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Thursday, February 16, 2012

बजट से पहले आर्थिक कवायद तेज,बिजली परियोजनाओं के साथ 31 मार्च तक फ्यूल सप्लाई एग्रीमेंट (एफएसए) करने का निर्देश कोल इंडिया को

बजट से पहले आर्थिक कवायद तेज,बिजली परियोजनाओं के साथ 31 मार्च तक फ्यूल सप्लाई एग्रीमेंट (एफएसए) करने का निर्देश कोल इंडिया को

ओएनजीसी में पांच फीसदी हिस्सेदारी के विनिवेश का भी निर्णय

उत्पादन में आई ऐतिहासिक गिरावट से उबरने को जूझ रही कोल इंडिया की मुश्किल बढ़ जाएगी।


मुंबई से एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास

बजट से पहले आर्थिक कवायद तेज होगयी है। आर्थिक नीतियों में सुस्ती के आरोप को खारिज करने के लिहाज से प्रधानमंत्री ने सीधे हस्तक्षेप किया है, जिससे बाजार और निवेशकों को भारी प्रोत्साहन मिला है।

सरकार ने देश की सबसे बड़ी तेल उत्खनन कंपनी तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) में 5 प्रतिशत हिस्सेदारी संस्थागत निवेशकों को बेचने का बुधवार को निर्णय किया। चालू वित्त वर्ष में 40,000 करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य के कुछ करीब पहुंचने की अंतिम कोशिश के तहत सरकार ने यह निर्णय किया है।कोयला आपूर्ति को लेकर पिछले कुछ समय से देश के बिजली उद्योग और कोल इंडिया के बीच चल रही खींचतान में उद्योग ने जीत हासिल की है। कोयले की उपलब्धता में आ रही अप्रत्याशित गिरावट पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कोल इंडिया को बिजली कंपनियों से किए गए पूरी आपूर्ति का वादा निभाने का निर्देश दिया है। हालांकि इस आदेश से बिजली कंपनियों के लिए 50,000 मेगावॉट बिजली के उत्पादन लक्ष्य तक पहुंचना मुमकिन हो सकेगा लेकिन उत्पादन में आई ऐतिहासिक गिरावट से उबरने को जूझ रही कोल इंडिया की मुश्किल बढ़ जाएगी।

टाटा पावर और अदाणी पावर जैसी बिजली उत्पादक कंपनियों के शेयरों में गुरुवार को खासी चमक देखी गई। हालांकि कोल इंडिया के शेयरों में गिरावट का रुख रहा। दरअसल, बुधवार को सरकार ने कोल इंडिया से कहा था कि खरीद करार के तहत वह बिजली कपंनियों को कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करे। बंबई स्टॉक एक्सेंचज में गुरुवार को टाटा पावर का शेयर 2.63 फीसदी चढ़कर 113.35 रुपये पर बंद हुआ। बुधवार को भी कंपनी का शेयर 5.9 फीसदी बढ़त पर बंद हुआ था।

पावर कंपनियों को बड़ी राहत मिली है। कोल इंडिया 31 मार्च तक 20 साल के लिए पावर कंपनियों की जरूरत का 80 फीसदी कोयला सप्लाई करने का करार करेगी।अगर कोल इंडिया 80 फीसदी से कम कोयले की सप्लाई करती है, तो कंपनी पर जुर्माना लगेगा। हालांकि, कोल इंडिया को कोयला आयात करने की छूट दी गई है। आयातित कोयले की ज्यादा कीमत पावर कंपनियों को देनी होगी।


एसोसिएशन ऑफ पावर प्रोड्यूसर्स के डीजी, अशोक खुराना का कहना है कि इस फैसला का सबसे ज्यादा फायदा 5,000 मेगावॉट से ज्यादा क्षमता वाले पावर प्लांट को होगा।


प्रधानमंत्री द्वारा पावर सेक्टर की दिक्कतों पर बनाई गई कमेटी ने फैसला किया है कि 30 दिसंबर 2011 तक जो पावर प्लांट बन चुके हैं, उनके साथ कोल इंडिया को फ्यूल सप्लाई अग्रीमेंट करना होगा।


साथ ही, जो प्लांट 31 मार्च 2015 तक तैयार होंगे और पावर परचेज अग्रीमेंट कर चुके हैं, उन प्लांट के साथ भी कोल इंडिया को फ्यूल सप्लाई अग्रीमेंट करना होगा।



वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता वाला मंत्रियों का अधिकार प्राप्त समूह ने ओएनजीसी में नीलामी बिक्री के जरिये शेयर बेचे जाने का निर्णय किया, वहीं भेल में विनिवेश के निर्णय को अगले वित्त वर्ष के लिये टाल दिया गया।

ईजीओएम में भाग लेने वाले मंत्रियों ने कीमत संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर विनिवेश के समय के बारे में कुछ नहीं कहा। आरक्षित मूल्य एवं समय के बारे में निर्णय करने के लिये मंत्री समूह की जल्दी ही बैठक होगी।

बहरहाल, ओएनजीसी में हिस्सेदारी बिक्री से सरकार को 31 मार्च तक 40,000 करोड़ रुपये के महत्वाकांक्षी विनिवेश लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद नहीं मिलेगी। विनिवेश सचिव मोहम्मद हलीम खान ने कहा कि बजट लक्ष्य को हासिल करना अब लगभग असंभव है।

ओएनजीसी में नीलामी मार्ग के जरिये 5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर सरकार 12,000 करोड़ रुपये तक जुटा सकती है। इसके अलावा पावर फाइनेंस कारपोरेशन में विनिवेश से 1,145 करोड़ रुपये प्राप्त किये जा चुके हैं। ऐसे में कुल मिलाकर सरकार 13,000 करोड़ रुपये ही चालू वित्त वर्ष में प्राप्त कर सकती है। इसके अलावा नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन में आईपीओ के जरिये करीब 250 करोड़ रुपये प्राप्त हो सकते हैं।

ओएऩजीसी का विनिवेश जहां आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया में बजट के बाद तेजी लाने का​ ​ संकेत है। वहीं कोयलाखानों से आपूर्ति सुनिश्चत करके बिजली उत्पादन को बढ़ावा दिया गया है। दूर संचार की नयी नाति भी निवेशकों को खुश करने की कोशिश है।अर्थव्यवस्था की चाल सुस्त होने संबंधी व्यापार जगत की तोहमतों के बाद संप्रग सरकार ने नीतियों को बदलने और रफ्तार देने का काम शुरू कर दिया है। इसी क्रम में विभिन्न मंत्रालयों ने बुधवार को आर्थिक मोर्चे पर कई कदम उठाने का ऐलान किया। इनमें मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों को ज्यादा स्पेक्ट्रम रखने,संचार सेवाओं के लिए एक लाइसेंस की नीति, बिजली क्षेत्र के लिए कोयला खानों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने और अरुणाचल प्रदेश में पनबिजली परियोजना को पर्यावरण मंजूरी का फैसला शामिल हैं। इतना ही नहीं, सरकार ने ओएनजीसी में पांच फीसदी हिस्सेदारी के विनिवेश का भी निर्णय लिया है।

सामान्य करदाताओं के लिए आज का दिन काफी महत्वपूर्ण होने जा रहा है क्योंकि आज संसदीय समिति की एक बैठक में कर छूट की सीमा को तीन लाख करने पर विचार किया जा सकता है। डीटीसी की विस्तृत रिपोर्ट पर चर्चा करने के लिए वित्त मामलों की स्थायी समिति एक बैठक करेगी जिसमें आयकर छूट सीमा 3 लाख तक बढ़ाए जाने पर फैसला लिया जा सकता है।


भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा की अध्यक्षता में पिछले हफ्ते स्थायी समिति की बैठक हुई थी लेकिन कुछ मुद्दो को लेकर एक राय नहीं बन पाई थी। लेकिन माना जा रहा है कि स्थायी समिति अपनी रिपोर्ट 12 मार्च से शुरु होने वाले बजट सत्र से पहले ही सौंप देगी।



प्रधानमंत्री की तरफ से गठित सचिव स्तरीय समिति ने 31 दिसंबर, 2011 तक स्थापित हो चुकी बिजली परियोजनाओं के साथ आगामी 31 मार्च तक फ्यूल सप्लाई एग्रीमेंट (एफएसए) करने का निर्देश कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) को दिया है। निर्देश के मुताबिक सीआईएल उन परियोजनाओं के साथ भी कोयला आपूर्ति के लिए एफएसए करेगी जिन्होंने बिजली वितरण कंपनियों के साथ लंबे समय के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) कर लिया है और जो 31 मार्च, 2015 तक स्थापित हो जाएंगी।


