‍हन बनने का सपना देखने वाली टीवी एक्‍ट्रेस निकुंज मलिक घरेलू हिंसा का शिकार हुई है...http://bit.ly/1f1fb2n
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Sunil Kumar 'suman'
अमिता ने हिंदी विश्वविद्यालय,वर्धा से मीडिया में पी-एच.डी. की डिग्री हासिल की और फिलहाल गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय,बिलासपुर में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत है। अमिता हमेशा से मुझे प्रतिरोध की उस परंपरा को आगे बढ़ाने वालों मे शामिल दिखी, जो प्रतिलिपियों से भरी दुनिया में मौलिक बने रहने की धुन पाले रहते हैं। अमिता ने यह साबित कर दिखाया कि बिना चापलूसी किए भी केवल अपनी काबलियत से नौकरी पाई जा सकती है और अपनी रीढ़ की मजबूती भी कायम रखी जा सकती है। गलत का विरोध करने और सच के साथ खड़े होने का खामियाजा वो भुगतती रही है लेकिन कई बार उसने सामने वाले के नाक भी रगरवा दिए हैं। पी-एच.डी. में एडमीशन और नौकरी के लिए केंचुआ बनने को मजबूर होती जा रही युवा पीढ़ी को अमिता से सीखने की जरूरत है। अमिता पिछड़े वर्ग से है और उसने वर्धा में साहित्य विभाग के अपने साथी संतोष बघेल के साथ तमाम अवरोधों-विरोधों के बावजूद प्रेम-विवाह किया। संतोष दलित समाज से है। मुझे बहुत खुशी है कि इस विवाह में मैंने अमिता के अभिभावक के तौर पर अपने हस्ताक्षर किए। मेरे लिए और भी ज्यादा खुशी इस बात की है कि अमिता और संतोष दोनों अंबेडकरवादी आंदोलन के समर्पित सिपाही हैं। आज अमिता का जन्मदिन है। मेरी तरफ से उसे ढेर सारी मंगलकामनाएँ और बधाइयाँ...इस उम्मीद के साथ कि तमाम सारे अंधकार के बावजूद वो प्रतिरोध और परिवर्तन की लौ को कभी मद्धिम नहीं होने देगी..... Amita Sagar K Rajnesh Kumar Pandey Anil Chamadia Rajkumar DohareRajneesh Kumar Ambedkar Nilima Taksande Naresh Kumar SahuPrafull Manikratna Moon Surjeet Kumar Singh Rajesh Kumari — with आशीष कुमार 'अंशु' and 4 others.
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Mohan Shrotriya via Balendu Swami
इस बात पर तो लगभग आम सहमति है, पूरे देश में ! (अंध-भक्तों की बात नहीं कर रहा) झूठे तो बहुत देखे, पर इन जैसा कोई नहीं. सबसे बड़ी खूबी है इनकी, इनका बेझिझक झूठ बोल जाना, यह जानते हुए भी कि फ़ौरन पकड़े जाएंगे. चेहरे पर शिकन तक नहीं. एक झूठ से...अगली और भी बड़ी झूठ तक, चलते चले जाने का दुर्लभ अभ्यास है इन्हें.
Not seen a bigger liar than Narendra Modi: Medha Patkar - India - dna
www.dnaindia.com
- India dna
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With Udit Raj and 18 others.
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Alok Putul
http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/10/131028_bastar_schools_naxals_aa.shtml

बस्तर: स्कूलों में सुरक्षा बल इसलिए बच्चों की छुट्टी - BBC Hindi - भारत
www.bbc.co.uk
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर ज़िले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद कई स्कूलों में सुरक्षा बलों को ठहराने पर विवाद शुरू हो गया है.
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बस्तर: स्कूलों में सुरक्षा बल इसलिए बच्चों की छुट्टी

आलोक प्रकाश पुतुल

रायपुर, छत्तीसगढ़ से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

मंगलवार, 29 अक्तूबर, 2013 को 12:41 IST तक के समाचार

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर ज़िले में कई स्कूलों में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद सुरक्षा बलों को ठहराने पर विवाद शुरू हो गया है.

कुछ इलाक़ों में चुनाव होने तक स्कूल बंद रखने की घोषणा कर दी गई है, तो कई जगह बच्चे स्कूल खुलने की उम्मीद के साथ रोज़ स्कूल पहुंच रहे हैं मगर स्कूल में सुरक्षा बलों के 'क़ब्ज़े' के कारण उन्हें लौटना पड़ रहा है.

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टॉपिक

इस मसले पर छत्तीसगढ़ सरकार के ख़िलाफ़ याचिका दायर करने वाली नंदिनी सुंदर ने इसे ग़ैरकानूनी बताया है. वहीं राज्य के पुलिस महानिदेशक रामनिवास का दावा है कि सब कुछ चुनाव आयोग के निर्देश के अनुसार हो रहा है.

