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Thursday, May 29, 2014

पक्के हरामजादे है हमारे मसीहा आजकल

मसीहियत बदला लेने में नहीं बल्कि माफ़ करने में विश्वास करती है, इसलिए तुम भी उन्हें माफ़ कर दो

हिन्दू तालिबान -27 

पक्के हरामजादे है हमारे मसीहा आजकल 

भंवर मेघवंशी
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बसपा मूलतः बामसेफ नामक एक अधिकारी कर्मचारी संगठन था ,जिसमे अनुसूचित जाति ,जनजाति ,अन्य पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक समुदाय के कर्मचारी शामिल थे ,निसंदेह इस संगठन ने सामाजिक चेतना जगाने का काम पूरी शिद्दत से किया ,बाबा साहेब के ' पे बैक टू सोसाईटी ' के सिद्धांत को आधार बना कर समाज के पढ़े लिखे तबके ने बहुजन समाज को संगठित करने ,जागृत करने तथा संघर्षशील बनाने के कार्य में अद्भुत सफलता पाई ,शुरुआत में कांशीराम इसका नेतृत्व कर रहे थे ,लेकिन जब उन्होंने बामसेफ और दलित शोषित समाज संघर्ष समिती ( डी एस फोर ) को बसपा में बदल डाला तो पीछे रह गए कुछ लोगों ने बामसेफ को समाप्त करने के बजाय जिंदा रखने पर बल दिया और इस काम में जुट गए ,फलतः आज बामसेफ अपने कई समूहों व गुटों में मौजूद है ,हर गुट स्वयं को असली साबित करने में लगा रहता है ,अलग अलग प्रान्तों में अलग अलग समूहों का जोर है ,राजस्थान में जो गुट ज्यादा प्रभावी है वह वामन मेश्राम का है ,ये महाशय भी शुरुआत में मान्यवर कांशीराम के घनिष्ठ सहयोगी रहे थे ,बाद में बसपा बन जाने के बाद इन्होने बामसेफ के एक धड़े को नेतृत्व देना शुरू कर दिया ,मेश्राम आज भी सर्वाधिक सक्रिय बामसेफ समूह के नेता है ..
एक बार बामसेफ के मेश्राम गुट ने ' आरक्षण समाप्ति की ओर ' विषय पर राजसमन्द जिला मुख्यालय पर सम्मलेन आयोजित किया ,मुझे भी बतौर वक्ता आमन्त्रित किया गया ,सो मैं भी गया ,कई वक्ता बोल चुके थे ,मुख्य वक्ता बामसेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वामन मेश्राम बोलने वाले थे ,इससे पहले ही केलवा राजकीय माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य सोहन लाल रेगर ने खड़े हो कर मंच पर मौजूद लोगो से एक सवाल पूंछा कि अगर सब लोगों को रोजगार का अधिकार मिल जाये तो क्या आरक्षण समाप्त हो सकता है ?बस इतनी सी बात पर माननीय वामन मेश्राम बुरी तरह भड़क गए ,वे सामान्य शिष्टाचार भी भूल गए और दलित गरिमा और स्वाभिमान की धज्जियाँ उड़ाते हुए बोले –रे रेगर ,तुझे प्रिंसिपल किसने बना दिया है ?सोहन लाल जी ने मेश्राम जी को टोका और बोले कि आप संसदीय भाषा नहीं बोल रहे है,माईंड योर लैंग्वेज .इस बात पर तो मेश्राम साहब बेकाबू ही हो गए ,बोले – ' मुझे तमीज सिखाता है ,मैं चांहू तो अभी मेरे लोग उठा कर इस सभा से तुझे बाहर फैंक देंगे ,चुपचाप बैठ ,सवर्णों के दलाल जैसे सवाल करता है .
बामसेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष जिन्हें माननीय कह कर लोग सम्मानित करते है और एक बड़ा नेता मानते है ,उनके द्वारा किये गए इस तरह के घटिया व्यव्हार से हर कोई स्तब्ध था ,पर वहां एक चुप्पी सी छाई हुयी थी ,कोई भी साहब के गुस्से का शिकार नहीं होना चाहता था ,पता नहीं सोहन जी की तरह किसी और को भी अपमानित होना पड़े ,इसलिए कोई कुछ नहीं बोला ,लेकिन मैं कैसे सहन करता,मैंने माइक पर जा कर अपना गुबार निकाल ही दिया कि – ' हम इस तरह के व्यवहार का समर्थन नहीं कर सकते है ,बहुजन नायकों की ऐसी बेलगाम भाषा को हम सहन नहीं करेंगे ,हमारी पूरी लड़ाई ही इज्जत ,स्वाभिमान और गरिमा की है ,अगर कोई भी ,चाहे वो वामन मेश्राम साहब ही क्यों न हो ,हमारे लोगो के स्वाभिमान को ठेस पंहुचायेंगे तो हम उनसे भी संघर्ष को तैयार है ,हम अनंत समय तक कथित अपने रहनुमाओं और परायों से लड़ेंगे ,रही बात आज के इस निकृष्ट व्यव्हार की तो मैं मंच की ओर से आदरणीय सोहन लाल जी रेगर से क्षमा प्रार्थना करता हूँ और इस सभा का बहिस्कार करता हूँ ,हमें ऐसे लोगो की जरुरत नहीं है ,जो सवालों ,असहमतियों और आलोचनाओं से डर जाते हो .ऐसा कायर नेतृत्व हमें मंज़ूर नहीं है ,हमें समावेशी और धीर, गंभीर तथा सबको सम्मान देने वाला सामूहिक नेतृत्व चाहिए ' . मैं यह कह कर मंच से नीचे आ गया ,मेरे पीछे पीछे बड़ी संख्या में शेष लोग भी निकल आये ,अन्य कई मंचस्थ लोगों ने भी सभा छोड़ दी ,बचे रहे केवल मेश्राम और उनकी चंदा उगाओ –चंदा खाओ टीम ..इस दुखद अनुभव के बाद मैंने बामसेफ से एक दूरी बना ली ,वैचारिक रूप से आज भी बामसेफ को स्वयं के नज़दीक पाता हूँ पर रहबरों की कथनी और करनी के फर्क ने मुझे उनसे जुड़ने से पहले ही तोड़ डाला .
अब सुनता हूँ कि वामन मेश्राम का धंधा जोर शोर से चल रहा है ,उनकी दुकान चल निकली है ,पुरे मसीहा बन बैठे है ,जय भीम के नारे को उन्होंने जय मूल निवासी में बदल डाला है ,बामसेफ से पेट नहीं भरा तो भारत मुक्ति मोर्चा खड़ा कर लिया और अब राज सत्ता की ओर बढ़ने के लिए बहुजन मुक्ति पार्टी बना ली है ,चंदा उगाही का काम बदस्तूर जारी है ,मिशन के नाम पर सब कुछ जायज हो गया है ,समाज के लिए जीवन देने वाले मसीहा अपने ही कार्यकर्ता की अपने से आधी उम्र की बेटी से परिनय सूत्र बंधन में बंध कर शादीशुदा हो गए है ,खुद की कोई फैक्ट्री तो उनकी चलती नहीं है कि अपनी बुढ़ापे की इस शादी का रिसेस्प्शन निजी पैसों से करते सो समाज से संग्रहित धन से ही शानदार आशीर्वाद समारोह कर डाला ,बातें अब भी मिशन की ही होती है ,जीवन में बड़े मजे है ,मंचो पर समाज परिवर्तन के उपदेश और खुद की ज़िन्दगी में रत्ती भर भी बदलाव नहीं ,यह क्या हो जाता है हमारे मसीहाओं को अचानक ? ज्यादातर दलित नेता थोड़ी सी प्रसिद्धी मिलते ही ओरतखोरी पर क्यों उतर आते है ,कई बार इन रहबरों की कारगुजारियां बेहद पीड़ा के साथ मिशनरी साथी सुनाते है ,तब कहना पड़ता है कि पक्के हरामजादे हो गए है हमारे मसीहा आजकल ..दलित वर्ग की विडम्बना यह है कि कोई भी बाबा साहब के नाम पर मुर्खतापूर्ण थियरीज लेकर आ जाये ,उसे ही माननीय या साहब मान लिया जाता है ,विगत कई वर्षों से बहुत सारी अमरबेलें दलित समाज के निरंतर सूखते जा रहे पेड़ पर फलती फूलती रही है जो साल भर घूम घूम कर ' पे बैक टू सोसाईटी ' के नाम पर लोगों को मुर्ख बनाती है ,चंदा उगाहती है और साल के आखिर में एक अधिवेशन करके हिसाब किताब पूरा कर देती है ,इनका यही काम हो गया है ,बस बाबा साहब 
की कृपा से सबकी दुकानें चल रही है ,कोई अगर इस दुकानदारी पर सवाल खडा कर दे तो उसे ' यूरेशियन ब्राहमणों का दलाल ' घोषित कर देते है या चंदे के कूपनों में घोटाले का मुख्य आरोपी करार देते है ,बस्स उनका काम चलता रहता है और दलित बहुजन समाज अपना सिर धुनता रहता है ,यह निरंतर प्रक्रिया है ..दशकों से चल रही है,मेरा मानना है कि जब तक दलित बहुजन मूलनिवासी समाज के लोग अपने ही मसीहाओं से जवाबदेही नहीं मांगेगे तब तक हर दौर हरामी मसीहाओं का दौर ही रहेगा ..( जारी )
-भंवर मेघवंशी 
लेखक की आत्मकथा ' हिन्दू तालिबान ' का सताईसवा अध्याय

লাল আলো নিভলে সবুজ আলো কিন্তু জ্বলছে না,গ্রামকে শহর করার উন্নয়ণে দিদির আবার লালে উত্তরণ পদ্মপ্রলয়ের মধ্যিখানে!

লাল আলো নিভলে সবুজ আলো কিন্তু জ্বলছে না,গ্রামকে শহর করার উন্নয়ণে দিদির আবার লালে উত্তরণ পদ্মপ্রলয়ের মধ্যিখানে!

পলাশ বিশ্বাস

প্রসঙ্গঃ

সিপিএম মুছে গেলে তৃণমূলের বিপদ

বামপন্থীরা মুছে গেলে আপাতদৃষ্টিতে তৃণমূলের খুব খুশি হওয়ার কথা। কিন্তু সেই মুছে যাওয়া স্লেটে বিজেপি যদি নিজের অঙ্ক কষতে এবং মেলাতে শুরু করে, সরকার-বিরোধী শক্তি যদি ক্রমশ তার দিকে কেন্দ্রীভূত হয়? জয়ন্ত বসু।

http://www.anandabazar.com/editorial/%E0%A6%B8-%E0%A6%AA-%E0%A6%8F%E0%A6%AE-%E0%A6%AE-%E0%A6%9B-%E0%A6%97-%E0%A6%B2-%E0%A6%A4-%E0%A6%A3%E0%A6%AE-%E0%A6%B2-%E0%A6%B0-%E0%A6%AC-%E0%A6%AA%E0%A6%A6-1.35773


লাল আলো নিভলে সবুজ আলো কিন্তু জ্বলছে না,গ্রামকে শহর করার উন্নয়ণে দিদির আবার লালে উত্তরণ পদ্মপ্রলয়ের মধ্যিখানে!


দিদির পরীক্ষায় দুচার অভাগা অভাগী ছাড়া সবাই লেটার!

রাজ্যের বাজেটের হিসাব খাতাখানি খোলা হল,কিন্তু যে কেন্দ্রের বিরুদ্ধে লাগাতার অভিযোগ সেই লালে লাল বিপ্লবের 1977 সাল থেকে পরিবর্তন জমানার মা মাটি সরকার রাজত্বেও,তা মিলিয়ে যে 78 কোটি টাকা খরচ হওয়ার কথা ছিল,সে হিসাব করেননি দিদি!


দিদি হিসাব করেননি কেন্দ্রীয় প্রকল্পের টাকার শেষ পর্যন্ত কি হল!