मालूम हो कि एफएसए करने के बाद सीआईएल वैधानिक रूप से बिजली परियोजनाओं को कोयला आपूर्ति के लिए बाध्य हो जाती है।


प्रधानमंत्री कार्यालय ने बयान में कहा, 'आश्वस्ति पत्र में उल्लिखित कोयले की पूरी मात्रा की आपूर्ति के लिए करार होंगे, जिसकी अवधि 20 साल होगी।' कंपनी को अनिवार्य रूप से देसी बाजार में कोयले की मांग पूरी करने के लिए कहा गया है, भले ही इसके लिए उसे विदेश में भी विकल्प खंगालने पड़ें। यह ऐसा कदम है, जिसका विरोध पिछले एक साल से कंपनी के साथ कोयला मंत्रालय भी कर रहा है।


गौरतलब है कि सार्वजनिक क्षेत्र की कोल इंडिया (सीआईएल) का एकीकृत शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष 2011-12 की अक्तूबर-दिसंबर तिमाही में 54 प्रतिशत बढ़कर 4,037.7 करोड़ रुपये रहा। बिक्री में सुधार से कंपनी के लाभ में वृद्धि हुई। इससे पूर्व वित्त वर्ष की इसी तिमाही में कंपनी का एकीकृत शुद्ध लाभ 2,621.5 करोड़ रुपये था।

आलोच्य तिमाही में कंपनी की एकीकृत कुल आय 17,205.1 करोड़ रुपये रही जो इससे पूर्व वित्त वर्ष की इसी तिमाही (अक्तूबर-दिसंबर) में 13,937.4 करोड़ रुपये थी।

कोल इंडिया की चेयरमैन और प्रबंध निदेशक जोहरा चटर्जी ने  कहा, कोल इंडिया के प्रदर्शन से मैं बहुत खुश हूं। सार्वजनिक उपक्रम और उंचाई पर ले जाने के लिये हर संभव प्रयास करूंगी। एकल आधार पर कंपनी का शुद्ध लाभ दिसंबर तिमाही में 957 प्रतिशत बढ़कर 1,219.33 करोड़ रुपये रहा जो इससे पूर्व वित्त वर्ष की इसी तिमाही में 115.3 करोड़ रुपये था।

एकल आधार पर कंपनी की कुल आय आलोच्य तिमाही में बढ़कर 1,566 करोड़ रुपये रही जो इससे पूर्व वित्त वर्ष की इसी तिमाही में 400.5 करोड़ रुपये रही।


पिछले महीने बिजली उद्योग के प्रतिनिधियों की प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद सचिवों की समिति का गठन किया गया था। टाटा पावर के चेयरमैन रतन टाटा, लैंको इन्फ्राटेक के चेयरमैन एल मधुसूदन राव, रिलायंस पावर के चेयरमैन अनिल अंबानी और जिंदल पावर के नवीन जिंदल ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी। कोल इंडिया ग्राहकों के साथ पहले आश्वस्ति पत्र पर हस्ताक्षर करती है। ग्राहकों द्वारा समयसीमा में परियोजना विकसित करने की शर्त पूरी होने पर यह पत्र ईंधन आपूर्ति करार में तब्दील हो जाता है। अभी तक कोल इंडिया ने सभी आश्वस्ति पत्र 90 फीसदी के ट्रिगर स्तर पर ही किए हैं। इसका मतलब है कि अगर कंपनी 90 फीसदी से कम कोयला आपूर्ति करती है, तो उस पर जुर्माना लगेगा और अगर इससे ज्यादा आपूर्ति करती है, तो उसे फायदा दिया जाएगा। लेकिन हाल में कंपनी ने 50 फीसदी ट्रिगर स्तर पर करार करने शुरू किए हैं।


