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Wednesday, August 10, 2011

Fwd: भाषा,शिक्षा और रोज़गार



---------- Forwarded message ----------
From: भाषा,शिक्षा और रोज़गार <eduployment@gmail.com>
Date: 2011/8/9
Subject: भाषा,शिक्षा और रोज़गार
To: palashbiswaskl@gmail.com


भाषा,शिक्षा और रोज़गार


राजस्थानःशिक्षकों का होगा स्थायीकरण

Posted: 08 Aug 2011 09:28 AM PDT

परिवीक्षाकाल पूरा होने के बावजूद स्थायीकरण के लिए तरस रहे 28 हजार तृतीय श्रेणी शिक्षकों की आस अब पूरी होगी। प्रारम्भिक शिक्षा निदेशक ने जिला शिक्षा अघिकारियों को आदेश जारी कर ऎसे शिक्षकों के प्रार्थना पत्र लेकर तुरंत स्थायीकरण करने के आदेश जारी किए हैं।
राजस्थान पत्रिका ने एक अगस्त के न्यूज फॉर एक्शन कॉलम में ' स्थायी होने के लिए तरसे 28 हजार शिक्षक' शीष्ाüक से समाचार प्रकाशित कर मामला उठाया था। इसके बाद प्रारम्भिक शिक्षा निदेशक डॉ. वीणा प्रधान ने जिला शिक्षा अघिकारियों को आदेश जारी कर ऎसे शिक्षकों के स्थायीकरण को कहा है।
आदेशानुसार डीईओ के माध्यम से शिक्षकों से प्रपत्र भरवाए जाएंगे। जिसमें शिक्षक की नियुक्ति की तारीख, शुरूआती वेतन, वेतन बढ़ोतरी की तारीख व राशि, नियमतिकरण की तारीख, स्थायीकरण की स्थिति और स्थायीकरण नहीं होने के कारण की जानकारी ली जाएगी। फिर डीईओ प्रकरणों को सूचीबद्ध कर उनका निस्तारण करेंगे। जिन मामलों में निदेशालय या राज्य सरकार स्तर पर स्वीकृति जरूरी है, वे उच्चाघिकारियों को भिजवाए जाएंगे(राजस्थान पत्रिका,जयपुर,8.8.11)।

राजस्थानः91 मॉडल स्कूलों को मंजूरी

Posted: 08 Aug 2011 09:26 AM PDT

राज्य की 134 पंचायत समितियों में केन्द्र सरकार के सहयोग से 134 मॉडल स्कूल बनाए जाएंगे। भवन निर्माण की जिम्मेदारी सार्वजनिक निर्माण विभाग को दी गई है। एक मॉडल स्कूल पर 3.2 करोड़ रूपए खर्च होंगे।

राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए पंचायत समिति स्तर पर मॉडल स्कूल बनाने का फैसला हुआ है। योजना के तहत वर्तमान में भूमि की उपलब्धता होने के कारण 91 स्थानों पर स्कूल भवन निर्माण की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी हो गई है। अजमेर संभाग में 35 स्कूल बनेंगे। इसके तहत भीलवाड़ा जिले में 10, नागौर में 11, टोंक में 6 तथा अजमेर जिले में 7 स्कूल बनेंगे।
अजमेर जिले के मसूदा में स्कूल के लिए 10 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया है। सार्वजनिक निर्माण विभाग ने मॉडल स्कूल के निर्माण के लिए निविदाएं आमंत्रित की हैं। अजमेर जिले में मसूदा के अलावा अरांई, भिनाय, केकड़ी, किशनगढ़, पीसांगन तथा श्रीनगर पंचायत समिति क्षेत्र में मॉडल स्कूल बनाए जाएंगे।
नागौर जिले के मेड़ता के गांव इन्द्रावड़ में 15.07 एकड़ में स्कूल बनाए जाने के लिए जमीन मिल गई है। यहां जल्द ही स्कूल भवन निर्माण शुरू होगा। इसके अलावा नागौर, परबतसर व रियां में स्कूल के लिए मंजूरी जारी हो चुकी है। मूड़वा में स्वीकृति शेष है।
टोंक जिले में टोडाराय सिंह व टोंक में मॉडल स्कूल के स्वीकृति मिल गई है जबकि उनियारा, निवाई, मालपुरा तथा देवली के लिए स्वीकृति नहीं मिली है। भीलवाड़ा जिले में तहसील सुवाना को छोड़कर शोपुरा गांव, लाम्बिया कलां, हुरडा, जहाजपुर, असोप, बगरू, श्यामपुरा, जगपुरा, पोटलांन, शाहपुरा में स्कूल के स्वीकृति मिल चुकी है(राजस्थान पत्रिका,अजमेर,8.8.11)।

यूपीःकृषि और विज्ञान के छात्रों के लिए बीएड में दाखिले का कल आखिरी मौका

Posted: 08 Aug 2011 09:14 AM PDT

महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखंड विश्वविद्यालय,बरेली में कला और वाणिज्य वर्ग के छात्रों की बीएड काउंसिलिंग खत्म हो चुकी है और विश्वविद्यालय की सूचना के अनुसार,स्व-वित्तपोषित कॉलेजों तक में सीटें भर गई है। विश्वविद्यालय ने केवल कृषि और विज्ञान वर्ग के छात्रों के लिए 8 और 9 अगस्त,2011 को काउंसिलिंग विस्तारित की थी। लिहाजा,कल दाखिले का आखिरी दिन होगा। विश्वविद्यालय की विज्ञप्ति यहां है

यूपीःअगले सत्र से नए बीपीएड व बीएड कालेजों पर रोक

Posted: 08 Aug 2011 03:32 AM PDT

प्रदेश में अगले शिक्षा सत्र यानी 2012-13 से किसी नए कॉलेज को बीपीएड (बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन) और बीएड (बैचलर ऑफ एजुकेशन) पाठय़क्रम चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रदेश सरकार से विचार विमर्श के बाद राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने यह फैसला लिया है। एनसीटीई के इस फैसले से उन युवाओं के सपनों को झटका लगा है जो प्रदेश में ही बीपीएड करना चाहते हैं। पूरे देश में कुकुरमुत्तों की तरह उग रहे बीपीएड (शारीरिक शिक्षा स्नातक) और बीएड संस्थानों पर लगाम लगाने के लिए यह फैसला लिया गया है। एनसीटीई ने सार्वजनिक नोटिस जारी देश के 15 राज्यों में विभिन्न अध्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर पाबंदी लगा दी है। हालांकि अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों के मामले में ये प्रतिबंध लागू नहीं होंगे। एनसीटीई ने साफ किया है कि शैक्षिक सत्र 2012-13 के लिए उत्तराखंड में बीएड व बीपीएड चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। बता दें 26 मई को मुख्य सचिव सुभाष कुमार की अध्यक्षता में हुई उच्च शिक्षा विभाग की बैठक में फैसला लिया गया था कि प्रदेश सरकार प्रशिक्षित बीएड बेरोजगारों की बढ़ती भीड़ पर लगाम लगाने के लिए नेशनल टीचर्स ट्रेनिंग कौंसिल (एनटीसीई) से अनुरोध करेगी कि वह प्रदेश में नए बीएड कॉलेज खोलने की अनुमति न दे। प्रदेश में फिलवक्त करीब 95 बीएड कॉलेज हैं, जिनमें 9700 सीटें हैं। जबकि प्रदेश में इसके विपरीत हर साल केवल ढाई से तीन हजार रोजगार पैदा हो पाते हैं। सीटों और पदों की संख्या में यह भारी अंतर प्रदेश सरकार के लिए समस्या खड़ी कर रहा है। नतीजा यह हो रहा है कि प्रदेश सरकार को साल भर बीएड प्रशिक्षतों के आंदोलन का सामना करना पड़ता है। इतना ही नहीं प्रदेश सरकार के पास 6500 सीटों के आवेदन लंबित हैं। लगातार खुल रहे बीएड कॉलेजों के कारण प्रदेश में प्रशिक्षित बीएड बेरोजगारोंकी संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। एनसीटीई ने आंध्र प्रदेश में बीएड (हिंदी पंडित ट्रेनिंग), दमन व दीव में डीएलईएड(पीटीसी), गुजरात में डीएलईएड, बीएड, हरियाणा में डीएलईएड, बीएड, डीपीएड, बीपीएड, हिमाचल में डीएलईएड, बीएड, कर्नाटक में डीएलईएड बीएड, बीपीएड, केरल में डीएलईएड, बीएड, बीपीएड, मध्य प्रदेश में बीएड, बीपीएड, महाराष्ट्र में डीएलईएड, बीएड, एमएड, बीपीएड, पुड्डचेरी में डीएलईएड, बीएड, बीपीएड, पंजाब में बीएड, बीपीएड, राजस्थान में डीएलईएड, बीएड, शिक्षा शास्त्री, एमएड, तमिलनाडु में डीएलईएड, बीएड, एमएड. लैंग्युएज पंडित कोर्स और उत्तर प्रदेश में बीएड और बीपीएड पाठयक्रम चलाने पर रोक लगाने का फैसला किया है(राष्ट्रीय सहारा,देहरादन,8.8.11)।