মোদীর শপথ গ্রহণের আগে ও পরে মানুষের ট্যাক্সের টাকায় কাগজে কাগজে দেদার উন্নয়নের বন্যা বইয়ে বাংলা এক নাম্বারের উচ্চকিত ঘোষণায় মোদী যাদের ধরেছেন আষ্টে পৃষ্ঠে,সেই 18 থেকে 35 বছরের রুজি রোজগারের ব্যবস্থা কিন্তু হচ্ছেই না!


প্রাথমিক শিক্ষক পদে 47 লক্ষ প্রার্থী যে রাজ্যে স্বাভাবিকের সত্য কিন্তু বিচিত্র সমাজ বাস্তব,কোটি চাকরির ছিটে ফোঁটাও যদি না দিতে পারেন দিদি,ত 34 সীটে 34 সালের বিপর্যয় ঘনিয়ে আসবেই!


হিন্দিতে ইংরেজিতে আমি ও আমার বন্ধু বাবা সাহেব আম্বেডকর সাহেবের নাত জামাই এবং ভারতবর্ষে তথ্য প্রযুক্তি আমদানিতে যে ব্যক্তির স্যাম পিত্রোদার মতই অবদান এবং যিনি ঘটনাচক্রে আমাদেরই খড়গপুর আইআইটিতে অধ্যাপক আজকাল,বার বার লিখেছি আইডেন্টিটি পলিটিক্স দিয়ে ক্ষমতা দখল হয়,ভোট জেতার মেরুকরণ হয়,সত্যিকারের পরিবর্তন হয় না!


আমারা বার বার লিখেছি,আম্বেডকরের জাতি বিনাশ প্রকল্পকে পিছনে ফেলে সংরক্ষণ রাজনীতিতে শক্তশালী গুটি কয়েক জাতির ক্ষমতা দখল হলেও ছ হাজার জাতির ও বেশি ভাগে বিভক্ত হিন্দু সমাজের উন্নয়ন ধর্মের ও বিপ্লবের জিগির তুলে নিতান্তই চরম বিশ্বাসঘাতকতা!


আদিবাসীরা ত বর্ণবৈষম্যের বধ্যভূমিতে জল জমি জহ্গল নাগরিকত্ব হারাচ্ছেনই!


যে নজরুল ইসলাম আপনার চক্ষুশুল তিনি আমার চাইতে হাজার গুণ ভালো বাংলায় বুঝিয়ে দিয়েছেন,মুসলিমদের কি করণীয় এবং তাঁদের জন্য হচ্ছেটা কি!


দিদি,  হরিবোল না বলে,মাতাম না দিয়ে,ধুলো কাদা না মেখে,পুরোহিত বর্জন না করে,আপনি মতুয়া!


দিদি,আপনি লালু সংহারক উপেন বিশ্বাসকে মন্ত্রী করে সার্বজনীন জীবনের দায়বদ্ধতা থেকে ভ্যানিশ করেছেন!


দিদি,আপনি মাতা বীণাপাণিদেবির এক সন্তানকে কিছু না করার জন্যই কেবিনেট মন্ত্রী করেছেন অন্যজনের লাল রং নজরআন্দাজ করে সংসদে পাঠিয়েছেন!


মতুয়া ভোট দখলের জন্যমরিচঝাংপি গণহত্যার ধুয়ো তুলেছেন,কিন্তু তদন্ত আজও শুরু করেননি,কারণ সেই দিন যাদের হাত রাঙা হয়েছিল মতুয়া দলিত শরণার্থী রক্তে,তাঁদের অনেকেই আপনার ক্ষমতাদখলের উত্সমুল!


আপনি ভোটের আগে বলেছেন,বাংলাদেশি বলে কাউকে তাড়াতে হলে,সবার আগে আপনাকে তাড়াতে হবে!

হরিপালের রাজ্যাভিষেক মিটতে না মিটতে,মুকুল রায় ও অমিত মিত্রের প্রথম সারিতে বসে মিষ্টিমুখ করে ফিরতে না ফিরতে রাজ্যে রাজ্যে বাংলাদেশি বিতাড় শুরু,আবার বাংলাতে কথা বললেই বাংলাদেশি!


মা মাটি মানুষের সরাকরি রাজত্ব সেই শ্রীরামপুরি মেরুকরণ ও আপনার 34 সীট প্রাপ্তি ও খাস ভবানীপুরে লজ্জাজনক প্রত্যাথিক হোযার অন্তরাল পেরিয়ে গ্রেফ্তার বাংলাদেশির সংখ্যা এক শ ছাড়িয়েচে,সবাই কি বাংলাদেশি!

ভোটের জন্য যে ভাষায় যুদ্ধঘোষণা করেছিলেন আপনি,আসল যুদ্ধের সময় আপনি সেখানে থাকছেনই না!


থাকতে পারেন না,কারণ,আপনি নাগরিকত্ব সংশোধণী বিল পাশ করার সময় গৌরিক সরকারে রেল মন্ত্রী ছিলেন,যার পক্ষে বিলটি পাশ করেছিলেন লালকৃষ্ণ আডওয়াণী দায়িত্ব ত আপনারও ভূমিকা ত আপনারও মরিচঝাঁপির সময়েও আপনি ছিলেন জঙ্গী কংগ্রেস নেতা,কোনো বারই আপনি ব্রাত্য জনের পক্ষে দাঁড়াননি!


অথচ মোদী যখম সুনিয়োজিত মেরুকরণের জন্য অনুপ্রবেশকারি বনাম শরণার্থী তত্ব দিয়ে ভারত ভাগের দ্বিরাষ্ট্র বিপর্যয় জেকে আনলেন সব বাংলাভাষাভাষিদের জন্য,আপনি সিপিএম কংগ্রেস শেষ করার তাকীদে এতদিন নির্বাক অবাক থাকার পরে কোথাকার কে হরিদাসপালের বিরুদ্ধে জেহাদ ঘোষণা করে আপনার এই সাধের সবুজ দ্বীপে পদ্মের চাষ আমদানি করলেন!


আপনার শিরঃপীড়া যথার্থই!


কিন্তু দিদি সন্ত্রাস দিয়ে,কংগ্রেস এবং সিপিএম শেষ করলে জাতের রাজনীতি করলে যেমন হিন্দু জাতীয়তা উন্মাদের স্বার্থ সিদ্ধি হয়!


এবং যা করতে গিয়ে মুলাযম,লালূ, নীতীশ, মায়াবতীর হাত ধরে ধরে বাম নেতৃত্ব সারা দেশে বামপন্থার মৃত্যুঘন্টা বাজিয়ে দিয়েছেন!


আপনিও বুঝতে পারলেন না যে লাল নিভলে সব সময় সবুজ হবে,এমনটা ট্র্যাফিকে হলেও রাজনীতিতে হয় না আর দিকে দিকে লাল নিভে পদ্ম হয়ে গেল!


আপনি পৌর নির্বাচনেও ভয় পাচ্ছেন এবং ঘটনা হল আপনার বিধানসভা এলাকায় আপনি জনগণের আস্থা হারিয়েছেন,আপনার সবুজ দ্বীপের এপিসেন্টার অন্ততঃ কুড়িটি সংসদীয় এলাকায় আপনি কংগ্রেস সিপিএম নিকেশ করে জয়ের ধারা অব্যাহত রেখেছেন অবশ্যই,কিন্তু আপনার এবং অবশ্যই বাম ও কংগ্রেস ভোট কেটে দিক্ দিগন্তে পদ্মগন্ধে মম!


এমনকি আপনার সাধের সিঙ্গুরেও যে টাটাকে অনশন আন্দোলনে বাংলা ছাড়া করেছেন,তাঁরাই নেনো বাঁচানোর আন্দোলন শুরু করেছেন একালের আপনারই অনুগামিরা গৌরিক পতাকা নিয়ে.যারা আবার সবাই এক সময় লালে লাল  ছিলেন সবাই!


পরিবর্তন চক্র থামে না,থামবে না!


যারা লাল ছিলেন.তাঁরা সবুজ হলেন এবং তাঁরাই আবার গৌরিক!

পারলে সময় করে সিঙ্গুর নন্দীগ্রাম জমি আন্দোলনের সময় বাম জমানার হিমালয়ী ভুলের তালিকাটি আরেকবার দেখে নিন,যেহেতু আপনিও সেই রাস্তাতেই হাঁটছেন!


দিদি, আপনি জানেন না,চল্লিশ বছর পর পাণিহাটিতে বাম দখল মক্ত করে সবুজায়মের ফলে আমরা পাণীয় জল কিনে প্রাণধারণ করছি,আপনার ভায়েরা সময় করে জনগণের দুঃখ তকলিফ বুঝতেই চাননা!


এলাকা দখল করে পরিবর্তন তে বামেরাও করেছিল তবু তাঁদের 34 সাল ক্ষমতা ছিল!


বুদ্ধবাবু একদিন আপনাকেই চ্যালেন্জ করে বলেছিলেন- আমরা 235!


আপনিও বামবধে বার বার উচ্ছসিত,উচ্চকিত!


কিন্তু গ্রামকে শহর করার আপনার বামপন্থায় উত্তর দক্ষিণ 24 পরগণা,হাওড়া হুগলি, নদীয়া, বর্দ্ধমান, মালদহ, মুর্শিদাবাদ সর্বত্রই কিন্তু আপনি সিঙ্গুর নন্দীগ্রামের পত্তন করছেন!


আপনি কাশ্মীর প্রসঙ্গে একটি কথা ও বলছেন না কেন!

370 নিয়ে আপনি মন্তব্য করছেন না কেন!


রাজ্য সরকার আগেই জানিয়েছিল, জুন-জুলাইয়ে নির্ধারিত সময়ে এই ১৭টি পুরসভায় ভোট করতে তারা নারাজ৷ এ বার এই ১৭টি পুরসভার মধ্যে যে সাতটি রাজ্য মন্ত্রিসভার সিদ্ধান্তমতো কর্পোরেশন এলাকায় পড়বে, সেগুলিতে ডিলিমিটেশন বা সীমানা পুনর্বিন্যাসের কাজ শুরু করল প্রশাসন৷ ডিলিমিটেশনের পর হবে আসন সংরক্ষণের কাজ৷ রাজ্য প্রশাসন সূত্রে খবর, গোটা প্রক্রিয়া সম্পন্ন করতে কমপক্ষে চার মাস সময় লাগবে৷ আইন অনুযায়ী, ডিলিমিটেশনের পর আসন সংরক্ষণ প্রক্রিয়া শেষ হওয়ার ৬ মাসের মধ্যে ভোট করতে হবে৷


এই সাতটি পুরসভা ছাড়া বাকি ১০টি পুরসভাতেও নির্ধারিত সময়ে ভোট হওয়ার কোনও সম্ভাবনা নেই৷ ১৭টি পুরসভায় ভোট কবে হবে? জবাবে মঙ্গলবার পুর ও নগরোন্নয়নমন্ত্রী ফিরহাদ হাকিম বলেন, 'আমরা একসঙ্গে ভোট করব৷ পুরসচিব ইতিমধ্যেই রাজ্য নির্বাচন কমিশনকে চিঠি দিয়ে জানিয়েছেন, ডিলিমিটেশনের কাজ শুরু হয়েছে৷ তা শেষ হওয়ার পরেই নির্বাচন হবে৷' সরকারি সূত্রে খবর, ভোট একদিনেই হবে৷ তবে রাজ্য নির্বাচন কমিশনে এখনও পর্যন্ত কোনও চিঠি পৌঁছয়নি৷ কমিশনের এক কর্তা বলেন, 'আমরা সরকারের থেকে এ ব্যাপারে কোনও চিঠি এখনও পর্যন্ত পাইনি৷'