मल्टी ब्रांड रिटेल कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति पर फैसला लंबित होने के बावजूद आपूर्ति श्रृंखला का आधारभूत ढांचा खड़ा करने के लिए सरकार ने घरेलू संगठित क्षेत्र को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने राज्यों से कृषि आपूर्ति श्रृंखला में बड़े उद्योगों के निवेश को प्रोत्साहित करने की अपील की। साथ ही जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पादों की मार्केटिंग, परिवहन और भंडारण सुविधाओं में निजी क्षेत्र का निवेश बढ़ाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री व वित्त मंत्री बुधवार को कृषि क्षेत्र पर राष्ट्रपति द्वारा आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इसमें 20 राज्यों के राज्यपाल, आठ केंद्रीय मंत्री और पांच राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने शिरकत की। मनमोहन व प्रणब दोनों ने कहा कि रिटेल सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी को अनुमति मिलने से पहले घरेलू निवेशकों को मजबूत बनाने की जरूरत है।


वित्त मंत्री ने राज्यों से कहा कि मल्टी ब्रांड रिटेल कारोबार में विदेशी निवेश की अनुमति मिलने के बाद भी वे खाद्य उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला में घरेलू संगठित क्षेत्र को प्रोत्साहित करें। रिटेल कारोबार में पर्याप्त संभावनाएं हैं। मुखर्जी ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए कृषि क्षेत्र में सतत वृद्धि के साथ-साथ इसे अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की भी आवश्यकता है। बंपर कृषि पैदावार पर प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों ने देश का सिर ऊंचा किया है। चालू फसल वर्ष में भी 25 करोड़ टन से अधिक खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान है। बागवानी और पशु उत्पादों की बढ़ी मांग को देखते हुए इसे और प्रोत्साहित करने की जरूरत है।



प्रधानमंत्री के निर्देश पर पीएमओ के प्रमुख सचिव पुलक चटर्जी के नेतृत्व में गठित सचिव स्तरीय समिति के इस फैसले से 50,000 मेगावाट से अधिक क्षमता की विभिन्न बिजली परियोजनाओं को राहत मिलने की संभावना है।


पीएमओ से प्राप्त जानकारी के मुताबिक यह एफएसए 20 साल के लिए होगा और परियोजनाओं को कोयला लिंकेज के लिए जारी लेटर आफ एश्योरेंस (एलओए) के मुताबिक ही एफएसए किया जाएगा। गत 18 जनवरी को प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान एसोसिएशन ऑफ पावर प्रोड्यूसर (एपीपी) ने कहा था कि सीआईएल बिजली परियोजनाओं की जरूरत के सिर्फ 50 फीसदी कोयले की आपूर्ति के लिए एफएसए करना चाहती है जिस कारण मार्च, 2009 के बाद किसी भी परियोजना के साथ एफएसए नहीं किया गया है।


सचिव स्तरीय समिति ने अपने निर्देश में यह भी कहा है कि सीआईएल अगर अपने उत्पादन से एफएसए के तहत कोयले की पूर्ण आपूर्ति नहीं कर पाती है तो उसे आयात करके या अन्य सार्वजनिक उपक्रम को आवंटित कोयला ब्लॉक से उन परियोजनाओं के लिए कोयले की व्यवस्था करनी होगी। इन सभी निर्देशों को प्रधानमंत्री ने भी अपनी मंजूरी दे दी है।


पीएमओ के मुताबिक इस फैसले से बिजली परियोजनाओं के प्रति निवेशकों का भरोसा बहाल होगा और 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान बिजली उत्पादन क्षमता में विस्तार के तय लक्ष्य को हासिल करने के साथ-साथ सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर के लक्ष्य को भी पाने में मदद मिलेगी।


कोयला मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री की ओर से जारी निर्देश मंत्रालय को मिल गया है और इस संबंध में पूरी तैयारी की जा रही है।


दरअसल, बिजली परियोजनाओं के साथ एफएसए नहीं होने से इन परियोजनाओं के लिए कर्ज मुहैया कराने वाले बैंकों का भरोसा उनके प्रति कम हो रहा था। एपीपी इस बात की भी आशंका जाहिर कर चुकी है कि इस दिशा में जल्द कार्रवाई नहीं होने पर बड़ी संख्या में बिजली परियोजनाएं डिफॉल्टर हो सकती हैं और नई बिजली परियोजनाओं को बैंकों से कर्ज लेना काफी मुश्किल होगा।