यूपीःचुनाव नज़दीक देख कर्मचारियों को लुभाने की तैयारी

Posted: 08 Aug 2011 01:54 AM PDT

सूबे का मौसम चुनावी होने लगा है। उसी मौसम का असर है कि सरकार अपने कर्मचारियों के प्रति खास मेहरबान होती जा रही है। सरकार ने उनकी तमाम मांगों को पूरा किया है, जो मांगें लंबित हैं तो उन पर भी सरकार विनम्र ही नजर आ रही है। सूबे के 15 लाख से अधिक कर्मचारियों को सरकार संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (पीजीआइ) में नि:शुल्क उपचार की सुविधा देने जा रही है। इसके लिए जल्द ही पांच करोड़ रु. के रिवाल्विंग फंड का गठन कर अनुपूरक बजट से व्यवस्था की जा जाएगी। महज संयोग नहीं ये घोषणाएं : यह संयोग ही नहीं है कि जुलाई में कर्मचारियों को इन्क्रीमेंट मिला तो अगस्त में उनके वेतन में छह प्रतिशत डीए भी जुड़ रहा है। चीनी निगम और पर्यटन निगम के कर्मचारियों को छठा वेतनमान देने के प्रस्तावों को भी मंजूरी दे दी गयी है। तीन दिन पहले ही सरकार ने राज्यकर्मियों की चिकित्सा प्रतिपूर्ति में आने वाली बाधाओं को भी समाप्त कर दिया है। इतना ही नहीं अनुकंपा निधि की धनराशि तक बढ़ा दी गई है। कई विभागों की वेतन विसंगतियां भी दूर की गईं। सचिवालय कर्मियों जैसी सुविधा : पीजीआइ में उपचार की सुविधा अभी तक सचिवालय कर्मियों को ही मिला करती थी। योजना यह है कि राज्यकर्मी भी इससे लाभान्वित किए जाएं। चिकित्सा विभाग ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है। कर्मचारियों को पीजीआइ में उपचार के लिए भुगतान नहीं करना होगा। उन्हें शल्य क्रिया, डायलिसिस, वेंटीलेटर, कक्ष का किराया, सभी तरह की जांच और औषधियां हासिल होंगी। इलाज के लिए किसी तरह का रेफरेंस देने की जरूरत उन्हें नहीं होगी। जल्द बनेगी नियमावली : सूत्रों के अनुसार रिवाल्विंग फंड के लिए जल्द ही नियमावली बनकर तैयार हो जाएगी। इस नियमावली पर वित्त, न्याय और चिकित्सा विभाग का परामर्श लेते हुए मंत्रिपरिषद का अनुमोदन लिया जाएगा। राज्यकर्मियों को उपचार की सुविधा देने के लिए पीजीआइ और चिकित्सा विभाग के मध्य एक करार होगा। कर्मचारियों को पीजीआइ में रजिस्ट्रेशन कराकर इलाज के लिए अपने विभाग से एक प्राधिकार पत्र प्राप्त करना होगा। व्यवस्था उसी तरह की होगी जैसी कि सचिवालयकर्मियों के लिए है। अन्य मांगों पर टिकी निगाहें : कर्मचारी संघों के पदाधिकारी भी जानते हैं कि इस तरह का चुनावी अवसर जल्द नहीं आता, इसलिए वे अपनी अन्य मांगों को पूरा करने के लिए भी सरकार पर दबाव बनाए हुए हैं। इनमें मुख्य रूप से केंद्रीय कर्मियों की भांति भवन किराया, परिवहन भत्ता, शिशु शिक्षा भत्ता की है(हरिशंकर मिश्र,दैनिक जागरण,लखनऊ,8.8.11)।

लखनऊःस्कूलों के टाइमटेबल में भोजन का पीरियड ही नहीं

Posted: 07 Aug 2011 09:47 PM PDT

गैर सरकारी संगठनों की सहूलियत की परवाह कर रहे शिक्षा अधिकारियों ने माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को मुश्किल में डाल दिया है। तुगलकी फरमान सुनाते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय ने 500 से अधिक छात्र संख्या वाले विद्यालयों में ही भोजन पकाने और बंटवाने का निर्देश जारी किया है। कई स्कूलों में भोजन करने योग्य छात्रों की संख्या हजारों में है। वहां इतने बड़े पैमाने पर रोज खाना बनवाने की न जगह है न संसाधन। विभाग और स्कूलों के बीच की इस रस्साकसी में बच्चे स्कूल से भूखे लौट रहे हैं। राजधानी में माध्यमिक विद्यालयों के बच्चों को स्कूल परिसर के भीतर ही जो भोजन पहली जुलाई से मिलना शुरू हो जाना चाहिए था, अगस्त का पहला हफ्ता बीतने के बाद भी उसका पता नहीं है। जिला विद्यालय निरीक्षक 12 अगस्त के बाद से भोजन मिलने की बात कह रहे हैं लेकिन स्कूलों में यह तय नहीं है कि यह भोजन कैसे बनेगा और बच्चों तक कैसे पहुंचाया जाएगा। बीते सत्र तक प्राथमिक व उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में बच्चों को मध्याह्न भोजन मिलता था। इस सत्र से माध्यमिक विद्यालयों में भी कक्षा छह से आठ तक के बच्चों को भोजन दिया जाना है। अधिकारियों ने इसका दायित्व भी उन्हीं 11 स्वयंसेवी संस्थाओं को सौंप दिया, जिनके पास प्राथमिक व उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में भोजन पहुंचाने का जिम्मा था। पहले यह संस्थाएं करीब 42 हजार बच्चों तक भोजन पहुंचाती थीं। माध्यमिक विद्यालय जुड़ने के बाद उन पर 37 हजार से अधिक अतिरिक्त बच्चों की जिम्मेदारी आई तो संस्थाओं ने हाथ खड़े कर दिए। इस पर अधिकारियों ने उनकी सुविधा देखते हुए 500 से अधिक छात्र संख्या वाले विद्यालयों में ही भोजन पकाने व बंटवाने का फरमान जारी कर दिया(दैनिक जागरण,लखनऊ,8.8.11)।