যে ১৭টি পুরসভায় আগামী ১৪ থেকে ৩১ জুলাইয়ের মধ্যে বর্তমান বোর্ডের মেয়াদ শেষ হচ্ছে, তার মধ্যে মধ্যমগ্রাম, রাজারহাট-গোপালপুর, মহেশতলা, দমদম এবং দক্ষিণ দমদম পুরসভা এলাকা পুনর্বিন্যাস করে প্রস্তাবিত চারটি নতুন কর্পোরেশনের আওতাভুক্ত হবে বলে সোমবার রাজ্য মন্ত্রিসভা সিদ্ধান্ত নিয়েছে৷ এই পাঁচটি ছাড়াও কুলটি পুরসভা এলাকা যুক্ত হবে আসানসোল কর্পোরেশনে৷ ফলে আসানসোল কর্পোরেশন এবং বাকি ৬টি পুরসভায় ডিলিমিটেশন এবং আসন সংরক্ষণ প্রক্রিয়া হয়ে যাওয়ার পরেই নির্বাচন হবে৷ পুরবোর্ডগুলির মেয়াদ শেষ হয়ে যাওয়ার পর সংশ্লিষ্ট পুরসভাগুলির কাজ চালানোর জন্য সরকার প্রশাসক বসাবে৷ এতে অবশ্য কোনও অসুবিধা নেই বলে জানিয়েছেন ফিরহাদ হাকিম৷ তাঁর কথায়, 'জনগণের স্বার্থে প্রশাসক বসানোই যায়৷ অতীতে কলকাতা পুরসভায় দীর্ঘ দিন প্রশাসক হিসাবে দায়িত্ব সামলেছেন প্রশান্ত শূর৷'


পুরনির্বাচন পিছিয়ে যাওয়ার ব্যাপারে রাজ্য নির্বাচন কমিশনের তরফে কেউ সরকারি ভাবে কোনও প্রতিক্রিয়া দেননি৷ এ ব্যাপারে ইতিমধ্যেই রাজ্যপাল এমকে নারায়ণনের সঙ্গে দেখা করে তাঁর হস্তক্ষেপ প্রার্থনা করেছেন রাজ্য নির্বাচন কমিশনার মীরা পাণ্ডে৷ কমিশন সূত্রে খবর, এ ব্যাপারে রাজ্যপালের মতামত জানার পরেই কমিশন পরবর্তী পদক্ষেপ করবে৷ নির্ধারিত সময়ে ভোট নিশ্চিত করতে আদালতে যাওয়া হবে কি না, সে ব্যাপারেও কমিশন আইনি পরামর্শ নিচ্ছে৷


রাজ্যে নতুন আরও ৫ পুরসভা


mamata

এই সময় ডিজিটাল ডেস্ক: রাজ্যে বাড়ানো হচ্ছে মিউনিসিপ্যাল কর্পোরেশনের সংখ্যা। সোমবার নতুন ৫টি পুরসভা তৈরির সিদ্ধান্ত নেওয়া হয়েছে রাজ্য মন্ত্রিসভার বৈঠকে। নতুন এই কর্পোরেশনগুলি হল দমদম, বারাসত, শ্রীরামপুর, মহেশতলা এবং ব্যারাকপুর। আবার কাজের পরিধি বাড়ানো হচ্ছে হাওড়া, চন্দননগর, আসানসোল কর্পোরেশনের।


এদিন সাংবাদিক বৈঠকে মুখ্যমন্ত্রী মমতা বন্দ্যোপাধ্যায় জানিয়েছেন, পরিকাঠামোগত এবং এলাকার উন্নয়নের জন্য এই সিদ্ধান্ত নেওয়া হয়েছে। বালি পুরসভাকে এবার নিয়ে আসা হচ্ছে হাওড়া মিউনিসিপ্যাল কর্পোরেশনের আওতায়। আবার রানিগঞ্জ, কুলটি, জামুরিয়া আসছে আসানসোল কর্পোরেশনের অধীনে। উত্তরপাড়া, কোন্ননগর এবং রিষড়া পুরসভা এবার চন্দননগরের অধীনে থাকবে।


যে যে মিউনিসিপ্যালিটি নিয়ে নতুন কর্পোরেশন তৈরি হচ্ছে সেগুলি হল--


দমদম- কামারহাটি, খড়দহ, পানিহাটি, দমদম, উত্তর দমদম।

বারাসত- রাজারবাট-গোপালপুর, বারাসত, নিউ ব্যারাকপুর।

শ্রীরামপুর- বাঁশবেড়িয়া, চুঁচুড়া, ভদ্রেশ্বর, চাঁপদানি, বৈদ্যবাটি।

মহেশতলা- ভোজালি, মহেশতলা, আমতলা, সাতগাছিয়া।

ব্যারাকপুর- টিটাগড়, ব্যারাকপুর, ভাটপাড়া, গারুলিয়া, নৈহাটি, কাঁচড়াপাড়া, হালিশহর।


অন্য দিকে, এদিনের বৈঠকে চিকিৎসা ক্ষেত্রে শিক্ষক ও ডাক্তারদের অবসরের বয়সসীমা বাড়ানোর সিদ্ধান্ত নিল রাজ্য সরকার৷ শিক্ষক ও চিকিত্‍‌সকদের অপ্রতুলতার কারণে এই সিদ্ধান্ত নিয়েছে রাজ্য সরকার। চিকিৎসকদের অবসর নেওয়ার বয়স ৬০ থেকে বাড়িয়ে ৬২ বছর করে দেওয়া হয়েছে৷ একই সঙ্গে এদিন মেডিক্যাল শিক্ষকদের বয়স ৬২ থেকে বাড়িয়ে ৬৫ বছর করার সিদ্ধান্ত নেওয়া হয়েছে৷ পাশাপাশি নতুন আরও ৮টি হাসপাতাল তৈরির সিদ্ধান্ত নিয়েছে রাজ্য সরকার।


৩৭০ বাতিল মানে কাশ্মীরকে অস্বীকার, মত ওমর-মুফতির


গৌতম হোড় ও শিলাদিত্য সাহা


নয়াদিল্লি ও কলকাতা: সঙ্ঘ পরিবারের কাশ্মীর লাইন নিয়ে জন্মলগ্নেই বিতর্কে জড়াল নরেন্দ্র মোদীর সরকার৷ পাকিস্তানের সঙ্গে সম্পর্ক মেরামতির প্রচেষ্টার মধ্যেই জম্মু ও কাশ্মীরকে বিশেষ মর্যাদা দেওয়া ৩৭০ ধারা বাতিলের প্রস্তাব নিয়ে বিতর্ক তুঙ্গে উঠল বুধবার৷ আর তাতে ইন্ধন জোগালেন আরএসএস নেতারাও৷


মঙ্গলবারই ন্যাশনাল কনফারেন্সের নেতা তথা জম্মু-কাশ্মীরের মুখ্যমন্ত্রী ওমর আবদুল্লা বলেছিলেন, 'হয় ৩৭০ ধারা থাকবে, না হলে জম্মু ও কাশ্মীর ভারতের বাইরে চলে যাবে৷' বুধবার তার জবাবে আরএসএস নেতা রাম মাধব টুইট করে বলেন, 'জম্মু ও কাশ্মীর ভারতের অংশ থাকবে না? ওমর কি জম্মু ও কাশ্মীরকে বাবার জমিদারি ভাবছেন? ৩৭০ অনুচ্ছেদ থাকুক বা না থাকুক, জম্মু ও কাশ্মীর ভারতের সঙ্গেই থাকবে৷' তবে আরএসএস-এর কড়া প্রতিক্রিয়া নিয়ে মাথা ঘামাচ্ছে না ন্যাশনাল কনফারেন্স৷ এ দিন ওমরের মন্তব্য, 'আরএসএসকে কোনও জবাবদিহি করব না৷ আমার দায়বদ্ধতা জম্মু-কাশ্মীরের মানুষের প্রতি৷'


একই সঙ্গে ন্যাশনাল কনফারেন্সের প্রশ্ন, ৩৭০ ধারা বিলোপ করে কি কেন্দ্রীয় সরকার ভারত রাষ্ট্রে কাশ্মীরের অন্তর্ভূক্তিকেও বাতিল করতে চাইছেন? কারণ ওই বিশেষ মর্যাদার ছায়াতেই কাশ্মীরের সঙ্গে ভারতের সংযুক্তিকরণ হয়েছিল৷ মেহবুবা মুফতির পিপল্স ডেমোক্র্যাটিক পার্টিরও (পিডিপি) দাবি, যাঁরা এই ধারা বিলোপের কথা ভাবছেন তাঁরা ইতিহাস বা ভারতের সংবিধান-কোনওটাই জানেন না৷ আরএসএস অবশ্য সংঘাতের পথেই হাঁটছে৷ ওমরকে একহাত নেওয়ার পাশাপাশি রাম মাধবের বক্তব্য, মঙ্গলবার পিএমও-র প্রতিমন্ত্রী জিতেন্দ্র সিং দেশজোড়া আলোচনার ডাক দিয়ে ভুল করেননি৷ তিনি দলের দীর্ঘদিনের অবস্থানের কথা বলেছেন৷ অন্য দিকে সঙ্ঘের অন্যতম শীর্ষনেতা সুরেশ সোনির সঙ্গে এ দিন স্বরাষ্ট্রমন্ত্রী রাজনাথ সিংয়ের বৈঠক হয়৷ বিজেপি সূত্রের খবর, সেখানে সঙ্ঘ নেতৃত্বও জানিয়েছেন, ৩৭০ অনুচ্ছেদ বিলোপ করা নিয়ে আলোচনা শুরুর রোডম্যাপ বানাক সরকার৷ সেইমতো দেশজুড়ে এই বিষয়ে বিতর্ক হোক৷ মুসলিম সংগঠন, বিভিন্ন প্রতিষ্ঠান, জম্মু ও কাশ্মীরের লোকেদের সঙ্গে আলোচনা হোক৷ সঙ্ঘের নেতা মাধব গোবিন্দ বৈদ্যেরও দাবি, এটা নিয়ে বিতর্ক হোক৷ তার পর যা সিদ্ধান্ত হবে, সেটা সকলের মেনে নেওয়া উচিত৷ প্রসঙ্গত, সঙ্ঘ নেতৃত্বের সঙ্গে বৈঠকের পর প্রধানমন্ত্রী মোদীর সঙ্গেও বৈঠক করেছেন রাজনাথ৷


বিতর্ক অবশ্য শুরু হয়েই গিয়েছে৷ কারণ ন্যাশনাল কনফারেন্সের দাবি, জম্মু-কাশ্মীরের বিশেষ মর্যাদা বিলোপের ক্ষমতা মোদীর সরকারের নেই৷ দলের অতিরিক্ত সাধারণ সম্পাদক মুস্তাফা কামাল বলছেন, 'ভারতীয় স্বাধীনতা আইন (১৯৪৭) অনুযায়ী ১৯৪৭ সালের ২৬ অক্টোবর কাশ্মীরের মহারাজা হরি সিং ভারতের সঙ্গে যে সংযুক্তির চুক্তি করেন, তার শর্তগুলি নিয়েই তৈরি হয় ৩৭০ ধারা৷


ভারতের সঙ্গে জম্মু-কাশ্মীরের সাংবিধানিক সম্পর্ক ও একাত্মতা দাঁড়িয়ে রয়েছে ওই একটি ধারার উপরেই৷ এবং ভারতের সংসদ দলমত নির্বিশেষে এই বিশেষ মর্যাদায় সিলমোহর দিয়েছে৷ আজ সেটা বাতিলের কথা উঠলে তো সংযুক্তিকরণকেই অগ্রাহ্য করতে হয়৷ বিজেপি বা আরএসএস কি সেটা চায়?' কেন্দ্রকে মুস্তাফার হুঁশিয়ারি, 'আরও একবার দেশভাগের রাস্তায় যাবে না৷' কিন্ত্ত হঠাত্‍ এই বিতর্ক কেন? রাজনীতিকদের মত, বিজেপি একার ক্ষমতায় কেন্দ্রে সরকার গঠনে সফল হওয়ায় আরএসএস চাইছে তাদের দীর্ঘদিনের বকেয়া হিন্দুত্বের কর্মসূচি এ বার রূপায়িত হোক৷ তাতে তিনটি বিতর্কিত বিষয় রয়েছে৷ ৩৭০ ধারা, অভিন্ন দেওয়ানি বিধি ও রামমন্দির নির্মাণ৷ আর সরকার গঠনের প্রথম দিনেই ৩৭০ ধারা বিলোপের প্রসঙ্গ ওঠায় একে সাম্প্রদায়িক শক্তির ষড়যন্ত্র হিসেবেই দেখছে জম্মু-কাশ্মীরের রাজনৈতিক দলগুলি৷