पीएम के कुछ अहम फैसले
1. सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवा मुहैया कराने की पहल। पीएमओ के समर्थन से स्वास्थ्य मंत्रालय ने तैयार की 30 हजार करोड़ की मुफ्त दवा योजना
2. राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन को शहरी इलाकों में विस्तार देने की पहल
3. श्रम कानूनों को मजबूत और तर्कसंगत बनाने की खातिर फैक्ट्री एक्ट में संशोधन की तैयारी। वर्ष 1987 के बाद से कोई संशोधन नहीं
4. कृषि उत्पादन पर बने वर्किंग ग्रुप की सिफारिशों को मंजूरी। कृषि लोन पर ब्याज कम करने और कृषि उत्पादों का उचित मूल्य दिलाने की कोशिश  
5. राजमार्गों को विस्तार देने की पहल। प्रतिदिन 21 किलोमीटर के निर्माण की योजना  
6. 3300 किमी लंबे डेडिकेटेड फे्रट कॉरिडोर को तीव्र गति से पूरा करने की पहल। सितंबर 2012 तक पहले चरण को अंजाम देने की तैयारी
7. चीनी को नियंत्रण मुक्त करने की खातिर रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर सी. रंगराजन की अगुवाई में विशेषज्ञ कमेटी गठित  
8. कोयला, अनाज, दवाओं आदि की ढुलाई में बेहतर संभावनाएं ढूंढने को आंतरिक जलमार्ग परिवहन के क्षेत्र में निजी क्षेत्र का निवेश बढ़ाने की तैयारी  
9. फार्मा सेक्टर में विदेशी निवेश को प्रोत्साहन
10. गैस व तेल क्षेत्र में शोधन को बढ़ावा देने की पहल

ओएनजीसी के विनिवेश का फैसला

ओएनजीसी में 5 फीसदी हिस्सा ऑक्शन के जरिए बेचा जाएगा।

सरकार ने चालू वित्त वर्ष में सार्वजनिक उपक्रम ओएनजीसी के विनिवेश का फैसला कर निवेशकों को खुश कर दिया है। सरकारी क्षेत्र की ऑयल कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) के फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (एफपीओ) के लिए ब्रोकरों के दांवपेंच भी शुरू हो चुके हैं।


ईजीओएम ने ऑक्शन के जरिए ओएनजीसी के 5 फीसदी हिस्से को बेचने की मंजूरी दी है। वहीं बीएचईएल के विनिवेश पर फैसला नहीं हुआ है।वहीं ईजीओएम ने कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए सभी एफपीओ के लिए ऑक्शन के जरिए विनिवेश को मंजूरी दी है।


पेट्रोलियम मंत्री जयपाल रेड्डी का कहना है कि ईजीओएम नेओएनजीसी के विनिवेश को हरी झंडी दिखा दी है। ईजीओएम ने ऑक्शन के जरिए ओएनजीसी के विनिवेश को मंजूरी दी है। ऑक्शन के जरिए ओएनजीसी के विनिवेश मसले पर ईजीओएम की जल्द दोबारा बैठक होगी।


जयपाल रेड्डी के मुताबिक अगली ईजीओएम की बैठक में ओएनजीसी और बीएचईएल के विनिवेश की तारीख का फैसला किया जाएगा। वहीं अब ईजीओएम की मंजूरी के बाद ओएनजीसी के विनिवेश के लिए कैबिनेट की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी। ओएनजीसी में 5 फीसदी हिस्सा ऑक्शन के जरिए बेचा जाएगा। वहीं बीएचईएल के एफपीओ को भी ईजीओएम ने सैद्धांतिक मंजूरी दी है।


भारी उद्योग मंत्री प्रफुल्ल पटेल के मुताबिक ईजीओएम की बैठक मेंबीएचईएल के विनिवेश पर फैसला टल गया है।


प्रफुल्ल पटेल का कहना है कि बाजार की हालात ठीक नहीं होने की वजह से बीएचईएल के विनिवेश का फैसला टालना पड़ा है। ऐसे में वित्त वर्ष 2013 में ही बीएचईएल का विनिवेश हो सकता है।


विनिवेश सचिव का कहना है कि ईजीओएम ने कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए सभी एफपीओ के लिए ऑक्शन के जरिए विनिवेश को मंजूरी दी है जिसमें सेल का विनिवेश का भी शामिल है। हालांकि वित्त वर्ष 2012 में विनिवेश के जरिए 40,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल है।



