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Thursday, February 23, 2012

अपनी ही पार्टी का सूपड़ा साफ कराने में जुटे शांता समर्थक

अपनी ही पार्टी का सूपड़ा साफ कराने में जुटे शांता समर्थक

Thursday, 23 February 2012 09:33

विवेक सक्सेना नई दिल्ली, 23 फरवरी। हिमाचल प्रदेश में अक्तूबर में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर, भाजपा के दोनों धड़े कमर कस कर अपनी तैयारियों में जुट गए हैं। जहां मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल का गुट चुनाव जीतने के लिए हरसंभव कदम उठाने जा कहा है, तो दूसरी ओर शांता कुमार के समर्थक यह सुनिश्चत करने पर तुल गए हैं कि सरकार का सूपड़ा कैसे साफ करवाया जाए।
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शांता कुमार और उनके समर्थकों को पूरा विश्वास हो चुका है कि हाई कमान हिमाचल प्रदेश में पार्टी को डुबाने का मन बना चुका है, इसलिए वे उसकी इच्छापूर्ति के लिए अपना योगदान देने की तैयारी कर रहे हैं। उनके इस निष्कर्ष पर पहुंचने की वाजिब वजह भी है। खुद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने उनके साथ जो कुछ किया उसके बाद उनका सबसे विश्वास उठ गया है। उन्हें अभी यह विश्वास नहीं हो पा रहा है कि इस स्तर पर भी धोखा दिया जा सकता है।
शांता कुमार और धूमल खेमे के बीच काफी लंबे अरसे से टकराव चला आ रहा था। इसे दूर करने के लिए हाल ही में गडकरी ने अपने घर पर दोनोें नेताओं की बैठक भी बुलाई थी पर इसमें कोई निष्कर्ष नहीं निकल पाया था। उसके बाद भाजपा महासचिव जेपी नढ्ढा और राज्य के सह प्रभारी श्याम जाजू हिमाचल गए और वहां यह एलान कर दिया कि सब ठीक हो चुका है। उन्होंने ऊना के विधायक और संघ के करीबी सतपाल सत्ती के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनाए जाने की संभावना से संबंधित खबरें भी छपवा दीं। 
जब शांता कुमार को यह पता चला तो वे बौखला गए। उन्हें नितिन गडकरी ने बातचीत के लिए बुलाया। इससे पहले जब उनके सामने सतपाल सत्ती का नाम रखा गया था तो उन्होंने यह कहते हुए उनका विरोध किया था कि मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल,उनका सांसद बेटा व भाजयुमो अध्यक्ष अनुराग ठाकुर,पार्टी महासचिव जेपी नढ्ढा सभी हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र के ही हैं। अब अगर सतपाल सत्ती को नया अध्यक्ष बनाया गया तो वे भी यहीं के होंगे। क्या पार्टी हमीरपुर के बाहर नहीं देखना चाहती है? उनकी दलीलें सुनने के बाद पार्टी अध्यक्ष ने उनसे कहा कि आप उत्तर प्रदेश के चुनाव होने तक इंतजार कर लीजिए। मैं सबसुलझा दूंगा। वे यह आश्वासन पाकर चले आए।

अपने घर आने पर उन्हे पता चला कि पिछली रात ही सतपाल सत्ती को अध्यक्ष बनाने का पत्र जारी किया जा चुका था। इसे वे अपने अपमान के रूप में ले रहे हैं। उनके करीबियों का कहना है कि अगर अध्यक्ष ने यह फैसला कर ही लिया था,तो शांता कुमार को  गुमराह करने की क्या जरूरत थी। उनका दावा है कि इस फैसले के पीछे जेपी नढ्ढा की अहम भूमिका रही है। शांता कुमार ने तो सबसे पहले अध्यक्ष पद के लिए उनका ही नाम चलाया था,पर गडकरी ने उन्हें महासचिव बना दिया। अब वे मुख्यमंत्री व शांता कुमार दोनों की ही नावों में पैर रख कर चलना चाहते हैं।
शांता कुमार के समर्थक उनके इस अपमान से इतने खफा हैं कि वे अब सरकार का सूपड़ा साफ करने पर उतारू हो गए हैं। उनका दावा है कि वे इस चुनाव में धूमल और हाई कमान को उनकी हैसियत का अहसास करा देंगे। मालूम हो कि शांता कुमार पहले ही यह एलान कर चुके हैं कि वे न तो पार्टी की किसी बैठक में हिस्सा लेंगे,और न ही राज्य में चुनाव प्रचार के लिए जाएंगे। फिलहाल वे वाणिज्य मंत्रालय की संसद की स्थायी समिति की बैठक में हिस्सा लेने दिल्ली से बाहर जा चुके हैं।

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