लखनऊःपरिषदीय विद्यालयों में अब भी खाली बच्चों का बैग

Posted: 07 Aug 2011 09:45 PM PDT

शैक्षिक सत्र प्रारंभ हुए एक माह से भी अधिक का समय बीत चुका है लेकिन परिषदीय विद्यालयों में बच्चों का बस्ता अब तक खाली है। विभाग की लेटलतीफी के कारण पहले ही पिछड़ चुकी नि:शुल्क पुस्तक वितरण योजना अब और अधिक देर का शिकार हो रही है। 31 जुलाई तक बच्चों के हाथों में अधिकांश किताबें उपलब्ध कराने का दावा करने वाला बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग अब तक विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों की पुस्तकें विद्यालयों तक नहीं पहुंचा सके हैं। सर्वशिक्षा अभियान के तहत कक्षा एक से कक्षा आठ तक सभी बच्चों को नि:शुल्क पुस्तक उपलब्ध कराने की योजना है। बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों के साथ माध्यमिक शिक्षा के तहत संचालित होने वाले कक्षा छह से कक्षा आठ तक के स्कूल भी इस योजना में शामिल हैं। इस वर्ष नि:शुल्क पुस्तक वितरण करने की योजना शुरूआत से ही लड़खड़ा गई थी। टेंडर और छपाई की प्रक्रिया अपने नियत समय से करीब डेढ़ माह बाद शुरू हो सकी। बेसिक शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने तीन चरणों में पुस्तकों के वितरण की बात कही थी। दस जुलाई तक हिंदी की कलरव और गणित की गिनतारा पुस्तक की वितरण की बात कही गई थी। विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की किताबों का वितरण 31 जुलाई तक हो जानी थीं। वहीं दस अगस्त तक सभी किताबों बच्चों के हाथों में होने की बात कही गई है। पुस्तक वितरण के दो चरण बीत चुके हैं लेकिन बच्चों के हाथों में हिंदी, गणित और कुछ अन्य पुस्तकें ही पहुंच सकी हैं। तीसरे चरण की किताबें अब तक विभाग को नहीं मिली हैं। पुस्तकें प्राप्त होने के बाद उनके सत्यापन के लिए तीन दिन निर्धारित हैं। ऐसे में दस अगस्त तक सभी पुस्तकें बच्चों के पास होंगी, इसकी संभावना कम ही लगती है। ब्लॉक स्तर पर पुस्तक वितरण की योजना तो और भी लचर है(दैनिक जागरण,लखनऊ,8.8.11)।

लखनऊ विविःफीस वृद्धि ने निगले नवीकरणीय ऊर्जा और बायोस्टैटिक्स कोर्स

Posted: 07 Aug 2011 09:43 PM PDT

जिस कोर्स के लिए भारत सरकार के अक्षय ऊर्जा मंत्रालय ने लखनऊ विश्र्वविद्यालय को लाखों रुपये की सहायता राशि दी, वह स्थगित हो गया। रविवार को हुई काउंसिलिंग में एमएससी रिन्यूवल एनर्जी में चालीस फीसदी से कम अभ्यर्थी प्रवेश लेने पहुंचे, लिहाजा इसे स्थगित करने का फैसला लिया गया। कोर्स की समन्वयक डॉ.ऊषा वाजपेयी फीस वृद्धि को अभ्यर्थियों की बेरूखी की वजह बता रही हैं। उनका कहना है प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही उन्होंने फीस के चलते कोर्स स्थगित होने की आशंका जता दी थी लेकिन इस तरफ ध्यान नहीं दिया गया। स्थगित होने वाला दूसरा कोर्स एमएससी बायोस्टेस्टिक्स है। फीस वृद्धि के चलते कोर्सो के बंद होने का सिलसिला जारी है। एमससी रिन्यूवल एनर्जी और बायो स्टेटिस्टिक्स को भी न्यूनतम चालीस फीसदी अभ्यर्थी नहीं मिले। रिन्यूवल एनर्जी की संयोजक डॉ.उषा वाजपेयी ने बताया कि पिछले सत्र में पच्चीस सीटों के लिए 58 आवेदन आए थे जिनमें से 20 अभ्यर्थियों ने दाखिला लिया था। इससे उत्साहित होकर अक्षय ऊर्जा मंत्रालय ने लविवि को अपनी भविष्य की योजना के लिए चुना। इस कोर्स के विकास और संवर्धन के लिए बीते 31 मार्च को मंत्रालय की तरफ से पचास लाख की ग्रांट दी गई लेकिन इस वर्ष तस्वीर बदल गई। इस सत्र में फीस तीस हजार प्रति सेमेस्टर कर दिया गया। इसका बुरा असर कोर्स के लिए आने वाले आवेदनों पर पड़ा। ऐसे में कोर्स स्थगित होने से विभाग और मंत्रालय की योजनाओं को गहरा धक्का लगा है। अगर फीस कम रखी जाती तो नए प्रोजेक्ट भी मिलते और कोर्स भी चलता रहता। अब इस ग्रांट के इस्तेमाल को लेकर संशय बना हुआ है। उधर रविवार को हुई काउंसिलिंग में मानवशास्त्र की 10, एमए सांख्यिकी की 3, एमएससी की 1 और एमए गणित की 5 सीटें खाली रह गई(दैनिक जागरण,लखनऊ,8.8.11)।

इग्नू एसएमएस से करेगा हर शंका का समाधान

Posted: 07 Aug 2011 09:39 PM PDT

इग्नू अब मोबाइल के जरिये अपने स्टूडेंट्स से जुड़ने जा रहा है। इसके करीब 35 लाख छात्र-छात्राएं एसएमएस से अपनी शंकाओं का निवारण कर सकेंगे। बात चाहे फीस की हो, परीक्षा की हो या फिर आवेदन की अंतिम तिथि की, बस मोबाइल उठाएं और अपना सवाल टाइप कर 9223051616 पर भेज दें, आपको जवाब मिल जाएगा।

इग्नू के स्कूल ऑफ कंप्यूटर एंड इंफॉर्मेशन साइंसेस के अस्सिटेंट प्रोफेसर और एसएमएस अलर्ट सर्विसेस के कन्वीनर पीवी सुरेश ने बताया कि ईमेल व पोस्टल सर्विसेज को लेकर अक्सर देरी होती है, जिसके चलते छात्रों को जानकारियां समय पर नहीं मिल पातीं। इसलिए एमएमएस की सुविधा का सहारा लिया गया है।


पीवी सुरेश ने बताया कि इग्नू 40 देशों में अपने ढेरों प्रोग्राम उपलब्ध करा रहा है। छात्रों का आंकड़ा करीब 35 लाख तक पहुंच चुका है। ऐसे में छात्रों के लिए 18 नवंबर 2008 में शुरू की गई एसएमएस अलर्ट सुविधा को विस्तार दिया जा रहा है। 

इस सुविधा के तहत अब तक करीब 1 करोड़ एसएमएस जारी हो चुके हैं। इस सुविधा के दूसरे चरण में एसएमएस की संख्या और बढ़ जाएगी है। विश्वविद्यालय की कोशिश है कि एसएमएस का जवाब 24 से 48 घंटों के भीतर मुहैया करा दिया जाए(दैनिक भास्कर,दिल्ली,8.8.11)।

छत्तीसगढ़ पीईटी काउंसिलिंग: जारी है ऑनलाइन अलॉटमेंट

Posted: 07 Aug 2011 09:37 PM PDT

राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों की बची हुई सीटों के लिए काउंसिलिंग प्रक्रिया चल रही है। शनिवार से शुरू हुए ऑनलाइन काउंसिलिंग के दूसरे चरण में अब तक लगभग 2500 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन अलॉटमेंट कराए हैं।