इस बारे में बाजार के एक अग्रणी ब्रोकर का कहना है कि पिछले दो महीनों में जिस तरह से बांबे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स 2,000 अंक से  ऊपर की बढ़त हासिल कर चुका है, और शेयरों का मूल्यांकन काफी ऊंचा हो गया है। ऐसे में इन निवेशकों को हम यही सलाह दे रहे हैं कि वे इन शेयरों में मुनाफा वसूली करके ओएनजीसी के शेयरों के लिए पैसे रख लें।


सीएनआई रिसर्च के चेयरमैन किशोर ओस्तवाल कहते हैं कि इस महीने एमसीएक्स का आईपीओ आना है और उसी के बाद ओएनजीसी का फॉलोऑन पब्लिक ऑफर आने की उम्मीद है। निवेशकों के लिए अच्छा मौका है। उनका कहना है कि बाजार यहां से नीचे नहीं  जाएगा, बल्कि वह इसे आधार बना लेगा और ओएनजीसी के आने के बाद बाजार और ज्यादा बढ़त हासिल कर लेगा।


प्राइम डाटाबेस के सीएमडी पृथ्वी हल्दिया का कहना है कि ओएनजीसी के ऑक्शन से ही सरकार के विनिवेश की राह तय हो पाएगी। लेकिन अगर ओएनजीसी के ऑक्शन को ज्यादा प्रतिसाद नहीं मिल पाया तो सरकार दोबारा ऑक्शन का प्रस्ताव रख सकती है।


पृथ्वी हल्दिया के मुताबिक एफपीओ की बजाय ऑक्शन का रास्ता विनिवेश के लिए बेहतर साबित हो सकता है। रिटेल निवेशकों की ऑक्शन में ज्यादा हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद है। ऑक्शन के तहत शेयरों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी जिससे लिक्विडिटी में बढ़ोतरी हो सकती है।


पृथ्वी हल्दिया ने ओएनजीसी के लिए 300 रुपये प्रति शेयर के फ्लोर प्राइस का सुझाव दिया है। वहीं ऑक्शन की वजह से निवेशकों को शेयरों में मौजूदा भाव से ज्यादा भाव मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। ऐसे में पेंशन फंडों के ऑक्शन में शामिल होने के आसार हैं।



उधर दूसरी ओर जीवन बीमा कंपनी एलआईसी और देश का सबसे बड़ा बैंक भारतीय स्टेट बैंक भी ओएनजीसी के एफपीओ को सफल बनाने के लिए कमर कस चुका है। यह दोनों बड़े बाजार के निवेशक ओएनजीसी के लिए अच्छी खासी रकम डालेंगे ताकि सरकार का यह एफपीओ अच्छी तरह से सफल हो।


नई दूरसंचार नीति


केंद्रीय दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने प्रस्तावित नई दूरसंचार नीति के कुछ हिस्सों की घोषणा करते हुए कहा, जीएसएम सेवाएं दे रहे आपरेटरों के लिए सभी सेवा क्षेत्रों में 2जी स्पेक्ट्रम की अधिकतम सीमा 6.2 से बढ़कर आठ मेगाह‌र्ट्ज होगी। दिल्ली-मुंबई के लिए यह सीमा 10 मेगाह‌र्ट्ज निर्धारित की जाएगी। जिनके पास तय सीमा से ज्यादा स्पेक्ट्रम है उन्हें वो वापस करना होगा। हालांकि कंपनियां खुले बाजार से अधिक फ्रीक्वेंसी हासिल करने को स्वतंत्र होंगी, लेकिन ऐसे में स्पेक्ट्रम की नीलामी होनी चाहिए और यह लाइसेंस के विलय के लिए तय सीमा पर निर्भर है। कंपनियों को अतिरिक्त स्पेक्ट्रम के लिए एकमुश्त शुल्क देना होगा, पर अभी यह साफ नहीं है कि शुल्क नई निर्धारित सीमा से अधिक होगा या नहीं। सिब्बल ने कहा, सेवा एवं सर्किलों के लिए समायोजित सकल आय पर आठ फीसदी की दर से समान लाइसेंस फीस लगाने का प्रस्ताव है। फिलहाल यह छह से आठ प्रतिशत के बीच है। उन्होंने कहा, कंपनियों का लाइसेंस नवीनीकरण 10 साल के लिए किया जाएगा। सीडीएमए कंपनियों के लिए अधिकतम 2जी स्पेक्ट्रम की सीमा पांच मेगाह‌र्ट्ज बनाए रखी गई है।