ওমর আবদুল্লার রাজনৈতিক সচিব তনবীরের বক্তব্য, 'আপনি আইনি ভাবে এই বিশেষ মর্যাদা কেড়ে নিতে পারেন না৷ কারণ এটা সংবিধানের ধারা৷ স্বয়ং রাষ্ট্রপতিও যদি এই ধারা বিলোপের সুপারিশ করেন, তা হলেও সেই সুপারিশ খতিয়ে দেখার অধিকার একমাত্র জম্মু-কাশ্মীর সংবিধান সভার (কনস্টিটিউয়েন্ট অ্যাসেম্বলি) ছিল৷ ১৯৫৬ সালে জম্মু-কাশ্মীর সংবিধান সভা ভেঙে নতুন সংবিধান রচনা হয় এবং রাজ্য বিধানসভা গঠিত হয়৷ কাজেই এখন আর ৩৭০ ধারা বিলোপের অধিকার কারও নেই৷ তা ছাড়া সংবিধানের ১ নম্বর ধারায় ভারতের যে রাজ্যতালিকা আছে, সেখানে জম্মু-কাশ্মীরের নাম ঢুকেছে ৩৭০ ধারার ভিত্তিতেই৷ মূল ধারা বিলোপ হলে তার প্রভাব তো রাজ্য তালিকাতেও পড়বে!' পিডিপি নেত্রী মেহবুবা মুফতি বলছেন, 'জিতেন্দ্র সিং রাজ্য ভাগের চেষ্টা করছেন৷ বিতর্ক এটা নিয়ে হওয়া উচিত, ৩৭০ ধারাকে কী করে আরও শক্তিশালী করা যায়৷' দলের মুখপাত্র নঈম আখতারেরও সাফ কথা, '৩৭০ ধারা নিয়ে সমঝোতা অসম্ভব৷ বিশেষ মর্যাদার শর্তেই ভারতীয় সংসদে যোগ দিয়েছিল কাশ্মীর৷' বিজেপি অবশ্য এ দিন পুরোপুরি চুপ৷


প্রসঙ্গত, ৩৭০ ধারায় প্রতিরক্ষা, বিদেশনীতি ও যোগাযোগের ক্ষেত্র ছাড়া ভারতীয় সংসদের অনুমোদিত কোনও আইন রাজ্য সরকারের অনুমোদন ছাড়া জম্মু-কাশ্মীরে চলে না৷ আর জন্মলগ্নে জনসঙ্ঘ ও পরে বিজেপি কাশ্মীরকে এই বিশেষ মর্যাদা দেওয়ার বিপক্ষে ছিল৷ এই অবস্থায় মঙ্গলবারই প্রধানমন্ত্রীর কার্যালয়ের প্রতিমন্ত্রী ৩৭০ ধারা নিয়ে বিতর্ক চাওয়ায় কংগ্রেসের দাবি, এর পিছনে নিঃসন্দেহে সঙ্ঘ পরিবার আছে৷ কংগ্রেস নেতা অভিষেক মনু সিংভির মন্তব্য, 'বিজেপি জানে, ৩৭০ ধারা বিলোপ করা সম্ভব নয়৷ সংবিধানগত ভাবে কিংবা বাস্তব পরিস্থিতি অনুসারেই অসম্ভব৷ তবু ওঁরা এ সব কথা বলছেন রাজনৈতিক উদ্দেশ্যে৷ সামনে মহারাষ্ট্র, হরিয়ানা ও কিছুদিনের মধ্যে জম্মু ও কাশ্মীরের বিধানসভা ভোটে ভালো ফল করা৷ সে জন্যই এই প্রশ্ন তুলে তারা একটা বিভাজন তৈরি করতে চায়৷'

http://eisamay.indiatimes.com/nation/dispute-arises-on-article-370/articleshow/35708723.cms

সন্তুষ্ট মমতার খাতায় ভালো নম্বর মন্ত্রীদের


mamata

পার্থসারথি সেনগুপ্ত


মমতার মার্কশিটে স্টার আর ফার্স্ট ডিভিশনের ছড়াছড়ি!


মন্ত্রীদের কাজের মূল্যায়নে উদার হাতেই 'মার্কস' দিলেন মুখ্যমন্ত্রী মমতা বন্দ্যোপাধ্যায়৷ বুধবার টাউন হলে প্রশাসনিক পর্যালোচনার পরীক্ষায় বেশির ভাগ মন্ত্রীই ভালো ভাবেই উতরে গিয়েছেন৷ খারাপ পরীক্ষার্থীর তকমা একাধিক মন্ত্রীর মিলেছে বটে, কিন্ত্ত সে সংখ্যাটা কম৷ তবে সব মন্ত্রীকেই কাজে আরও মনোযোগী হতে নির্দেশ দিয়েছেন মমতা৷ বলেছেন, শুধু প্রশাসনিক স্তরে ভালো ভাবে কাজ করলেই হবে না, তার বার্তা রাজ্যবাসীর ঘরে ঘরে পৌঁছে দেওয়ার মতো রাজনৈতিক দায়িত্বও মন্ত্রীদের পালন করা জরুরি৷ লোকসভা ভোটে শাসকদলের নজরকাড়া সাফল্যের রেশ থাকতে থাকতেই যে মুখ্যমন্ত্রী আসন্ন পুরনির্বাচন ও ২০১৬ সালের বিধানসভা ভোটকে পাখির চোখ করে এগোচ্ছেন মুখ্যমন্ত্রী, তা এদিনের বৈঠকের সুর থেকে স্পষ্ট৷


বিভিন্ন দপ্তর পরিকল্পনা খাতে বাজেট বরাদ্দের কত শতাংশ নির্দিষ্ট সময়সীমার মধ্যে সুষ্ঠু ভাবে খরচ করতে পেরেছে, এই প্রাথমিক শর্তটাই ছিল সংশ্লিষ্ট মন্ত্রীদের পরীক্ষায় উতরোনোর চাবিকাঠি৷ সেখানেই দুরন্ত স্কোর করেছেন সুব্রত মুখোপাধ্যায় বা রাজীব বন্দ্যোপাধ্যায়ের মতো মন্ত্রীরা৷ যেমন, রাজীববাবু বরাদ্দের চেয়েও বেশি খরচ করেছেন, যে পরিসংখ্যানটা প্রায় ১০২ শতাংশ৷ রাজীববাবুর অবশ্য প্রতিক্রিয়া, 'মুখ্যমন্ত্রীর নির্দেশ মেনেই আমি সফল৷'


মমতার মার্কশিটে ভালো বা ফার্স্ট ডিভিশন পেয়েছে যে সব দপ্তর, সেগুলির খরচের হিসেবও একশো শতাংশের কাছাকাছি৷ আবাসনমন্ত্রী অরূপ বিশ্বাসের বাজেট বরাদ্দ খরচ হয়েছে ৯০ শতাংশের উপর৷ সমবায় মন্ত্রী রচপাল সিংও প্রায় ৯০ শতাংশ টাকা খরচ করেছেন বলে খবর৷ সদ্যপ্রাক্তন হয়ে যাওয়া তথ্যপ্রযুক্তিমন্ত্রী পার্থ চট্টোপাধ্যায়ও এই বন্ধনীতে আছেন৷ তাঁর জায়গায় তথ্যপ্রযুক্তির ভার নেওয়া অমিত মিত্রকে মুখ্যমন্ত্রী বলেছেন, তথ্যপ্রযুক্তিতে বকেয়া প্রকল্পগুলি রূপায়ণ করতে৷


মার্কশিট খারাপ, এমন মন্ত্রীদের মধ্যে রয়েছেন বিচারবিভাগীয় মন্ত্রী চন্দ্রিমা ভট্টাচার্য৷ তিনি তাঁর দপ্তরের বরাদ্দের ৭৩.১৫ শতাংশ খরচ করতে পেরেছেন৷ একই বন্ধনীতে রয়েছেন পরিবেশমন্ত্রী সুদর্শন ঘোষদস্তিদার, পরিসংখ্যান ও প্রকল্প রূপায়ণ মন্ত্রী রবীন্দ্রনাথ ভট্টাচার্য এবং কারিগরি শিক্ষামন্ত্রী উজ্জ্বল বিশ্বাস৷ ফেল করেছে তিনটি জেলাও৷ উত্তর ও দক্ষিণ দিনাজপুর এবং সাবিত্রী-কৃষ্ণেন্দুর জেলা মালদহ৷


কেন তাঁদের ফল খারাপ হল? চন্দ্রিমাদেবীর ব্যাখ্যা, 'আমার দপ্তরে অনেক ক্ষেত্রেই টাকা খরচ করার ক্ষেত্রে পদ্ধতিগত কিছু বিষয় মেনে এগোতে হয়৷ ধরা যাক, জেলা স্তরে আদালত ভবন বানাতে গেলে হাইকোর্টকে ছুঁইয়ে এগোতে হয়৷ মুখ্যমন্ত্রী অবশ্য ঠিকই বলেছেন যে, উন্নয়ন খাতে আরও খরচ করতে হবে৷ এ ব্যাপারে আমরা পরিকল্পনামাফিক এগোব৷' একই যুক্তি বাকিদেরও৷ পরিবেশমন্ত্রী বলেন, 'আমাদের বহু প্রকল্পই রূপায়িত হয় অন্য দপ্তরের মাধ্যমে৷ দ্বিতীয়ত, বিশ্বব্যাঙ্কের অর্থানুকূল্যে যে সব প্রকল্প আছে, তাতে টেন্ডার করার ক্ষেত্রে কড়া শর্ত মেনে চলতে হয়৷ প্রকল্পের স্বার্থে হয়তো কিছু বেশি টাকার টেন্ডার ডাকা হলেও, তা নাকচ হয়ে যায়৷ আবার নতুন করে টেন্ডারের পদ্ধতি শুরু হয়৷ স্বভাবতই, এসব ক্ষেত্রে আমাদের দপ্তরের তরফে ম্যাচিং গ্রান্ট ছাড়তে দেরি হয়ে যায়৷ দশ-বারো কোটি টাকা বাকি পড়ে থাকে৷' উজ্জ্বলবাবুর প্রতিক্রিয়া, 'আমরা তো ব্লক স্তরগুলোতেও আইটিআই গড়ার চেষ্টা করছি৷'


রবীন্দ্রনাথবাবুর যুক্তি, তাঁর যে দপ্তর, তাতে সরাসরি জনস্বার্থে বরাদ্দ অর্থ ব্যয় করার কোনও রাস্তা নেই৷ উদাহরণ দিয়ে তিনি বলেন, 'আমি তো চাইলেই রাস্তা বানাতে পারব না৷ ফলে, পরিকল্পনা খাতে আমার দপ্তরের বরাদ্দ যে পাঁচ কোটি টাকা, তার অর্ধেকও খরচ হয়নি৷ এ বার ভোটের জন্যও কাজ ব্যাহত হয়েছে৷ তবে এ বার যে ছ' কোটি টাকা বরাদ্দ হয়েছে, চলতি আর্থিক বছরে তার একশো শতাংশই ব্যয় করতে পারব৷'


ঘটনা হল, মুখ্যমন্ত্রীর বক্তব্যই প্রতিফলিত হয়েছে রবীন্দ্রনাথবাবুর এই যুক্তিতে৷ কারণ, প্রায় আড়াই ঘণ্টার মূল্যায়নী বৈঠকের সূচনাতেই মমতা জানান, লোকসভা ভোটপর্বে নির্বাচনী বিধির কারণে বিভিন্ন দপ্তর ও বিভাগের কাজ ব্যাহত হয়েছে৷ বেশ কয়েক মাস নষ্টও হয়েছে৷ সেটা সামাল দিতে মন্ত্রীদের সতর্ক হতেও নির্দেশ দিয়েছেন তিনি৷