जिन छात्रों ने प्रवेश प्रक्रिया के पहले चरण में किसी न किसी कॉलेज में प्रवेश सुनिश्चित करा लिया है, वह भी अपनी सीट सरेंडर करके दूसरे दौर की काउंसिलिंग प्रक्रिया में हिस्सा ले सकते हैं।

उधर, राज्य के 10 फॉर्मेसी कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया सोमवार से शुरू हो जाएगी। शनिवार को जारी हुई आवंटन लिस्ट में 810 सीटों में से 500 सीटों का आवंटन हो गया था। पहले दौर की प्रवेश प्रक्रिया 12 अगस्त तक चलेगी(दैनिक भास्कर,रायपुर,8.8.11)।

पंजाब यूनिवर्सिटीः80 टीचरों की लापरवाही से लेट हुए रिजल्ट

Posted: 07 Aug 2011 08:45 PM PDT

पंजाब यूनिवर्सिटी के पोस्ट ग्रेजुएट कोर्सेज के रिजल्ट अपने ही टीचरों की लापरवाही से लेट हुए हैं। इन टीचरों ने समय से पेपर चेक करके एग्जामिनेशन ब्रांच को नहीं भेजे। रिजल्ट में देरी की शिकायतें मिलने के बाद वीसी ऑफिस ने एग्जामिनेशन ब्रांच से जवाब मांगा।

एग्जामिनेशन ब्रांच ने जांच में पाया कि यूनिवर्सिटी में इस बार 80 टीचरों ने तय अवधि में पेपर चेक ना करके स्टूडेंट्स के अवॉर्डस ही नहीं भेजे। यही वजह है कि अभी भी पीयू के कई पोस्ट ग्रेजुएट कोर्सेज के रिजल्ट घोषित नहीं हुए हैं। पीयू प्रशासन ने अब अगले साल से समय पर रिजल्ट निकालने के लिए तीन सूत्रीय फॉर्मूला तैयार किया है।

इस बार अगस्त तक नहीं निकले हैं रिजल्ट

पंजाब यूनिवर्सिटी के कई पोस्ट ग्रेजुएट कोर्सेज के रिजल्ट अभी तक नहीं निकले हैं। इस वजह से जहां बहुत से स्टूडेंट्स कई कोर्सेज में दाखिला नहीं ले पाए, तो कुछ कोर्सेज में क्लासेज बिना रिजल्ट निकले ही शुरू करनी पड़ीं। लॉ डिपार्टमेंट में पिछले दिनों स्टूडेंट्स को रिजल्ट न निकलने के विरोद में प्रदर्शन करना पड़ा। इसी तरह साइकोलॉजी डिपार्टमेंट में डिप्लोमा कोर्स में दाखिले के लिए होने वाले इंटरव्यू से एक रोज पहले रिजल्ट निकला, जिस वजह से यहां भी कई स्टूडेंट्स इंटरव्यू नहीं दे पाए। ऐसे तमाम विवादों के बाद वीसी ऑफिस को शिकायत की गई।


जवाब मांगा तो सामने आई लापरवाही

पीयू के वीसी ऑफिस ने स्टूडेंट्स की ओर से रिजल्ट में देरी की शिकायतें मिलने के बाद एग्जामिनेशन ब्रांच से जवाब मांगा। इस जवाब में टीचरों द्वारा समय पर पेपर चेक ना करके स्टूडेंट्स के अवॉर्डस न भेजे जाने की लापरवाही सामने आई। एग्जामिनेशन ब्रांच के जवाब में कहा गया कि करीबन 80 टीचरों ने समय से पेपर चेक करके नहीं दिए। फिर एक साथ कई कोर्सेज के पेपर चेक होकर आए तो एग्जामिनेशन ब्रांच में रिजल्ट तैयार करने का बोझ बढ़ गया। इस वजह से रिजल्ट तैयार होने में देरी हो रही है। 

अब तैयार किया तीन सूत्रीय फॉर्मूला

पीयू प्रशासन ने अब रिजल्ट समय पर निकालने के तीन सूत्रीय फॉर्मूला तैयार किया है। इस फॉर्मूले के तहत सबसे पहले तो टीचरों को अलग-अलग डेडलाइन में पेपर चेक करके देने होंगे, ताकि एक साथ पेपर आने पर एग्जामिनेशन ब्रांच पर रिजल्ट तैयार करने का बोझ न पड़े। इसके बाद अब वही टीचर पेपर चेक करेंगे जो स्टूडेंट्स को वह सब्जेक्ट पढ़ा रहे हैं। 

इसके बाद स्टूडेंट्स को पेपर देखने की छूट होगी। अभी कुछ ही कोर्सेज में स्टूडेंट्स को पेपर देखने की छूट थी। लेकिन अब सब कोर्सेज में स्टूडेंट्स पेपर देख सकेंगे। इसी तरह एग्जामिनेशन ब्रांच में और स्टाफ नियुक्त होगा ताकि रिजल्ट तैयार करने का काम समय पर पूरा हो सके(अधीर रोहाल,दैनिक भास्कर,चंडीगढ़,8.8.11)।

हिमाचप्रदेश यूनिवर्सिटीःखाली रह गई बीएड की हजारों सीटें

Posted: 07 Aug 2011 08:34 PM PDT

एचपी यूनिवर्सिटी की ओर से बीएड दाखिले के लिए बनाए गए नियम छात्रों के लिए मुसीबत बन गए हैं। आयु सीमा लगने से सैकडों छात्रों को दूसरे राज्यों का पलायन करना पड़ रहा है। इससे जहां एक ओर बीएड कॉलेजों में हर साल हजारों सीटें खाली रह रही हैं वहीं, यूनिवर्सिटी प्रशासन और निजी बीएड कॉलेजों को भी लाखों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस साल भी बीएड की 4000 सीटें खाली पड़ी हैं। प्रशासन न तो दाखिले की तिथि बढ़ा रहा है और न ही इन सीटों को भरने के लिए कोई प्रयास कर रहा है।


सब्जेक्ट कंबिनेशन भी छात्रों के लिए परेशानी खड़ी कर रहा है। ग्रेजुएशन में संस्कृत, हिंदी व संगीत पढ़ने वाले छात्र बीएड की योग्यता को पूरा नहीं करते। संस्कृत, अंग्रेजी और हिंदी पढ़ने वाले छात्र भी भी बीएड में दाखिला नहीं ले सकते। सब्जेक्ट कंबिनेशन के चलते भी दर्जनों छात्र बीएड में एडमिशन नहीं ले पा रहे हैं। उधर, हिमाचल प्रदेश बीएड कालेज संघ इस बारे में जल्द ही कुलपति से मिलने जा रहा है। संघ के महासचिव वेद शर्मा का कहना है कि खाली सीटों को भरने के लिए एडमिशन की तिथि बढ़ाई जानी चाहिए। साथ ही एडमिशन की विभिन्न शर्तो पर भी फिर विचार करना चाहिए।

यूनिवर्सिटी की ओर से दाखिले के लिए निर्धारित की गई आयुसीमा सैकडों छात्रों को बीएड से वंचित रख रही है। दूसरे राज्यों के कॉलेजों में आयुसीमा की कोई शर्त नहीं है।बीएड करने के लिए सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए 26 वर्ष और छात्राओं के लिए 28 वर्ष आयुसीमा निर्धारित है। एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग से संबंध रखने वाले छात्रों के लिए 29 वर्ष आयुसीमा हैं। ऐसे में जिन छात्रों की आयु इससे अधिक हैं उन्हें दूसरे राज्यों में जाकर बीएड करनी पड़ रही है(अशोक चौहान,दैनिक भास्कर,शिमला,8.8.11)।

स्टेट बैंक ने पूछाःआखिर बैंकिंग ही क्यों?