मगर क़ानून के जानकार इसे सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना बता रहे हैं.

आदेश

18 जनवरी 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय की प्राध्यापक नंदिनी सुंदर की याचिका पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार को सुरक्षा बलों को स्कूलों, हॉस्टलों और आश्रमों से हटाने को कहा था.

बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अदालत को गुमराह किए जाने पर फटकार भी लगाई थी. इसी साल 22 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को स्कूलों में पुलिस कैंप के मुद्दे पर अवमानना नोटिस भी जारी किया.

"सुरक्षा बलों को स्कूलों में ठहराने का निर्णय हमने चुनाव आयोग की सहमति के बाद लिया है और इसमें कुछ भी ग़लत नहीं है. हमने केंद्रीय चुनाव आयोग से इसके लिए अनुमति मांगी थी और उनकी सहमति के बाद ही हमने सुरक्षा बलों को स्कूलों में ठहराया है."

रामनिवास, पुलिस महानिदेशक

बस्तर की 12 और राजनांदगांव की 6 विधानसभा सीटों पर 11 नवंबर को मतदान होना है. बस्तर में इस बार 63 फ़ीसदी मतदान केंद्रों को संवेदनशील माना गया है.

हालत यह है कि बीजापुर ज़िले में 243 मतदान केंद्र हैं, जिनमें 104 मतदान केंद्र अतिसंवेदनशील हैं, तो 139 संवेदनशील.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक़ बस्तर और राजनांदगांव में चुनाव के लिए राज्य पुलिस के अलावा केंद्रीय और राज्य सशस्त्र बलों की 560 कंपनियां तैनात की जा रही हैं.

इस इलाक़े में पहले से ही सुरक्षाबलों की 33 बटालियन तैनात हैं और सुरक्षा बलों को पहले की ही तरह स्कूलों, छात्रावासों और आश्रमों में ठहराया जा रहा है.

निशाने पर स्कूल

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने इस स्कूल को धमाका कर उड़ा दिया था.

बस्तर के सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, कांकेर, बीजापुर और जगदलपुर में नक्सली भी ऐसे स्कूलों को निशाना बनाते रहे हैं, जहां सुरक्षा बलों ने अपना कैंप बनाया था.

यही कारण है कि कई इलाक़ों में तो सरकारी निर्देश के बाद भी पक्के स्कूल भवन का निर्माण करने का काम कई महीनों से ठप है.

सुकमा के तोंगपाल, रोकेल और गादीरास जैसे इलाक़ों में चलने वाले 16 पोर्टा केबिन आवासीय स्कूलों को बंद कर दिया गया है.

इनमें रहकर पढ़ने वाले तीन हज़ार बच्चों को छुट्टी दे दी गई है. इन स्कूलों में सुरक्षा बलों के जवान ठहराए गए हैं.

इसी तरह नारायणपुर के 15 स्कूलों में भी बिना पूर्व सूचना के छुट्टी दे दी गई है. स्कूल कब खुलेंगे, इस बारे न तो बच्चों को कोई जानकारी है और न उनके अभिभावकों को. कांकेर के भी कुछ स्कूलों में चुनाव तक छुट्टी कर दी गई है.

विरोध

नक्सली दावा करते हैं कि वो आदिवासियों के हितों की लड़ाई लड़ रहे हैं

बस्तर के स्कूलों में सुरक्षा बलों को ठहराने के मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट ले जाने वाली नंदिनी सुंदर का कहना है कि राज्य सरकार का क़दम पूरी तरह ग़ैरक़ानूनी है.

नंदिनी कहती हैं, "राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की भी परवाह नहीं है. दिल्ली में भी चुनाव हो रहे हैं पर क्या यहां सुरक्षाबलों को स्कूलों में ठहराया जा सकता है? सबसे बड़ी बात तो यह है कि सरकार की प्राथमिकता में शिक्षा नहीं है."

हालांकि नंदिनी सुंदर की आपत्ति ख़ारिज करते हुये राज्य के पुलिस महानिदेशक रामनिवास सब कुछ क़ानून सम्मत बताते हैं.

उनका कहना है, "सुरक्षा बलों को स्कूलों में ठहराने का निर्णय हमने चुनाव आयोग की सहमति के बाद लिया है और इसमें कुछ भी ग़लत नहीं है. हमने केंद्रीय चुनाव आयोग से इसके लिए अनुमति मांगी थी और उनकी सहमति के बाद ही हमने सुरक्षा बलों को स्कूलों में ठहराया है."

मगर संविधान विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिवक्ता कनक तिवारी ने इसे सीधे-सीधे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना बताया.

उनका कहना है कि चुनाव आयोग मूल रूप से चुनाव प्रक्रिया को संपन्न करने वाली एक संस्था है और इस तरह की सहमति वह कतई नहीं दे सकती.