दूरसंचार नीति में हुए बदलावों के मुताबिक नई एकीकृत लाइसेंस व्यवस्था में जाने के लिए कंपनियों को प्रवेश शुल्क देना होगा। महानगरों तथा ए सर्किल के लिए यह दो करोड़ तथा बी तथा सी सर्किल के लिए यह क्रमश: एक करोड़ रुपये तथा 50 लाख रुपये होगा। सिब्बल ने कहा, विलय में शामिल कंपनियों का सम्मिलित हिस्सा 35 प्रतिशत तक रहने पर ही इसकी अनुमति होगी। इस मुद्दे पर दूरसंचार नियामक (ट्राई) से दिशा निर्देश बनाने को कहा गया है। मंत्रालय उसके बाद ही इस पर अंतिम निर्णय करेगा। नई नीति में एक ही सर्किल में कंपनियों को एक दूसरे के साथ 2जी स्पेक्ट्रम के लेन देन की छूट होगी। यह पूछे जाने पर कि आज की घोषणा से ग्राहकों को क्या फायदा होगा, केंद्रीय मंत्री ने कहा, स्पेक्ट्रम के बेहतर उपयोग के कारण उन्हें सस्ती दर पर अच्छी सेवा मिलेगी।

एक अन्य अहम निर्णय में पर्यावरण मंत्री जयंती नटराजन ने पारिस्थितिकीय चिंताओं को छोड़ अरुणाचल प्रदेश में लोहित नदी पर 1,750 मेगावाट जलविद्युत परियोजना को हरी झंडी दे दी। राष्ट्रीय विनिर्माण नीति को बढ़ावा देते हुए सरकार ने घोषणा की है कि इस नीति के तहत प्रस्तावित मेगा औद्योगिक परिसरों में स्थित इकाइयों को पर्यावरण मंजूरी देने के मामले में सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता में गठित अधिकार संपन्न मंत्री समूह की बैठक में ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी ओएनजीसी में सरकार की पांच फीसदी हिस्सेदारी के विनिवेश का भी निर्णय ले लिया गया। शेयरों की बिक्री नीलामी के जरिए की जाएगी। मंत्री समूह के इस फैसले से सरकार को विनिवेश के जरिए 12,000 करोड़ रुपए जुटाने में मदद मिलेगी। वहीं, पीएमओ के इशारे पर कोल इंडिया लिमिटेड ने कहा है कि वह दिसंबर 2011 तक चालू बिजली परियोजनाओं के लिए मार्च अंत तक कोयला आपूर्ति का समझौता कर देगा। इससे सरकारी क्षेत्र के तहत आने वाले कोयला उद्योग और निजी क्षेत्र की कंपनियों द्वारा तैयार बिजली परियोजनाओं के बीच कोयला आपूर्ति को लेकर चल रही खींचतान दूर होने की उम्मीद बढ़ गई है। प्रधानमंत्री ने मामले में गौर करने के लिए सचिवों की एक समिति गठित की थी।

इक्विटीज मार्केट में एक बार फिर रौनक

पिछले कुछ समय के दौरान सुस्त पड़े इक्विटीज मार्केट में एक बार फिर रौनक दिखने लगी है। इस एसेट क्लास में दुनियाभर के निवेशकों का भरोसा फिर से मजबूत होता दिख रहा है। एक हालिया सर्वे में खुलासा हुआ है कि उभरते बाजारों की इक्विटीज में दुनियाभर के निवेशकों की तरफ से की जा रही निवेश की मात्रा आहिस्ता-आहिस्ता बढ़ रही है।


बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच द्वारा फरवरी, २०१२ में फंड मैनेजर्स पर किए गए सर्वे में खुलासा हुआ है कि इस दौरान २६ फीसदी निवेशकों ने इक्विटीज में निवेश किया है। पिछले महीने यही आंकड़ा महज १२ फीसदी था। सर्वे के मुताबिक बाजार की सुधरती हालत तथा आर्थिक विकास के मोर्चे पर उम्मीदों की मजबूती ने निवेशकों में यह भरोसा लौटाया है।


क्या कहता है सर्वे

ग्लोबल निवेशक दुनियाभर के किसी भी अन्य क्षेत्र के मुकाबले उभरते बाजारों को दे रहे ज्यादा तरजीह