Posted: 07 Aug 2011 08:31 PM PDT

.भारतीय स्टेट बैंक से जुड़े पांच अलग-अलग बैंकों के पीओ पद के लिए हुई परीक्षा में छात्रों से पूछा गया कि क्या कारण है कि वह बैकिंग सेवा में ही नौकरी करना चाहते हैं? परीक्षा में सब्जेक्टिव और ऑब्जेक्टिव दोनों तरह के प्रश्न पूछे गए।

सुबह 10 से दोपहर एक बजे तक हुई इस परीक्षा में छात्रों का जनरल नॉलेज, अंग्रेजी, कंप्यूटर, रीजनिंग की क्षमता परखने के साथ यह भी देखा गया कि बैंक पीओ बनने की इच्छा रखने वाले छात्र को बैंकिंग सेवा के बारे में कितना ज्ञान है। जिस क्षेत्र में वह अपना कॅरियर बनाना चाह रहे हैं, उसके बारे में वे कितना जानते हैं। 


अप्लाई करने वाले छात्रों में से लगभग 85 फीसदी इस परीक्षा में शामिल हुए। 

इन बैंकों में भरे जाने हैं पद

स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद 1416

स्टेट बैंक ऑफ पटियाला 1328

स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर 1000

स्टेट बैंक ऑफ मैसूर 843

स्टेट बैंक ऑफ त्रावनकोर 400

कुल पदों की संख्या 4987

दो पैटर्न में हुई परीक्षा 

बैंक पीओ की यह परीक्षा दो चरणों में हुई। सुबह 10 से 12 बजे तक अलग-अलग विषयों के 200 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे गए। इसमें से अंग्रेजी, डाटा इंटरप्रेटेशन, रीजनिंग और जनरल नॉलेज और कंप्यूटर से जुड़े प्रश्न पूछे गए। प्रश्न का गलत उत्तर देने पर 0.25 अंक कटने की व्यवस्था थी। 10 मिनट के अंतराल के बाद सब्जेक्टिव परीक्षा हुई। छात्रों को एक घंटे में पांच में से तीन प्रश्नों के उत्तर देने थे। 

सब्जेक्टिव प्रश्नों के माध्यम से छात्र की इस परीक्षा को लेकर मनोवृत्ति परखी गई। उनसे प्रश्न पूछा गया कि वह अपने भाई को पत्र लिखकर बताएं कि वह बैंकिंग सेवा में क्यों आना चाहते हैं? बैंक कोचिंग के एक्सपर्ट श्याम वर्मा कहते हैं कि इस तरह के प्रश्नों का समावेश अब परीक्षाओं में शुरू हो चुका है। 

बैंक यह जानना चाहते हैं कि परीक्षा में बैठने वाले छात्र को बैंकिंग सेवा के बारे में कितना और किस प्रकार का ज्ञान है। छात्रों से यह भी पूछा गया कि वह बैंक प्रबंधक को एक पत्र लिखकर कन्विन्स करें कि वह उसके लिए एजुकेशन लोन की स्वीकृति कर दें। एजुकेशन के अलावा उनसे होम लोन के लिए भी अपील वाला पत्र लिखने के लिए कहा गया(दैनिक भास्कर,रायपुर,8.8.11)।

राजस्थानःकैंसर का मरीज़ है दसवीं का टॉपर

Posted: 07 Aug 2011 08:27 PM PDT

कैंसर बीमारी से जूझते हुए राजस्थान के चूरू के छात्र शक्ति सिंह ने दसवीं क्लास में टॉप कर दिखाया है। वह भी ऐसे में जब उसके पिता भी घर से दूर चीन की सीमा पर तैनात थे। वे भारत-तिब्बत सीमा पुलिस में कांस्टेबल हैं।

कठिनाइयों के बावजूद नहीं हारी हिम्मत


शक्ति को पिछले साल हड्डियों के कैंसर का पता चला जब वह दसवीं कक्षा की पढ़ाई कर रहा था। इसके बाद शुरू हुआ पढ़ाई के साथ ही कीमोथेरेपी के लिए नियमित तौर पर चूरू से दिल्ली एम्स में इलाज के लिए आने का सिलसिला। पिता के बाहर होने के कारण वह अपनी मां और छोटी बहन के साथ दिल्ली आता था। लेकिन बीमारी और विषमताओं के बावजूद उसने हिम्मत नहीं छोड़ी। क्लास में वह 88 प्रतिशत अंक के साथ अव्वल रहा। अगले माह शक्ति का ऑपरेशन होगा जिसमें उसके पांव से कैंसर प्रभावित हिस्सों को हटाया जाएगा।

आगे रहने की राह चुनी

पंद्रह वर्षीय शक्ति सिंह को रविवार को यहां भारत तिब्बत सीमा पुलिस संगठन के कार्यक्रम में इस उपलब्धि के लिए सम्मानित किया गया। इस मौके पर शक्ति ने कहा, 'मैंने और परिवार ने कुछ समय के लिए कैंसर की परेशानियों के बारे में सोचा। लेकिन फिर मैंने आगे चलते रहने की राह चुनी।
, हालांकि हो सकता है मेरे लिए बहुत आगे के लिए कुछ नहीं हो।' संगठन ने शक्ति की बीमारी और इलाज की जरूरत को देखते हुए उसके पिता महेंद्र सिंह राठौर को हिमाचल प्रदेश में चीन सीमा से हटाकर अब राजधानी में तैनात कर दिया है(दैनिक भास्कर,दिल्ली-सीकर,8.8.11)।

भोपाल में आईटी पार्क से जगी 74 हजार नई नौकरियों की उम्मीद

Posted: 07 Aug 2011 08:24 PM PDT

पांच साल बाद राजधानी में एक बार फिर आईटी पार्क के विकसित होने की उम्मीद जगी है। हाल ही में न्यूयॉर्क की एक कंपनी को आईटी (सूचना प्रौद्योगिकी) इंडस्ट्री लगाने के लिए प्रदेश सरकार ने एयरपोर्ट के नजदीक स्थित बड़वई में 25 एकड़ जमीन आवंटित की है। साथ ही यहां प्रदेश सरकार ने एक अन्य प्रस्ताव के तहत इतनी ही जमीन को और विकसित करने की कोशिशें भी शुरू कर दी हैं। यदि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो आईटी पार्क के वजूद में आने के बाद यहां करीब 74 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा।


आईटी पार्क को मप्र स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉपरेरेशन (एसईडीसी) विकसित करेगा। इसके तहत एसईडीसी ने बड़वई में आईटी पार्क के लिए आरक्षित 212 एकड़ जमीन में से न्यूयॉर्क की अंडरहिल टेक्नोलॉजी कंपनी को 25 एकड़ जमीन आवंटित की है। कंपनी इस जमीन पर 50 से 100 करोड़ रुपए का निवेश कर 15 एकड़ जमीन पर आईटी इंडस्ट्री व 10 एकड़ जमीन सहायक उद्योग और खुद के उपयोग के लिए रखेगी। इसके अलावा एसईडीसी ने आईटी पार्क में ही 25 एकड़ अतिरिक्त जमीन के भी विकास का प्रस्ताव तैयार किया है। एंपावर्ड कमेटी से मंजूरी के बाद एसईडीसी इसके लिए टेंडर जारी करेगी। 