कनक तिवारी कहते हैं, "विवाह संपन्न कराने वाला पंडित दहेज की रक़म या रिसेप्शन का स्थान नहीं तय कर सकता. चुनाव आयोग भला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को कैसे दरकिनार कर सकता है. ऐसा अगर करना भी होगा, तो इसके लिए आयोग को सुप्रीम कोर्ट की सहमति लेनी होगी."

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Feroze Mithiborwala shared a link.

Hard truth: 30% vacancies plague Gujarat Administrative Service cadre - Ahmedabad - dna

www.dnaindia.com

Sanctioned strength of GAS cadre is 580, but 165 of these posts are lying vacant. - Ahmedabad dna

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Call it a classical case of poor planning or government's indifference, but if the backbone of the state's administration — the Gujarat Administrative Service (GAS) cadre — is grappling with more than 30% vacancies, something is rotten in the state (of affairs) in Gandhinagar! Even as the state government tom-toms the Gujarat model of development, the government seems to have failed to put its own house in order. What is worse is that situation is set to get worse in the coming years if immediate measures to rectify the situation are not initiated.

The sanctioned strength of GAS cadre is 580, of which 165 posts are lying vacant. The cadre strength will shrink further as the around 60 – 70 officers will either retire or be promoted to the IAS cadre in the next two years.

"The GAS cadre is the most important cadre in the state administration after IAS. There are 30% vacancies even in IAS cadre, but it continues to get new blood every year. In the case of GAS, there has not been direct recruitment for over a decade," said a senior official.

The direct recruitment of deputy collector grade officers last took place in the state in 1998, a full 15 years ago. The government didn't recruit deputy collectors all these years citing excess strength of the cadre. However, things seem to have come to a boil now as the cadre is functioning at just about 70% strength. "GAS is the cadre that runs the show, but it is also the most neglected. Promotions are inevitably delayed and there is no meritocracy. Whims and wishes of the government rule the roost," rued an officer.

In absence of direct recruitment, the government has kept the GAS cadre going by promoting mamlatdar-grade officers. Around 20 such officers are promoted every year, but the number is grossly inadequate. More officers cannot be promoted as it would lead to a skewed or imbalanced cadre.

GAS cadre is divided into four scales – deputy collector, additional collector, selection and apex.

The sanctioned strength of deputy collector grade is 350 of which 94 are vacant. Sanctioned strength of additional collector grade is 174 of which 55 are vacant. Similarly, in the case of selection grade, sanctioned posts are 56 of which 16 are vacant.

"There are 14 sanctioned posts in apex scale, but not a single officer has been promoted to this grade," said another GAS official.

GAS officers have a wide range of postings, of which the most common are as sub divisional magistrate, land acquisition officer, district supply officer, stamp duty, resident additional collector, among others. The much touted Apno Taluko Vibrant Taluko (ATVT) is also about key responsibilities to GAS officers. Many officers also serve as secretaries to ministers. "The state cadre has been constantly ignored. Forget about filling vacancies, even promotions are given after long delays," said another officer.

The state's General Administration Department (GAD), however, is set to rectify the past mistakes and is giving final touches to a five-year recruitment programme.

"A recruitment drive, unprecedented in scale for any government in the country, is being planned to bridge the shortfall. The number of vacancies across cadres that will arise in the next five years is being ascertained as part of this drive," said a GAD official.

Direct recruitment of deputy collector grade officers last took place in the state way back in 1998.



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24 Ghanta
breaking news- উন্নাওয়ে মাটির তলায় কোনও সোনা নেই, ঘোষণা আর্কিওলজিক্যাল সার্ভে অফ ইন্ডিয়া।। বাবার স্বপ্ন বিফলে, একদিকে হতাশা আর অন্যদিকে হাসিতে ভাসছে দেশ। নিচে পড়ুন বিস্তারিত
http://zeenews.india.com/bengali/nation/no-hidden-gold-in-unnao-declares-asi_17478.html

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Ak Pankaj via Jacinta Kerketta
खूंटी के तजना नदी पर डैम बनाकर सरकार ग्रामीणों को मछली पालन के लिए प्रोत्साहित करेगी। किसानों के हाथ से उनकी जमीनें छीन कर उन्हें चावल-दाल के लिए बाजार पर पूरी तरह निर्भर बना देने की यह योजना कितना जनहितकारी है? - Jacinta Kerketta

Aaj Tak
चुनाव से पहले मध्य प्रदेश #Congress को खटकने लगे कमल के तालाब, चुनाव आयोग से की सारे कमल के तालाबों को ढंके जाने की मांग...पढ़ें पूरी खबर....http://aajtak.intoday.in/story/-congress-asks-election-commission-to-hide-lotus-ponds-in-madhya-pradesh-from-voters-1-745804.html

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