फरवरी, २०१२ में अब तक के दौरान दुनियाभर के एसेट एलोकेटर्स ने इक्विटीज में किया २० फीसदी निवेश

वर्ष २०११ की शुरुआत से अब तक किसी एक महीने में इक्विटी बाजार में यह सबसे बड़ा निवेश

करीब ८६ फीसदी निवेशक मानते हैं कि चीन की अर्थव्यवस्था की 'सॉफ्ट लैंडिंग' होगी

यूरोप के बारे में ग्लोबल निवेशकों के मूड में होता दिख रहा है सकारात्मक सुधार

ग्लोबल निवेशकों की नजर में फिलहाल जापान बन गया है यूरोजोन से भी कम पसंद किया जाने वाला बाजार


इस सर्वे के नतीजों पर टिप्पणी करते हुए बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच ग्लोबल रिसर्च के मुख्य ग्लोबल इक्विटी स्ट्रैटजिस्ट माइकल हार्टनेट कहते हैं कि पिछले कुछ समय में बाजार में तरलता की हालत सुधरी है। इस वजह से इक्विटी मार्केट में निवेश की मात्रा बढ़ी है। उनके मुताबिक इससे यह भी स्पष्ट हो रहा है कि इकनॉमिक सेंटीमेंट्स भी सुधर रहे हैं।


सर्वे के मुताबिक वर्ष २०११ की शुरुआत से अब तक किसी एक महीने में इक्विटी बाजार में यह सबसे बड़ा निवेश है। इसमें उभरते बाजारों की इक्विटीज ने दुनियाभर के निवेशकों को आकर्षित करने में खासी सफलता पाई है। सर्वे में कहा गया है कि इस महीने में ४४ फीसदी एसेट एलोकेटर्स ने उभरते बाजारों पर अपना जोर बनाए रखा। जनवरी, २०१२ में यही आंकड़ा महज २० फीसदी था।


चीन की अर्थव्यवस्था पर दुनियाभर के निवेशकों का भरोसा बना हुआ है। करीब ८६ फीसदी निवेशक मानते हैं कि चीन की अर्थव्यवस्था धम्म से नीचे की तरफ नहीं जा रही है, बल्कि बल्कि उसकी 'सॉफ्ट लैंडिंग' होगी। वहीं, करीब ३६ फीसदी ग्लोबल निवेशकों ने कहा है कि वे दुनियाभर के किसी भी अन्य क्षेत्र के मुकाबले उभरते बाजारों को ज्यादा तरजीह देते हैं।


रिपोर्ट के मुताबिक दिलचस्प तथ्य यह है कि निवेशकों ने उभरते बाजारों के मुकाबले तरजीह नहीं देने वाले क्षेत्रों में अमेरिका का नाम भी शामिल किया। हालांकि यूरोप के बारे में ग्लोबल निवेशकों के मूड में सकारात्मक सुधार होता दिख रहा है। जनवरी, २०१२ के सर्वे में यूरोप के बारे में ग्लोबल निवेशकों के विचार अच्छे नहीं थे।


उस दौरान ५० फीसदी निवेशकों ने यूरोपीय बैंकों को तरजीह नहीं देने की बात की थी। लेकिन फरवरी, २०१२ में यह आंकड़ा घटकर १२ फीसदी रह गया, जो यूरोप के लिए अच्छी बात है।


पिछले कुछ समय तक जापान दुनियाभर के निवेशकों के लिए पसंदीदा निवेश डेस्टिनेशन बना हुआ था। लेकिन इस समय जापान के बाजार से निवेशकों का भरोसा कम होता दिखाई दे रहा है। सर्वे के मुताबिक जापान के इक्विटी मार्केट की तरफ ग्लोबल निवेशक अभी बेहद सधे कदमों से चल रहे हैं। हालत यह है कि ग्लोबल निवेशकों की नजर में अभी जापान यूरोजोन से भी कम पसंद किया जाने वाला बाजार बन गया है।


हालांकि सर्वे में शामिल जापान के उत्तरदाताओं में से ८१ फीसदी यह मानते हैं कि आने वाले वर्षों में देश की अर्थव्यवस्था में खासा सुधार होगा। पिछले महीने के सर्वे में महज ४७ फीसदी जापानी उत्तरदाता आने वाले समय में अपने देश की अर्थव्यवस्था की मजबूती के प्रति आश्वस्त दिख रहे थे।


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Palash Biswas
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