कैसे आएंगी इतनी नौकरियां
आईटी नीति 2006 में प्रावधान है कि यदि कोई कंपनी सरकार से जमीन चाहती है, तो उसे प्रति एकड़ 350 लोगों को रोजगार देना होगा। इस तरह कंपनियों को राजधानी में कुल 212 एकड़ जमीन पर 74,200 रोजगार सृजित करने होंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक इसमें से करीब 60 फीसदी यानी 44,520 रोजगार अकेले आईटी प्रोफेशनल्स के लिए होंगे। 

इसे पीपीपी मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा, जिसमें संबंधित कंपनी 3 लाख वर्ग फीट क्षेत्र पर आईटी पार्क विकसित करेगी। इस तरह अगले तीन साल में न्यूयॉर्क की कंपनी को दी गई 25 एकड़ जमीन को मिलाकर कुल 50 एकड़ जमीन पर आईटी पार्क डेवलप होगा, जबकि अगले पांच सालों में आईटी पार्क को विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

अब तक ये हुआ 
वर्ष 2006 में पार्क के लिए जमीन आरक्षित की गई। इसमें से 50 एकड़ जमीन पर अब तक सिर्फ जेनपैक्ट ने ही आईटी इंडस्ट्री लगाने की पहल की। सरकार ने कंपनी को जमीन भी आवंटित कर दी थी, लेकिन कंपनी ने ऐन मौके पर यहां निवेश से इनकार कर दिया। इसी तरह तीन साल पहले यूनिटेक ने 60 करोड़ रुपए से पार्क की पूरी जमीन को विकसित करने के लिए सरकार से करार किया था। 

इसके लिए 5 करोड़ रुपए बतौर बैंक गारंटी जमा किए गए थे, लेकिन कंपनी बगैर कोई विकास कार्य किए वापस चली गई। जबकि आम्रपाली आईटी कंपनी, एग्रो वेब ऑनलाइन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) पर हस्ताक्षर करने के बाद से आगे कोई कार्रवाई ही नहीं की है। यही स्थिति इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर की भी है।

सामने होंगी ये चुनौतियां 
- नौकरशाही की कार्यप्रणाली से त्रस्त होकर कंपनियां प्रोजेक्ट से अपना हाथ खींच सकती हैं। 
- एक एकड़ में 350 लोगों को रोजगार देने की शर्त से छोटी कंपनियां हिचकिचा सकती हैं।
- मप्र में स्किल्ड मैन पॉवर की कमी।
- राजधानी में अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास न होना(कुलदीप सिंगोरिया,दैनिक भास्कर,भोपाल,8.8.11)।

डीयू में मदिरापान के खिलाफ अभियान आज से

Posted: 07 Aug 2011 08:11 PM PDT

दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में मदिरापान पर अंकुश लगाने के लिए दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर विश्वविद्यालय प्रशासन विशेष अभियान चलाने जा रहा है। सोमवार से शुरू हो रहे इस अभियान के तहत हॉस्टल, कॉलेज व विश्वविद्यालयों की पार्किग, रिज क्षेत्र, आर्ट्स व लॉ फैकल्टी पर खास नजर रहेगी।

विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से उठाए जा रहे इस कदम का मूल उद्देश्य कैम्पस को मद्यपान फ्री बनाना और छात्रसंघ चुनावों के दौरान वोट के लिए चलने वाली दारू पार्टी पर रोक लगाना है।

विश्वविद्यालय की ओर से जारी छात्रसंघ चुनाव कार्यक्रम के तहत आगामी 9 सितम्बर को मतदान होने जा रहा है। इससे पहले पूरे महीने तमाम छात्र नेताओं की ओर से अपने पक्ष में समर्थन जुटाने के लिए अक्सर प्रचार अभियान के साथ-साथ देर रात तक दारू पार्टी का आयोजन किया जाता है। इस पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से इस बार विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर कार्यालय ने पहले से ही कमर कस ली है।

डिप्टी प्रॉक्टर डॉ. मनोज अरोड़ा ने बताया कि पहली बार दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर हमारी टीमें इस तरह का औचक निरीक्षण करने जा रही हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस अधिकारियों के साथ बीते दिनों हुई एक बैठक में इस बाबत फैसला लिया गया था।


डॉ अरोड़ा ने बताया कि पुलिस के साथ मिलकर डीयू के सुरक्षाकर्मी किसी भी समय में कैम्पस का दौरा कर सकते है। 

इस दौरान हमारी नजर कैम्पस की विभिन्न पार्किगों पर खासतौर पर रहने जा रही है क्योंकि ज्यादातर पार्टीबाजी इन्हीं जगहों पर चलती है। इसके अलावा आर्ट्स फैकल्टी, लॉ फैकल्टी, निरुलाज, एसओएल के आसपास, रिज एरिया से जुड़ी कैम्पस की सड़कों पर भी नजर रहेगी। 

कार्रवाई के विषय में पूछे जाने पर डॉ.अरोड़ा ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति चाहे वह डीयू का छात्र हो या फिर बाहरी शराब पीता पकड़ा गया तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने का कहा कि विद्यार्थियों और बाहरियों को उनकी सलाह है कि वह ऐसी हरकत कैम्पस में अंजाम न दें वर्ना उनके साथ होने वाली कार्रवाई के लिए वे खुद जिम्मेदार होंगे(शैलेन्द्र सिंह,दैनिक भास्कर,दिल्ली,8.8.11)।

हिमाचलःसरकार के दायरे में नहीं अनुबंध कर्मचारी

Posted: 07 Aug 2011 08:09 PM PDT

अनुबंध पर काम करने वाले समझ लें कि वह सरकार के कर्मचारी नहीं हैं। ऐसे में सवाल खड़ा हो गया है कि प्रशासनिक जिम्मेदारी का काम गैर सरकारी कर्मचारी किस तरह से कर रहे हैं।

राज्य लोक सेवा आयोग से चयनित होकर आने वाले हजारों कर्मियों के भविष्य पर तलवार लटक गई है। आयोग व कार्मिक विभाग ने सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत 18 हजार कर्मचारियों को सरकारी दायरे से बाहर घोषित कर दिया है। 2005 के बाद से सरकार के समस्त विभागों में नौकरी करने वाले कर्मचारी हैरान हैं। मार्च 2010 में सरकारी विभागों में अनुबंध कर्मचारियों की संख्या 9630 थी।

सुविधाओं से दूर हैं अनुबंधकर्मी
बेसिक के अतिरिक्त सालाना ग्रेड पे की 3 फीसदी की वेतन वृद्धि के ही अनुबंध कर्मी हकदार हैं। इनको स्वास्थ्य, डीए, सीपीएफ, स्टडी लीव की सुविधा नहीं है। पहले इन कर्मियों को 10 आकस्मिक अवकाश की सुविधा थी जिसे बढ़ाकर 12 कर दिया गया है।


2005 के बाद लोक सेवा आयोग से चयनित होकर आए 600 कॉलेज व स्कूल लेक्चर दूसरे विभागों के 5000 कर्मियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा प्राप्त नहीं है। स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों की नियुक्ति भी अनुबंध आधार पर हो रही है। अनुबंध नियुक्ति को लेकर आयोग ने कहा कि ये कर्मचारी ऑफ-सेटिंग आधार पर रखे गए हैं। ऐसे में सरकारी कर्मचारी होने का दावा निराधार है। आयोग ने कहा कि जब तक सरकार नियमों में संशोधन करके सरकारी कर्मचारी होने का प्रावधान नहीं कर देती है तब तक इन्हें सरकारी नहीं माना जा सकता। सरकार ने जनवरी 2011 में भी अनुबंध कर्मचारियों के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में संशोधन किया। अब अनुबंध के तहत रखने के लिए एक फॉर्मूला बनाने की प्रक्रिया चल रही है।