সফল মন্ত্রীরা কী বলছেন? সুব্রতবাবু এখনই ভবিষ্যতের দিশা নিয়ে ভাবছেন৷ তিনি বলেন, 'অনেক কাজই হয়েছে৷ এ বার জল সরবরাহের উপর আরও নজর দিতে হবে৷ মুখ্যমন্ত্রীও এটা বলেছেন৷ আবার ১০০ দিনের কাজেও আমাদের সাফল্য ধরে রাখতে হবে৷' সাধনবাবু সাফল্যের মন্ত্রগুপ্তি হিসেবে বলেছেন, 'লেগে থাকতে হয়৷ আমার দপ্তরে মানুষ আসে এসি মেশিন খারাপের অভিযোগ নিয়ে, আবার চিট ফান্ডের হাতে সর্বস্ব খুইয়েও৷ জনস্বার্থে সবার কথা ভাবতে হয়৷' শশীদেবীর মতে,'পরিশ্রম আর নিষ্ঠাই আমার মূলমন্ত্র৷ আর, যে কোন বিষয় একটু গভীরভাবে বোঝার চেষ্টা করা৷'

মুখ্যমন্ত্রী এদিন বৈঠকের পর বলেন, 'আমরা প্রশাসনিক স্তরে বিডিও-এসপিদের নিয়ে মোট ৫৪টা বৈঠক করেছি৷ আজকের বৈঠক অত্যন্ত ইতিবাচক ও গঠনমূলক হয়েছে৷ এ বার জেলাস্তরে বৈঠকের সূচনা হিসেবে ২ জুন উত্তরকন্যায় দার্জিলিং-জলপাইগুড়ি-কোচবিহার নিয়ে বৈঠক হবে৷ পুলিশকর্তাদের নিয়েও আলাদা বৈঠকে বসব৷ সমস্যা হল, প্রশাসনিক কর্তাদের নিয়ে ২০ ডিসেম্বর বৈঠকের পর বেশ কয়েকটা মাস চলে গেল৷ কোন দপ্তরের কাজের ক্ষেত্রে কোথায় কী অসুবিধা বা কমিউনিকেশন গ্যাপ হচ্ছে, তা নিয়ে খোলাখুলি আলোচনা হয়েছে৷ আমাদের অনেক কাজ ভালোই হচ্ছে৷ যেমন, ১০০ দিনের কাজে বাংলা প্রথম হয়েছে৷ এই সব ভালো কাজের বার্তা মানুষের কাছে পৌঁছে দিতে হবে৷'

http://eisamay.indiatimes.com/state/Mamata-happy-with-the-jobs-that-her-ministers-did-in-1-year/articleshow/35688943.cms


পর্যটনে ব্রাত্য, শিক্ষায় পার্থ, দুই মন্ত্রী দপ্তরহীন


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এই সময়: মন্ত্রিসভায় রদবদল ঘটিয়ে একই সঙ্গে সরকার ও দলকে ঝাঁকুনি দিলেন মমতা বন্দ্যোপাধ্যায়৷ মন্ত্রীদের কাজের মূল্যায়ন করতে আজ বুধবার টাউন হলে বৈঠক ডেকেছেন তিনি৷ তার ২৪ ঘণ্টা আগে মঙ্গলবার দুপু্রেই বেশ কিছু পরিবর্তন করলেন মুখ্যমন্ত্রী৷ তার মধ্যে উল্লেখযোগ্য হল শিক্ষামন্ত্রী পরিবর্তন৷ ব্রাত্য বসুকে সরিয়ে শিক্ষা দপ্তরের ভার দেওয়া হল তৃণমূলের মহাসচিব পার্থ চট্টোপাধ্যায়কে৷ ব্রাত্যকে দেওয়া হল পর্যটন দপ্তর, যা শিক্ষার তুলনায় কম গুরুত্বের৷ এই রদবদলেই ডানা ছাঁটা গেল তিন মন্ত্রীর৷ পর্যটন কেড়ে নিয়ে মালদহের কৃষ্ণেন্দু নারায়ণ চৌধুরিকে দেওয়া হল অনেক কম গুরুত্বের দপ্তর খাদ্য প্রক্রিয়াকরণ৷


তবে সবচেয়ে গুরুত্বহীন করে দেওয়া হল মালদহ ও মুর্শিদাবাদের দুই মন্ত্রীকে৷ সাবিত্রী মিত্র ও সুব্রত সাহাকে মন্ত্রিসভায় রাখা হয়েছে বটে, কিন্ত্ত তাঁরা আপাতত দপ্তরবিহীন৷ আজ মুখ্যমন্ত্রীর পর্যালোচনা বৈঠকে অবশ্য তাঁরা থাকবেন৷ সচিব ও উচ্চপদস্থ অফিসারদেরও ডাকা হয়েছে এই বৈঠকে৷


তৃণমূল সরকারের তিনবছরের কার্যকালে মন্ত্রিসভায় রদবদল আগেও হয়েছে৷ তিনটি বড় রদবদলে দুবারই দপ্তর বদল হয়েছে পার্থ চট্টোপাধ্যায়ের৷ আগেরবার গুরুত্বপূর্ণ শিল্প দপ্তর হাতছাড়া হয়েছে তাঁর৷ এবার তথ্যপ্রযুক্তি শিল্প দপ্তর হাতছাড়া হলেও তিনি পেলেন অত্যন্ত গুরুত্বপূর্ণ শিক্ষা দপ্তরের ভার৷ মুখ্যমন্ত্রী তথ্যপ্রযুক্তি দিয়েছেন তাঁর অত্যন্ত আস্থাভাজন অমিত মিত্রকে৷ অর্থ, আবগারি, শিল্প, এবং এবার তথ্যপ্রযুক্তির দায়িত্ব পেয়ে অমিতবাবু যে মন্ত্রিসভায় কার্যত দু'নম্বর হয়ে গেলেন তাতে কোনও সন্দেহ নেই৷ নরেন্দ্র মোদীর শপথ অনুষ্ঠানে সরকারের তরফে তাঁকে পাঠিয়েও অমিতবাবুর রাজনৈতিক ওজন বৃদ্ধির বার্তা দিয়েছেন মুখ্যমন্ত্রী৷


রদবদলের সম্ভাবনার কথা ক'দিন ধরেই তৃণমূল শিবিরের আলোচনায় ছিল৷ সাবিত্রী, সুব্রত ও কৃষ্ণেন্দুর যে ডানা ছাঁটা হবে, এমনকি মলয় ঘটকের মতো তাঁদের মন্ত্রিত্বও কেড়ে নেওয়া হতে পারে এমন কথাও শোনা যাচ্ছিল৷ শেষপর্যন্ত জেলা রাজনীতির ভারসাম্য রক্ষার স্বার্থেই তাঁদের মন্ত্রিত্বে রেখে দেওয়া হল৷


তৃণমূল সূত্রে বলা হচ্ছে, এই রদবদলের মধ্যে দিয়ে মমতা এক ঢিলে অনেক পাখি মারার চেষ্টা করেছেন৷ প্রথমত, ৩ বছরে বেশ কয়েকবার রদবদল ঘটিয়ে মমতা বুঝিয়ে দিচ্ছেন বামফ্রন্ট জমানার মতো তাঁর মন্ত্রিসভায় চিরস্থায়ী বন্দোবস্ত বলে কিছু নেই৷ কেউ কোনও পদে বা দপ্তরে অপরিহার্য নন৷ দায়িত্ব ও দপ্তর বদলের ফলে কাজে গতি আসে, এই কর্পোরেট ভাবনায় বিশ্বাসী মমতা৷ তবে সব চেয়ে গুরুত্বপূর্ণ হল মন্ত্রীদের এই বার্তাও দেওয়া যে, দলকে উপেক্ষা করলে তিনি বরদাস্ত করবেন না৷


ব্রাত্য বসু অবশ্য প্রকাশ্যে বলেছেন তিনি নিজেই কিছুটা চাপমুক্ত হতে চেয়েছিলেন৷ কয়েকদিন আগে মুখ্যমন্ত্রীর সঙ্গে পর্বতারোহী ছন্দা গায়েনের বাড়ি যাওয়ার পথে সে কথা তিনি দলনেত্রীকে জানান৷ ব্রাত্যবাবুর বক্তব্য, 'এটা রুটিন বদলি৷ মুখ্যমন্ত্রী যেভাবে চেয়েছিলেন শিক্ষায় সেভাবেই সংস্কার করা হয়েছে৷ যা ভাল হয়েছে তার সব কৃতিত্ব মুখ্যমন্ত্রীর৷ আর যেটা পারিনি তার দায় আমার৷ পর্যটন দপ্তর পেয়ে আমি খুশি৷ বুধবারই আমি নতুন দায়িত্ব নেব৷' কৃষ্ণেন্দু জানিয়েছেন, 'নব মহাকরণে নিজের দপ্তরে বসেই আমি রাজভবন থেকে চিঠি পেয়েছি৷ আমি মনে করি না এটা কোনও শাস্তি৷ যে দপ্তরেই থাকি মন দিয়ে কাজ করি৷ পর্যটন দপ্তরেও করেছি৷ এখন মুখ্যমন্ত্রী আমাকে খাদ্যপ্রক্রিয়াকরণ দপ্তরের দায়িত্ব দিয়েছেন৷ সে দায়িত্ব পালন করব৷'


বহরমপুরে দলীয় কর্মীদের সঙ্গে বৈঠক চলাকালীন রদবদলের খবর পান সুব্রত সাহা৷ তাঁর সাফ কথা, 'দল ও সরকারের স্বার্থে মুখ্যমন্ত্রী যেভাবে কাজ করার নির্দেশ দেবেন সেইভাবেই কাজ করব৷' এর বেশি একটি শব্দও ব্যয় করতে চাননি সুব্রত৷ মালদহের অপর মন্ত্রী সাবিত্রী মিত্র এদিন কলকাতায় ছিলেন না৷ তিনি নিজের নির্বাচনী কেন্দ্রে ভূতনির চরের কাছে একটি সেতু নির্মাণ সংক্রান্ত কাজে ব্যস্ত ছিলেন৷ সাবিত্রীর কথায়, 'দপ্তর নিয়ে নেওয়ার খবর মুখ্যমন্ত্রী বা দলীয় নেতৃত্ব আমায় জানাননি৷ তাই এ ব্যাপারে কোনও মন্তব্য করতে পারব না৷ তবে এটুকু বলতে পারি, দল যে দায়িত্ব দেবে তাই পালন করব৷'


Tuesday, May 27, 2014

সিঙ্গুরে এখন নেনো বাঁচাও আন্দোলন বিজেপির,ব্রাত্যর ডানা হল ছাঁটা এবং বাম নেতৃত্বের বিরুদ্ধে বিদ্রোহ বিস্ফোরণ! सिंगुर में भाजपा ने संभाली आंदोलन की बागडोर,वामनेतृत्व के खिलाफ कार्यकर्ताओं की गोलंदाजी और तृणमूल मंत्रिमंडल में फेरबदल!

সিঙ্গুরে এখন নেনো বাঁচাও আন্দোলন বিজেপির,ব্রাত্যর ডানা হল ছাঁটা এবং বাম নেতৃত্বের বিরুদ্ধে বিদ্রোহ বিস্ফোরণ!


सिंगुर में भाजपा ने संभाली आंदोलन की बागडोर,वामनेतृत्व के खिलाफ कार्यकर्ताओं की गोलंदाजी और तृणमूल मंत्रिमंडल में फेरबदल!


এক্সকেলিবার স্টিভেন্স বিশ্বাস


সিঙ্গুর আবার সরব, এ বার ময়দানে বিজেপি

1-lead

প্রধানমন্ত্রী হিসেবে নরেন্দ্র মোদীর শপথ গ্রহণের দিনেই ফের শিল্পায়নের দাবি উঠল সিঙ্গুরে। সিঙ্গুরের যে জমিতে এখন টাটাদের পরিত্যক্ত কারখানা দাঁড়িয়ে, সেই জমিতেই ফের শিল্পের দাবিতে সোমবার বুড়োশান্তির মাঠ থেকে আলুর মোড় পর্যন্ত মিছিল করলেন মোদীর দলের কর্মী-সমর্থকেরাই। শ'দেড়েক মানুষের সেই মিছিলে যেমন দেখা গেল 'ন্যানো বাঁচাও কমিটি'র সঞ্জয় পাণ্ডেকে, তেমনই ছিলেন তৃণমূল নেতৃত্বাধীন 'কৃষিজমি রক্ষা কমিটি'র কর্মী সৌরেন পাত্রও। পা মেলালেন কয়েক জন 'অনিচ্ছুক'ও।


টেট কেলেন্কারির জন্য ডানা ছাঁটা হল পরিবর্তনপন্থী নাট্যকর্মী ব্রাত্য বসু,অথচ শারদা কেলেন্কারিতে অভিযুক্ত মুকুল রায় বহাল আছেন স্বমহিমায়,উপরন্তু পদোন্নতি হল মদন মিত্রের৷


মতুয়া ভোটের তাকীদে মন্জুল কৃষ্ণ ঠাকুরও এখন কেবিনেট মন্ত্রী৷


মোদী শ্রীরামপুরে বাংলাদেশি অনুপ্রবেশকারিদের 16 মে পর্যন্ত তল্পিতল্পা গুটিয়ে নিতে ওবলে তাঁদের বংলাদেশ ফেরত পাঠাবার ঘোষণা করতে না করতে হরিদাস পালকে কোমরে দড়ি বেঁধে জেলে পাঠাবার ইচ্ছা জগজাহির করে দিদি বলেছিলেন,কাউকে ফেরত পাঠাতে হলে তাঁকে সবার আগে ফেরত পাঠাতে হবে৷


অথচ ঝাড়খন্ডের পরে বাংলাতেও বাংলাদিশি অনুরপ্রবেশকারিরা গ্রেফ্তার হচ্ছেন৷


দিদির মুখে রা নেই৷


অন্যদিকে  সিঙ্গুর আন্দোলনের পটভূমিতে গৌরিক বিপ্লব শুরু হয়ে গেল জমি বাঁচাও আন্দোলনকারিদের  নিয়ে নৈনো বাঁচাও বিজেপি অভিযান মার্ফত৷অশনি সংকেত দেখে শহরতলি কে করপোরেশন আয়ত্বে আনতে উদ্যোগ মধ্যে মন্ত্রিসভায় বড় সড় পরিবর্তন৷


ইহারই মাঝখানে আলিমুদ্দীন স্ট্রীটে অভিনীত হচ্ছে বাম নেতৃত্ব বিরোধী নাটক৷সোমনাথ বহিস্কৃত৷ রেজ্জাক মোল্লা বহিস্কত৷বহিস্কৃত প্রসেনজিত বসু৷তবু নেতৃত্ব বদল আন্দোলন থামছে না৷ সিপিএম সদর দফতরে বাম বৈঠকে বিমান বুদ্ধ কারাট ও ইয়েচুরিকে সরানোর দাবি উঠেই গেল৷


আত্মঘাতী হবেন না কমরেড ।


দেবাঞ্জন মিত্র

3 hrs

আত্মঘাতী হবেন না কমরেড । আপনি একা নন আমরাও চাই নেতৃত্বের পরিবর্তন । আজ যারা অসহায় গৃহহীন পথে ঘাটে আক্রান্ত তাদের সকলের কাছে বড় একটা অংশের নেতৃত্ব পৌছতে পারছে না । অসহায় সেই কমরেডদের জন্য আবেদন কমরেড শুভ্রনীলের কাছে কাল আপনারা কথা বলুন আলিমুদ্দিনে গিয়ে । কিন্তু পথসভা করে ফেসবুকের মাধ্যমে কমরেডদের জড় করে অসহায় কমরেডদের আরো অসহায় করে তুলবেন না । কমরেড আপনি আক্রান্ত নন । যারা বাড়ীতে যেতে পারছে না , যারা চাকুরীতে যেতে পারছে না তাদের জন্য এইটুকু কমরেডসুলভ আচরণ আশা করবো । আগে আক্রান্তদের পাশে দাড়াই তারপরে নেতৃত্ব বদল করবো । কথা দিচ্ছি আপনার লড়াইয়ের পাশে থাকবো । আজ নয় । আজ আরো বড় কাজ নিজের সংগ্রামের সাথীদের পাশে থাকা ।

আনন্দ বাজারের খবর যথার্থইঃ

সোমনাথ চট্টোপাধ্যায়ের মতো ওজনদার নেতার বহিষ্কারের সময়ে হয়নি। হাল আমলে আব্দুর রেজ্জাক মোল্লা বা লক্ষ্মণ শেঠের বহিষ্কারের পরেও হয়নি। তুলনায় দলের অনামী নেতা শুভনীল চৌধুরীকে সিপিএম থেকে বহিষ্কারের জেরে এ বার প্রতিবাদ মিছিল হতে চলেছে আলিমুদ্দিনের দোরগোড়ায়! প্রতিবাদের ডাক দিয়েছেন কলকাতায় সিপিএমেরই কিছু নিচু তলার নেতা-কর্মী। কারণ, লোকসভা ভোটে নজিরবিহীন বিপর্যয়ের পরে সিপিএম এখন সত্যিই বিপাকে। সদর দফতরে কামান দাগার জন্য এই পরিস্থিতিকেই ব্যবহার করতে চাইছেন দলের কর্মী-সমর্থকদের একাংশ।

জেলায় জেলায় বিজেপিতে যাচ্ছেন বামেরা

নিজস্ব প্রতিবেদন

বিজেপি হাওয়ায় এ রাজ্যে বাম কর্মী-সমর্থকদের একাংশের মধ্যে গেরুয়া শিবিরে যাওয়ার প্রবণতা দেখা দিয়েছে। লোকসভা ভোটের নিরিখে এ বার রাজ্যে ফ্রন্টের ভরাডুবির মাঝে আরও কোণঠাসা হয়েছে শরিকদলগুলি। কোনও আসনেই জয়ী হতে পারেনি তারা। এই পরিস্থিতিতে শরিকগুলির মধ্যেই দল ছাড়ার ঝোঁক বেশি দেখা যাচ্ছে।



এই সময়: নেতৃত্ব বদলের দাবিতে এবার আলিমুদ্দিন স্ট্রিটের সদর দপ্তর কামান দাগতে চাইছেন সিপিএমের একদল নেতা-কর্মী৷ আলিমুদ্দিন স্ট্রিট লোকাল কমিটি ও কলকাতা জেলা সিপিএমের একদল নেতার উদ্যোগে আজ আলিমুদ্দিন স্ট্রিটে প্রতিবাদ মিছিল ও পথসভার ডাক দেওয়া হয়েছে৷ সিপিএম দপ্তর থেকে ঢিলছোড়া দূরত্বে দলীয় কর্মীরা পথসভা করার সিদ্ধান্ত নেওয়ায় প্রবল অস্বস্তিতে পড়েছে সিপিএম নেতৃত্ব৷ এই ঘটনা রীতিমতো নজিরবিহীনও বটে৷


বিদ্রোহী এই নেতা-কর্মীদের কর্মসূচির কথা কানে গিয়েছে বিমান বসু, বুদ্ধদেব ভট্টাচার্যের মতো দলের শীর্ষ নেতাদের৷ দলীয় নেতৃত্বের বিরুদ্ধে প্রকাশ্যে সরাসরি এমন বিদ্রোহের জেরে ওই বিদ্রোহীদের বহিষ্কার করা হতে পারে বলে সিপিএম সূত্রের খবর৷ যদিও এই প্রতিবাদ সভার কথা জানা নেই বলে মন্তব্য করেছেন কলকাতা জেলা সিপিএমের প্রভাবশালী নেতা মানব মুখোপাধ্যায়৷ এমন বিদ্রোহ আরও হবে বলে মনে করছেন ভোটের আগে বহিষ্কৃত বিধায়ক রেজ্জাক মোল্লা৷ তাঁর কথায়, 'একেই বলে দলীয় দপ্তরে বোমা বর্ষণ৷ এমন বিদ্রোহ আরও প্রয়োজন, সিপিএম কতজনকে বহিষ্কার করবে করুক না৷' ডাক পেলে তিনিও এই সভায় যেতে আগ্রহী বলে জানিয়েছেন রেজ্জাক সাহেব৷ প্রসঙ্গত, সিপিএম থেকে বহিষ্কৃত লোকসভার প্রাক্তন অধ্যক্ষ সোমনাথ চট্টোপাধ্যায় দিন চারেক আগেই ভোট বিপর্যয়ের দায় নিয়ে প্রকাশ কারাট এবং রাজ্য সিপিএমের শীর্ষ নেতৃত্বের পদত্যাগ দাবি করেছেন৷


রাজ্য সিপিএমের দলীয় ওয়েবসাইট ও নির্বাচনী ওয়েবসাইটের দায়িত্বে থাকা তরুণ নেতা শুভনীল চৌধুরীকে বহিষ্কারের জেরেই এই বিদ্রোহ বলে দলীয় সূত্রের খবর৷ লোকসভা ভোটে বামেদের পরাজয়ের প্রেক্ষিতে অবিলম্বে নেতৃত্ব বদলের দাবিতে প্রকাশ্যে সরব হয়েছিলেন শুভনীল৷ নেতৃত্ব বদলের দাবিতে একটি বিবৃতিতে সই করেন তিনি৷ সিপিএম রাজ্য নেতৃত্ব বিদ্রোহী এই নেতাকে বিবৃতি থেকে নাম প্রত্যাহারের নির্দেশ দিলেও তিনি তা করতে অস্বীকার করায় তাঁকে সরাসরি বহিষ্কার করা হয়৷ ওই সিদ্ধান্তের প্রতিবাদে এবং ভোট-বিপর্যয়ের জন্য নেতৃত্ব বদলের দাবিতে সিপিএম রাজ্য দপ্তরের নাগের ডগায় সবজি মোড়ে আজ আলিমুদ্দিন স্ট্রিট-মল্লিকবাজার লোকাল কমিটির সম্পাদক হাসনাইন ইমামের নেতৃত্বে মিছিল ও পথসভা হবে৷ ইতিমধ্যে সোশ্যাল নেটওয়ার্কিং সাইটে এই সভায় উপস্থিত হওয়ার জন্য সিপিএম কর্মী-সমর্থক এবং বাম শুভানুধ্যায়ীদের আহ্বান জানানো হয়েছে৷ সেখানে বলা হয়েছে, 'শুভনীল নেতৃত্ব বদলের যে দাবি করেছেন তা লক্ষ লক্ষ কর্মীর মনের কথা, যাঁরা মনে করছেন বর্তমান নেতৃত্ব তাঁদের প্রতারণা করছেন৷ এই অবস্থায় শুভনীলকে বহিষ্কার করে নেতৃত্ব বোঝালেন, তাঁরা বিরুদ্ধ মতামতকে কোনও ভাবে মেনে নেবেন না৷ যে নেতারা রাষ্ট্রীয় সন্ত্রাস থেকে কর্মীদের রক্ষা করতে পারছেন না তাঁদের অধিকার নেই কর্মীদের এই ভাবে বের করে দেওয়ার৷'


হাসনাইন ইমাম ছাড়াও এই প্রতিবাদ সভার আহ্বানপত্রে নাম রয়েছে মানিকতলা উত্তর লোকাল কমিটির অন্তর্গত ব্রাঞ্চ সদস্য সুমন্ত সেনের৷ উদ্যোক্তাদের মধ্যে আছেন আলিমুদ্দিন স্ট্রিট-মল্লিকবাজার লোকাল কমিটির অন্তর্গত ব্রাঞ্চ সদস্য তনবির আহমেদ খান, কলকাতা জেলা পার্টির সদস্য দেবু মুখোপাধ্যায় প্রমুখ৷ সভায় থাকবেন শুভনীলের মতো সিপিএম থেকে বহিষ্কৃত হওয়া একাধিক নেতা-কর্মী৷ থাকতে পারেন বহিষ্কৃত যুব নেতা প্রসেনজিত্‍ বসু-ও৷ এই প্রতিবাদ সভাকে সদর দপ্তরে কামান দাগা বলেই মনে করছেন শুভনীল নিজে৷ তাঁর বক্তব্য, 'আমার বহিষ্কারের সিদ্ধান্ত যে ভুল তা বহু কর্মী মনে করছেন৷ তাই নিচুতলার এই নেতা-কর্মীরা সদর দপ্তরে কামান দাগতে চাইছেন৷'