सरकारी दर्जा चाहिए
राज्य अनुबंध कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष जोगेंद्र सकलानी व महासचिव मनोज शर्मा ने कहा कि जब हमारी नियुक्ति आयोग से हुई है तो अनुबंध कर्मियों को सरकारी कर्मचारी होने का दर्जा मिलना चाहिए(प्रकाश भारद्वाज,दैनिक भास्कर,शिमला,8.8.11)।

छत्तीसगढ़ः9 कालेज बीएड की काउंसिलिंग से बाहर

Posted: 07 Aug 2011 08:08 PM PDT

बीएड की अतिरिक्त फीस वापस न करने और मापदंडों के अनुसार प्राध्यापकों की नियुक्ति नहीं करने का खामियाजा 9 कालेजों को भुगतना पड़ा। गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी ने इन कालेजों को बीएड की काउंसिलिंग से बाहर कर दिया है। यूनिवर्सिटी ने इस कार्रवाई की जानकारी राज्य शैक्षिक अनुसंधान प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) रायपुर व एनसीटीई भोपाल को दे दी है।

सेंट्रल यूनिवर्सिटी में विद्या परिषद की स्थाई समिति की बैठक में बीएड कालेजों की लापरवाही को गंभीरता से लिया गया है। राज्य शासन और सेंट्रल यूनिवर्सिटी के बार-बार निर्देशों के बाद भी बीएड कालेजों ने पिछले शैक्षणिक सत्र में ली गई अतिरिक्त फीस लौटाने और प्राध्यापकों की नियुक्ति के संबंध में यूनिवर्सिटी को जानकारी नहीं दी है। इससे नाराज विद्या परिषद ने उन्हें काउंसिलिंग से बाहर करने का फैसला लिया है। ऐसे बीएड कालेज जिन्होंने मापदंडों के अनुसार नियुक्तियां की हैं और शेष नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू कर दी है, उन्हें एक माह का समय दिया गया है।

यूनिवर्सिटी ने बीएड कालेजों से लौटाई गई फीस का प्रमाण भी मांगा है। बैठक में कुलपति डा. लक्ष्मण चतुर्वेदी के अलावा उप कुलपति डा. पीसी उपाध्याय, कुलसचिव प्रो. एमएसके खोखर, प्रो. एसपी सिंह, प्रो. एसवीएस चौहान व अन्य सदस्य मौजूद थे।


शुरू नहीं होगा नया कोर्स

कुछ कालेजों ने वर्तमान सत्र में नए कोर्स के लिए यूनिवर्सिटी में आवेदन दिया था। यूनिवर्सिटी की टीम ने इन कालेजों का निरीक्षण भी किया। इसकी रिपोर्ट सौंप दी गई है, जिसके मुताबिक कालेजों में नए कोर्स संचालित कराने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं पाए गए। रिपोर्ट के आधार पर यूनिवर्सिटी ने फिलहाल ऐसे कालेजों में नए कोर्स शुरू करने की अनुमति नहीं दी है।

सीटों की संख्या पर फैसला 3 दिनों में

कई कालेजों ने यूनिवर्सिटी में सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए आवेदन किया था। इसके लिए यूनिवर्सिटी में टीम भी गठित की गई है। टीम में अधिष्ठाता, छात्र कल्याण अधिष्ठाता, कुलसचिव व उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त संचालक डा. बीएल गोयल शामिल हैं। टीम की रिपोर्ट के आधार पर कालेजों में सीटें बढ़ाने का फैसला तीन दिनों के भीतर लिया जाएगा।

क्या था मामला

फीस नियामक आयोग के पिछले साल ही बीएड की फीस तय कर इसकी जानकारी बीएड कालेजों को भेज दी थी, लेकिन बीएड कालेज प्रबंधन ने निर्देश मिलने से इनकार करते हुए प्रशिक्षार्थियों से अतिरिक्त फीस ले ली। सत्र के बाद कालेज प्रबंधन ने अतिरिक्त फीस वापस करने से इनकार कर दिया। इसकी शिकायत छात्रों ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी और एससीईआरटी से की। एससीईआरटी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सेंट्रल यूनिवर्सिटी से ऐसे कालेजों के नाम मांगे थे। 

सेंट्रल यूनिवर्सिटी ने उन कालेजों को तीन दिन में व्यवस्था सुधारकर इसकी जानकारी देने के निर्देश दिए। इसके बाद भी बीएड कालेजों ने अधूरी जानकारी भेजी और टालमटोल रवैया अपनाया। सेंट्रल यूनिवर्सिटी ने ऐसे कालेजों के नाम एससीईआरटी को भेजकर उन्हें काउंसिलिंग में शामिल न करने की बात कही। एससीईआरटी ने यूनिवर्सिटी से पहले संबद्धता खत्म करने की विधिवत सूचना देने के लिए कहा। इसके बाद यूनिवर्सिटी ने विद्यापरिषद की बैठक में ऐसे 9 बीएड कालेजों को काउंसिलिंग से बाहर कर सूचना एससीईआरटी को भेज दी है।


ये हुए काउंसिलिंग से बाहर

- सिद्धपीठ महामाया एजुकेशन कालेज बिलासपुर 

- शुभम शिक्षण समिति बिलासपुर 

- डीएलएस कालेज बिलासपुर 

- हरिशंकर एजुकेशन कालेज जांजगीर 

- राहौद एजुकेशन सोसायटी राहौद 

- कोनार्क कालेज आफ एजुकेशन खोखसा जांजगीर 

- श्री महंत लाल दास एजुकेशन कालेज शिवरीनारायण 

- ज्ञानोदय एजुकेशन कालेज जांजगीर 

> ज्ञानदीप एजुकेशन कालेज जांजगीर

ये रखे गए यथावत्

 -सीएमडी कालेज 

 -डीपी विप्र बीएड कालेज 

- अग्रसेन बीएड कालेज कोरबा 

- केएन बीएड कालेज कोरबा 

- मौलाना आजाद बीएड कालेज(दैनिक भास्कर,बिलासपुर,8.8.11)

राजस्थानःसीकर में मातृत्व अवकाश के दौरान ड्यूटी देने का फरमान

Posted: 07 Aug 2011 08:04 PM PDT

एनआरएचएम महिला संविदाकर्मियों का प्रसव कालीन अवकाश बंद कर दिया है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं हो रहा। इस बीच, जिले में प्रसूता कर्मचारियों को समय से पहले ड्यूटी पर बुला लिया है।

अप्रैल माह में वित्त सचिव सीके मैथ्यू की एक चिट्ठी के बाद जिले में अवकाश पर चल रहीं महिला कर्मचारियों को वापस बुलाने का फरमान जारी कर दिया गया। जबकि एनआरएचएम निदेशक ने अवकाश को लेकर किसी भी प्रकार के निर्देश जारी करने से इनकार किया है। साथ ही अवकाश बंद न किए जाने की बात कही है।


जिला अधिकारियों ने यहां न केवल महिलाकर्मियों को वापस बुला लिया बल्कि वेतन भी रोका हुआ है। अब इन महिलाओं को ड्यूटी पर बच्चों को साथ लाना पड़ रहा है। झाझड़ उप स्वास्थ्य केंद्र पर नियुक्त एएनएम संतोष को 23 दिन तो सेवदड़ा में नियुक्त सरला को भी 20 दिन से पहले ही ड्यूटी जोइन करनी पड़ी। नीमकाथाना के बीसीएमएचओ कार्यालय में भी ६ माह बाद लौटी एक महिलाकर्मी को स्पष्ट नहीं बताया है कि छुट्टियां स्वीकार होंगी या नहीं(दैनिक भास्कर,सीकर,8.8.11)।