এই সময়: নবান্নে যাচ্ছেন বামফ্রন্টের চেয়ারম্যান বিমান বসু৷


ভোট পরবর্তী হিংসা রোখার দাবি জানিয়ে দেখা করবেন মুখ্যমন্ত্রী মমতা বন্দ্যোপাধ্যায়ের সঙ্গে৷ হিংসা নিয়ে স্মারকলিপিও দেবেন মুখ্যমন্ত্রীকে৷ তবে এই সাক্ষাতের কোনও দিনক্ষণ এখনও ঠিক হয়নি৷ রাজ্য বামফ্রন্টের তরফে মুখ্যমন্ত্রীর সময় চেয়ে আবেদন করা হবে৷ পাশাপাশি, রাজনৈতিক সৌজন্য মেনে মুখ্যমন্ত্রী তাঁকে সময় দেন কি না দেখার সেটাও৷


তৃণমূল ক্ষমতায় আসার পর বিরোধী দলনেতা সূর্যকান্ত মিশ্রর নেতৃত্বে বাম পরিষদীয় দল মহাকরণে মুখ্যমন্ত্রীর সঙ্গে সাক্ষাত্‍ করেছে৷ কিন্ত্ত ফ্রন্ট চেয়ারম্যান বিমান বসু কখনও নবান্নতে যাননি৷ বাম জমানায় বিমানবাবু এক-দু'বার রাইটার্সে গিয়েছেন৷ তবে বিমান বসুর নেতৃত্বে বামদলগুলি এর আগে রাজ্যপালের সঙ্গে সাক্ষাত্‍ করে স্মারকলিপি দিয়েছেন৷ এ বার সরাসরি মুখ্যমন্ত্রীর শরণাপন্ন হওয়ার কারণ হিসেবে এ দিন বামফ্রন্টের বৈঠকের পর বিমান বসু বলেন, 'আমরা এর আগে রাজ্যপালের কাছে গিয়েছিলাম৷ তাঁকে রাজ্যের পরিস্থিতির কথা বলেছিলাম কিন্ত্ত কোনও ফল পাচ্ছি না৷ তাই এ বার মুখ্যমন্ত্রীর কাছে যাচ্ছি৷' এ দিন রাজ্য বামফ্রন্টের বৈঠকে সিপিএমের তরফে বিমানবাবু মুখ্যমন্ত্রীর কাছে যাওয়ার প্রস্তাব দিয়েছেন৷ বিমানবাবুর প্রস্তাবে আপত্তি করেনি শরিক দলগুলি৷ যদিও প্রশ্ন উঠেছে, বামেদের সস্ত্রাসের অভিযোগের নিশানা যেখানে শাসক দলের বিরুদ্ধে সেখানে মুখ্যমন্ত্রীর দারস্থ হওয়ার ফল কতটা হবে?


লোকসভা নির্বাচনের প্রচারেও শাসক দলের সন্ত্রাস নিয়ে রাজ্য প্রশাসনকেই কাঠগড়ায় তুলেছিল বাম নেতৃত্ব৷ মুখ্যমন্ত্রী মমতা বন্দ্যোপাধ্যায়কে 'একনায়ক' বলেও চিহ্নিত করেছিলেন বাম নেতারা৷ বামফ্রন্ট চেয়ারম্যানের যুক্তি, 'মুখ্যমন্ত্রীর কাছে কেন যাব না? সিদ্ধার্থশঙ্কর রায় যখন রাজ্যের মুখ্যমন্ত্রী ছিলেন তখন তাঁর কাছেও গিয়েছি৷ আমরা রাজ্যপালকে বলেছিলাম, ফল পেলাম না, তাই মুখ্যমন্ত্রীর কাছে যাচ্ছি৷'


মুখ্যমন্ত্রীর দারস্থ হওয়ার পাশাপাশি সন্ত্রাস কবলিত এলাকায় রাজ্য বামফ্রন্টের প্রতিনিধি দল যাবে বলেও সিদ্ধান্তও নেওয়া হয়েছে এ দিন৷ যদিও এই বৈঠকে সন্ত্রাস কবলিত এলাকায় যাওয়া নিয়ে মতপার্থক্য হয়৷ এক দলের বক্তব্য ছিল, 'এখন নেতারা জেলা সফরে গেলে সমস্যার কোনও সমাধান হবে না৷ কারণ নেতারা ফিরে এলেই আবার মারধর শুরু হবে৷' অন্য দলের বক্তব্য ছিল, 'এখন না গেলে আমাদের আর কোনও বিশ্বাসযোগ্যতা থাকবে না৷ তাই যাওয়াটা প্রয়োজন৷' তার পরেই সিদ্ধান্ত হয়, সন্ত্রাস কবলিত কোন কোন এলাকায় ফ্রন্টের রাজ্য নেতৃত্বের যাওয়ার প্রয়োজন, তা জেলা ফ্রন্টের নেতারা খতিয়ে দেখে রাজ্য নেতৃত্বকে জানাবেন৷ তার ভিত্তিতে বিমান বসুর নেতৃত্বে বাম প্রতিনিধি দল সংশ্লিষ্ট এলাকায় যাবে৷ ইতিমধ্যে সন্ত্রাস কবলিত আরামবাগে ফ্রন্ট নেতৃত্ব যাবেন বলে সিদ্ধান্ত হয়েছে৷ পাশাপাশি সন্ত্রাস-হিংসার প্রতিবাদে কলকাতায় কেন্দ্রীয় ভাবে অবস্থান-বিক্ষোভ করবে রাজ্য বামফ্রন্ট৷


বিমান বসুর নেতৃত্বে ফ্রন্ট নেতাদের মুখ্যমন্ত্রীর দারস্থ হওয়া কিংবা জেলা সফরে যাওয়ার পিছনে অবশ্য অন্য কারণ রয়েছে বলে বাম নেতাদের ব্যাখ্যা৷ নির্বাচনোত্তর পরিস্থিতিতে শাসক দলের হামলা-আক্রমণের মুখে নিচুতলার বাম নেতা-কর্মীরা পড়লেও শীর্ষ নেতারা তাঁদের পাশে দাঁড়াচ্ছেন না বলে ইতিমধ্যে অভিযোগ উঠেছে৷ নিচুতলার নেতা-কর্মীদের বাম নেতৃত্ব সুরক্ষা দিতে না পারায় এক দিকে বিজেপিতে যোগদানের হিড়িক যেমন শুরু হয়েছে, তেমনই নেতৃত্বের প্রতি ক্ষোভ-বিক্ষোভ বাড়ছে৷ মূলত, বিজেপিতে যোগদানের হিড়িক বন্ধ করা এবং নিচুতলার নেতা-কর্মীদের সুরক্ষা দেওয়ার জন্য মরিয়া হয়ে এখন বিমান বসু মমতা বন্দ্যোপাধ্যায়ের শরণাপন্ন হতে চলেছেন৷ এ ভাবেই বাম শিবিরে ভাঙন ঠেকাতে চাইছেন বিমান বসু৷


পাশাপাশি, পুরভোট ও শিলিগুড়ি মহকুমা পরিষদের নির্বাচন যথাসময়ে করার দাবিতে এ দিন পুরমন্ত্রী ফিরহাদ হাকিম ও পঞ্চায়েত মন্ত্রী সুব্রত মুখোপাধ্যায়কে চিঠি দিয়েছে বিমানবাবু৷


৩৮ পুর-এলাকা জুড়ে ৭ কর্পোরেশন, শুরু বিতর্ক

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এই সময়: বৃহত্তর কলকাতার স্থানীয় প্রশাসনিক কাঠামোয় আমূল বদল আনতে চলেছে মমতা সরকার৷ বিকেন্দ্রীকৃত ব্যবস্থার বদলে কেন্দ্রীকরণের পথেই হাঁটতে চলছে রাজ্য৷ দুই চব্বিশ পরগনা, হাওড়া, হুগলির ৩৪টি পুর-এলাকার পুনর্বিন্যাস করে এবং কিছু কিছু গ্রামীণ এলাকা যুক্ত করে নতুন ৬টি কর্পোরেশন গঠনের ব্যাপারে সোমবার নীতিগত সিদ্ধান্ত নিয়ে ফেলল রাজ্য মন্ত্রিসভা৷ লোকসভার ফলে শাসকদলের মাথাব্যথা বাড়ানো আসানসোল কর্পোরেশনের সঙ্গে রানিগঞ্জ-কুলটি-জামুরিয়াকে যুক্ত করারও সিদ্ধান্ত হয়েছে৷ কলকাতার সঙ্গে বিধাননগর পুর-এলাকা যুক্ত করার প্রস্তাবও উঠেছে৷ রাজ্যের যুক্তি, কর্পোরেশন হলে ঋণ, অনুদান-সহ আরও কিছু ক্ষেত্রে অতিরিক্ত সুবিধা মিলবে৷ মিলবে অতিরিক্ত ক্ষমতা৷ একই সঙ্গে যেহেতু প্রতিটি কর্পোরেশন এলাকারই ন্যূনতম জনসংখ্যা হবে ১০ লক্ষের বেশি, বড় শহরের শিরোপা আসবে৷ এই ধরনের শহরের জন্য আবার কেন্দ্রীয় নগরোন্নয়ন মন্ত্রকের বিভিন্ন প্রকল্প রয়েছে৷ কলকাতার সঙ্গে আশপাশের এলাকার পরিকাঠামো ও পরিষেবাগত ফারাক ঘোচানোও নয়া সিদ্ধান্তের অন্যতম কারণ বলে দাবি সরকারের৷ মুখ্যমন্ত্রী মমতা বন্দ্যোপাধ্যায় নিজেই জানিয়েছেন, নীতিগত সিদ্ধান্তের পর এ বার নতুন কর্পোরেশন গঠনের লক্ষ্যে আইনি এবং প্রশাসনিক পদক্ষেপ শুরু করবে রাজ্য প্রশাসন৷


সরকারের এই যুক্তির পাল্টা স্থানীয় প্রশাসনের (লোকাল বডিজ) ক্ষমতা-খর্ব হওয়ার আশঙ্কাও তৈরি হয়েছে কোনও কোনও মহলে৷ বিকেন্দ্রীকৃত ক্ষমতার এ হেন কেন্দ্রীভবনে উন্নয়ন ব্যাহত হওয়া বা অসম বিকাশের সম্ভাবনায় উদ্বিগ্ন কেউ কেউ৷ তাদের পাল্টা বক্তব্য, কর্পোরেশনের 'ম্যাক্রো' কাঠামোয় 'মাইক্রো' বা একেবারে তৃণমূল স্তরের বহু চাহিদা উপেক্ষিত হওয়ার আশঙ্কা৷ প্রাক্তন পুরমন্ত্রী, সিপিএম নেতা অশোক ভট্টাচার্যের যেমন বক্তব্য, 'যে পুরসভাগুলিকে একত্র করার কথা বলা হচ্ছে, তার প্রত্যেকটিই প্রায় একশো বছরের পুরোনো৷ এদের প্রতিটির নিজস্ব কাজের ধারা এবং পরিকাঠামো রয়েছে৷ এগুলিকে এক জায়গায় আনলে পরিষেবার মান কতটা বাড়বে, তা নিয়ে সন্দেহ রয়েছে৷ আধুনিক পুর-পরিষেবায় বিকেন্দ্রীকরণের কথাই ভাবা হয়৷ কিন্ত্ত রাজ্য সরকার যা ভাবছে, তা কেন্দ্রীকরণের সামিল৷ এ ব্যাপারে সিদ্ধান্ত নেওয়ার আগে ভালো করে সমস্ত দিক খতিয়ে দেখা উচিত৷' আপাতত অবশ্য সম্ভাব্য বিরোধিতার তোয়াক্কা না করেই 'নীতিগত' সিদ্ধান্ত নিয়ে ফেলেছে সরকার৷ এ ক্ষেত্রে স্ববিরোধিতাও রয়েছে সরকারি স্তরে৷ যেমন, বিধাননগর পুর-এলাকা কলকাতা কর্পোরেশনে যুক্ত করার সিদ্ধান্ত পাকা করার আগে স্থানীয় মানুষের মতামত নেওয়ার কথা বলা হলেও অন্য পুরসভাগুলির ক্ষেত্রে সেই বিবেচনাবোধ গুরুত্ব পায়নি৷