राजस्थानःसीकर में मातृत्व अवकाश के दौरान ड्यूटी देने का फरमान

Posted: 07 Aug 2011 08:04 PM PDT

एनआरएचएम महिला संविदाकर्मियों का प्रसव कालीन अवकाश बंद कर दिया है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं हो रहा। इस बीच, जिले में प्रसूता कर्मचारियों को समय से पहले ड्यूटी पर बुला लिया है।


अप्रैल माह में वित्त सचिव सीके मैथ्यू की एक चिट्ठी के बाद जिले में अवकाश पर चल रहीं महिला कर्मचारियों को वापस बुलाने का फरमान जारी कर दिया गया। जबकि एनआरएचएम निदेशक ने अवकाश को लेकर किसी भी प्रकार के निर्देश जारी करने से इनकार किया है। साथ ही अवकाश बंद न किए जाने की बात कही है।

जिला अधिकारियों ने यहां न केवल महिलाकर्मियों को वापस बुला लिया बल्कि वेतन भी रोका हुआ है। अब इन महिलाओं को ड्यूटी पर बच्चों को साथ लाना पड़ रहा है। झाझड़ उप स्वास्थ्य केंद्र पर नियुक्त एएनएम संतोष को 23 दिन तो सेवदड़ा में नियुक्त सरला को भी 20 दिन से पहले ही ड्यूटी जोइन करनी पड़ी। नीमकाथाना के बीसीएमएचओ कार्यालय में भी ६ माह बाद लौटी एक महिलाकर्मी को स्पष्ट नहीं बताया है कि छुट्टियां स्वीकार होंगी या नहीं(दैनिक भास्कर,सीकर,8.8.11)।

देवी अहिल्या विश्वविद्यालयः10 हजार से ज्यादा छात्रों का भविष्य अधर में!

Posted: 07 Aug 2011 08:03 PM PDT

देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी ने भले ही बीकॉम छठे सेमेस्टर की परीक्षा समय पर शुरू करवा दी हो, लेकिन कॉलेजों की लापरवाही छात्रों को भारी पड़ सकती है। जानकारी के मुताबिक यूनिवर्सिटी से संबद्धता प्राप्त 56 कॉलेजों ने अब तक सीसीई मार्क्‍स नहीं भेजे हैं। ऐसे में परीक्षा खत्म होने के बाद भी यूनिवर्सिटी के लिए समय पर रिजल्ट देना मुश्किल हो जाएगा। पहले ही समय से पांच माह लेट चल रहे सेमेस्टर के कारण छात्रों को पीजी में नियमित प्रवेश मिलने में परेशानी आ रही थी। अब कॉलेजों की इस लापरवाही ने उनके भविष्य पर फिर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

कॉलेजों की इस लापरवाही का खामियाजा इन कॉलेजों में पढ़ रहे 10 हजार 300 से ज्यादा छात्रों को भुगतना पड़ेगा। अगस्त के तीसरे सप्ताह में परीक्षा खत्म होना है और यूनिवर्सिटी ने इसके 15 दिनों के भीतर रिजल्ट देने की घोषणा की है।

अप्रैल में होना थी, जुलाई में शुरू हुई

दरअसल पहले से ही बीकॉम के छात्रों की जो सेमेस्टर परीक्षा अप्रैल माह में होनी थी, वह 28 जुलाई से आरंभ हुई। ऐसे में छात्रों को पीजी में प्रोविजन एडमिशन लेना पड़ा। अब सीसीई मार्क्‍स के कारण यूनिवर्सिटी परीक्षा समाप्ति के काफी समय बाद भी रिजल्ट घोषित नहीं कर पाएगी। इससे छात्रों को पीजी के पहले सेमेस्टर की परीक्षा में बैठने नहीं दिया जाएगा। हालांकि इसके लिए यूनिवर्सिटी ने जल्द रास्ता निकालने का आश्वासन दिया है।

क्या कहता है नियम
दरअसल नियम तो यह है कि कॉलेजों को परीक्षा शुरू होने के 15 दिन पहले ही सीसीई मार्क्‍स भेजना होता है। कई कॉलेज तो परीक्षा खत्म हो जाने के 15 दिन बाद तक भी मार्क्‍स नहीं भेजते। 

उच्च शिक्षा विभाग को लिखकर देंगे
"जिन कॉलेजों ने सीसीई मार्क्‍स नहीं भेजे हैं, उन्हें हम 12 अगस्त तक का समय दे रहे हैं। इसके बाद भी जो कॉलेज मार्क्‍स नहीं भेजेंगे, उनके नाम उच्च शिक्षा विभाग को लिखकर दे देंगे।" 
डॉ. पी.के. मिश्रा, कुलपति(दैनिक भास्कर,इन्दौर,8.8.11)

झारखंडःबिरसा कृषि विश्वविद्यालय में नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक

Posted: 07 Aug 2011 09:36 PM PDT

राज्यपाल सह कुलाधिपति एमओएच फारूक ने बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में चार महीने पूर्व हुई नियुक्तियों की जांच के आदेश दिये हैं। इसके साथ ही कुछ पदों पर नियुक्ति के लिए शुक्रवार से शुरू हो रहे इंटरव्यू पर अगले आदेश तक रोक लगा दिया है।

राजभवन को साक्षात्कार में अनियमितता, पक्षपात और भाई भतीजावाद किये जाने की शिकायत मिली है। इसी के बाद कुलाधिपति ने यह कदम उठाया है। उन्होंने कुलपति और रजिस्ट्रार को नियुक्ति प्रक्रिया में किसी प्रकार की अग्रेतर कार्रवाई करने से भी मना कर दिया है। साथ ही कहा है कि कुलाधिपति कार्यालय गड़बड़ियों की जांच करायेगा।

मालूम हो कि कुछ माह पूर्व बीएयू में 158 लोगों की विभिन्न पदों पर नियुक्ति की गई थी। उसमें धांधली का आरोप लगा था। कुलाधिपति ने कहा है कि इन नियुक्तियों में मेधा को दरकिनार करने और अन्यान्य पदों पर भी नियुक्तियां करने की बात सामने आयी है।

यह गंभीर बात है। यहां सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान कुलपति का कार्यकाल 17 अगस्त को पूरा हो रहा है। आरोप है कि इससे पूर्व वह कुछ पदों पर इंटरव्यू के माध्यम से मनचाहा नियुक्ति कर लेना चाहते थे।


147 पदों की नियुक्ति संचिका की ओएसडी करेंगे जांच

कांके। बीएयू में गत दिनों 147 पदों पर हुई बहाली में अनियमितता की जांच ओएसडी सदाशिव राव करेंगे। राज्यपाल के पास अनियमितता की शिकायत की गई थी। उस पर संज्ञान लेते हुए जांच का निर्देश दिया गया है। ओएसडी ने स्थापना शाखा की अलमारी में नियुक्ति से संबंधित सभी फाइलों को बंद करा कर उसकी चाबी अपने पास रख ली है। 

मालूम हो कि पैरवी, पैसे और विश्वविद्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों के संबंधियों को फर्जी अनुभव और आवासीय प्रमाण पत्र पर बहाल करने का आरोप आकस्मिक श्रमिक, झारखंड छात्र संघ एवं कांके सरना समिति ने लगाया था। 

विज्ञापित करा कर ही नियुक्त करने की मांग 

भारतीय मृदा सर्वेक्षण एवं भू-उपयोग कार्यालय कांके में चालक के दो पदों की बहाली स्थानीय अखबारों में विज्ञापित करा कर ही नियुक्त करने की मांग झामुमो सचिव मुश्ताक आलम और समनूर मंसूरी ने की है(दैनिक भास्कर,कांके,6.9.11)।
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Palash Biswas
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