রাজ্য সরকারের পরিকল্পনা অনুযায়ী, উত্তর চব্বিশ পরগনা, দক্ষিণ চব্বিশ পরগনা, হাওড়া, হুগলির বেশ কিছু পুর-এলাকার পুনর্বিন্যাস করে গঠন করা হবে নতুন ছ'টি কর্পোরেশন৷ যার প্রতিটির জনসংখ্যা হবে অন্তত ১০ লক্ষ৷ যে এলাকার পুরসভাগুলির পুনর্বিন্যাসের কথা হচ্ছে, সেখানে কলকাতা ছাড়াও অবশ্য হাওড়া ও চন্দননগর কর্পোরেশন রয়েছে৷ কলকাতা কর্পোরেশনের আওতায় বিধাননগর পুরসভাকে আনার প্রস্তাব রয়েছে জানিয়ে মুখ্যমন্ত্রীই যদিও জানিয়েছেন, চূড়ান্ত সিদ্ধান্তের আগে বিধাননগরবাসীর মতামত জানা হবে৷ অন্য দিকে, হাওড়া কর্পোরেশনের আওতায় আনা হচ্ছে বালি পুরসভাকে৷ তবে চন্দননগর কর্পোরেশনের সঙ্গে হুগলি জেলার বেশ কয়েকটি পুরসভা যুক্ত করার সিদ্ধান্তে প্রশাসনিক কাঠামোয় আমূল বদলেরই ইঙ্গিত৷ নতুন কর্পোরেশনের সদর দপ্তর হবে শ্রীরামপুরে৷ নামও বদলে যাবে৷ হুগলিতে প্রস্তাবিত এই নতুন কর্পোরেশন এলাকার জন্য নতুন পুলিশ কমিশনারেট গঠনেও সরকার উদ্যোগী হচ্ছে৷ পুনর্বিন্যাস পরিকল্পনার আওতায় আনা হয়েছে আসানসোল-দুর্গাপুর উন্নয়ন কর্তৃপক্ষ এলাকার কয়েকটি পুরসভাকেও৷ রানিগঞ্জ, জামুরিয়া এবং কুলটি পুরসভাকে যুক্ত করার কথা হয়েছে আসানসোল কর্পোরেশনের সঙ্গে৷


পুরসভাগুলির পুনর্বিন্যাস করে কর্পোরেশন বা মেগাসিটির স্ট্যাটাস দেওয়ার সিদ্ধান্ত হলেও পরিচালনা ও অন্যান্য খুঁটিনাটি বিষয়ে এখনই কিছু চূড়ান্ত হয়নি বলে জানিয়েছেন মুখ্যমন্ত্রী৷ আইনজ্ঞদের সঙ্গে পরামর্শ করে ও অন্যান্য বিষয় খতিয়ে দেখেই পরবর্তী রূপরেখা চূড়ান্ত করা হবে বলে জানিয়েছেন তিনি৷


जिस सिंगुर की धरती से किसानों की जमीन बचाने का आंदोलन शुरु करके आखिरकार बंगाल में 34 साल के वाम शासन काअंत करने में कामयाब हो गयीं बंगाल की अग्निकन्या ममता बनर्जी जो अब मां माटी मानुष की सरकार की मुख्यमंत्री है,उसी सिंगुर में सिंगुर भूमि बचाओ आंदोलन के नेता कार्यकर्ता साथ लेकर भाजपा ने टाटामोटर्स की पिटी हुई लाख टकिया गाड़ी को बचाने का आंदोलन शुरु कर दिया है।


बंगाल के केसरिया कायाकल्प का यह अंदाज शायद उसीतरह नजरअंदाज हो जाये जैसे तब सत्ताधारी वाम वर्चस्व को अनागत भविष्य की आहट दुःस्वप्न में भी सुनायी नहीं पड़ी।


बंगाल में जाहिर है कि गुजरात माडल के विकास के लिए माहौल बनने लगा।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का बंगाली नेटवर्क विस्तार में लगे केसरिया ब्रिगेड ने सिंगुर को ही अंततः दीदी के परिवर्तन राज के खात्मे के कर्म कांड के लिए चुना है।इसी बीच बंगाल प्रभारी भाजपा प्रवक्ता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा, 'पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने मुझे कहा है कि राज्य में 2016 विधानसभा चुनावों को नजर में रखते हुए इस प्रदर्शन को मजबूती देना चाहिए।


गौरतलब है कि वाम मोर्चे की पार्टियों के बीच रिश्तों में सबसे अधिक खटास सिंगुर-नन्दीग्राम प्रकरण से आई. औद्योगिकरण एक समस्या थी, जिसे लम्बे समय तक टालते रहना उचित नहीं था. लेकिन ठीक वही काम किया गया. बाद में, जब इस काम में हाथ लगाया, तो वाम सरकार शहरीकरण और औद्योगीकरण की पूंजीवादी अंधी दौड़ में ऐसे शामिल हो गयी कि भूमि सुधार करने वाली पार्टी जबरन जमीन अधिग्रहण के लिए जनसंहार संस्कृति की झंडेवरदार हो गयी।यह सिलसिला भी सिंगुर से शुरु हुआ।विडंबना तो यह है कि लाल से हरे में तब्दील सिंगुर में अब केसरिया प्रबल है।


गौरतलब है कि  कि जंगलमहल की सभी पांच सीटों पर 1951 से 1971 तक कांग्रेस का कब्जा रहा जबकि 1977 से 2009 तक जंगलमहल की सभी लोकसभा सीटों पर वामो का कब्जा रहा। लेकिन नंदीग्राम, सिंगुर जमीन आंदोलन और जंगलमहल की नेताई हत्याकांड का नतीजा यह हुआ कि आदिवासीबहुल जंगल महल में न सिर्फ वाम सफाया हो गया,बीते दिनों की अभिनेत्रियां संध्या राय और मुनमुन ने वाम सासदों को भारी मतों से हरा दिया। बांकुड़ा से जहां नौ बार के सांसद वासुदेव आचार्य मुनमुनसे हार गये,वहीं गीता मुखर्जी और गुरुदास दासगुप्त के प्रतिनिधित्व के लिए मशहूर घाटाल से बांग्ला फिल्मों के सुपर स्टार देब जीत गये।


लेकिन नेतृत्व बदलने की मांग पर वामदलों से प्रतिक्रिया में एक के बाद एक नेता और कार्यकर्ता निकाले जा रहे हैं।


इसी के मध्य देश के नमोमय केसरिया कारपोरेट कायाकल्प हो जाने के मध्य लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद दो साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए बंगाल में सत्ता संघर्ष घमासान है।


लोग बता रहे हैं कि चौतीस साल के वाम राज के अवसान के बाद लोकसभा में तृणमूल को चौतीस सीटें अशनिसंकेत है।चौतीस साल में वाम पटाक्षेप हुआ तो चौतीस सीटों से दीदी की विदाई की घंटी भी घनघनाने लगी है।


असल में फिलवक्त बंगीयराजनीतिक परिदृश्य में चहुंदिशा लहलहाते दिगंत दहकते कमल के बावजूद वास्तविक चुनौती कोई है नहीं।लेकिन सबसे ज्यादा हड़कंप दीदी के खेमे में है।अपने ही विधानसभा इलाके में पिछड़ी दीदी के तेवर चुनाव नतीजे के बाद से आज तक ढीले हुए नहीं हैं।सीबीआई हरकतों के मध्य तेजी से केसरिया हो रहे बंगाल की नब्ज पकड़ने की हरचंद कोशिश में लगी हैं दीदी।जाहिर है कि सिंगुर में केसरिया हलचल से उनकी बेचैनी कम तो कतई नहीं होने वाली है।


लोकलुभावन घोषणाएं तीन साल में खूब हुई हैं,पर परियोजनाओं को पूरा करने के लिए कोषागार फांका है।बहुचर्चित पीपीपी माडल और विकास के मामले में अव्वल नंबर होने के दावों वाले थोक सरकारी विज्ञापन नमो शपथ ग्रहण के दिन ही कोलकाताई अखबारों में छपवाने और मिष्टिमुख के लिए शारदा चर्चित सांसद मुकुल राय और वित्तमंत्री ्मित मित्र को रायसीना हिल्स भेजने से खस्ता हाल आर्थिक दिशा दशा सुदरने के भी आसार नहीं है और आसनसोल में पराजय के साथ समूचे औद्योगिक अंचल में पद्मगंधी तेज हवाओं के मध्य कारोबारी उम्मीदें पूरी करने में अब भी नाकाम हैं मां माटी मानुष की सरकार।


सोशल इंजीनियरिंग के लगातार ध्रूवीकरण के खतरे भयंकर प्रकट है।सो ,दीदी राजकाज के मार्फत ही नये सिरे से किले बंदी कर रहीं हैं।


सारे उपनगरीय इलाकों को महानगरीय सांचे में डालकर विकास का सूप पिलाने के लिए सात सात नगरनिगम की घोषणा करते करते न करते दिल्ली में नमो राज्याभिषेक के वक्त नजरुल चित्र पर माल्यार्पण से फेडरेल फ्रंट का श्राद्धकर्म पूरा करने के बाद उन्होंने अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल कर दिया है।


दूसरी ओर,वाम पक्ष में भारी घमासान है।वैचारिक बहस के लिए वामपंथी विश्वप्रसिद्ध है और सैद्धांतिक बहस में वामप्रतिबद्ध छूट किसी को नहीं देते। लेकिन बंगाल में कोई वैचारिक बहस का नया अध्याय शुरु हुआ हो,ऐसा भी नहीं है।


वाम जनाधार केसरिया हो गया है और जनता ने वाम को खारिज कर दिया है तो आवाम की ओर से किसी नये वाम की सुगबुगाहट भी कहीं नहीं है।बंगाल में ममता बनर्जी मुख्यमंत्री, केंद्र में नरेंद्र मोदी पीएम, भाजपा की बढ़ी ताकत और बंगाल में बढ़े वोट प्रतिशत और सीट संख्या, इन सब फैक्टर से राजनीतिक पंडित वाममोर्चा के 'पालिटिकल प्रास्पेक्ट' को लेकर इतने निराश हो गए हैं कि उन्होंने मान लिया है कि 2016 का विधानसभा चुनाव इसके लिए लास्ट लाइफ लाइन जैसा हो सकता है। अपनी मौजूदा शर्मनाक पराजय से 2016 के चुनाव में न उबर पाने की स्थिति में वाम राजनीति बंगाल में अप्रासंगिक होकर हमेशा के लिए दम तोड़ देगी, ऐसा राजनीतिक विश्लेषक पक्के तौर पर मानने लगे हैं।


सत्तासुख विपन्न अस्तित्वसंकट से सत्तासंस्कृति के वरदपुत्र पुत्री कांग्रेसियों की तरह वामपक्ष में भी महाभारत का मूसलपर्व चालू हो गया है। नेतृत्व मध्ये प्रलयंकर बहसाबहसी अफरातफरी बक्स हेराफेरी का विचित्र किंतु सत्य परिवेश है तो सत्ता बेदखलघटकदलों में बगावती बारुदी उत्तेजना है जिसका अभूतपूर्व विस्फोट माकपा मुख्यालय अलीमुद्दीन स्ट्रीट में आज हुई वाममोर्चा की बैठक में विमान बोस,बुद्धदेव और प्रकाश कारत,सीताराम येचुरी के सेमिनारी नेतृत्व के खुले आरोपों के मध्य हो गया।


संत्रास जाप करने वाले नेता उत्पीड़ित कार्यकर्ताओं के साथ खड़े होने का कष्ट नहीं उठाते और असुरक्षित वाम कार्यकर्ता सिर्फ सुरक्षा के लिहाज से तेजी से केसरिया हुए जा रहे हैं,ऐसे आरोप भी लगे।नेताओं के कार्यकर्ताओं और जनता के साथ कटे होने की आरोपवृष्टि मध्ये मुख्यालय के बगल में ही बहिस्कृत और नाराज युवा छात्र कार्यकर्ताओं ने अलग से गोलंदाजी कर दी।ऐसा विद्रोह वाम नेतृत्व के खिलाफ कभी हुआ हो तो बतायें।


बहिस्कृत वाम नेता रज्जाक मोल्ला ने नेतृत्व परिवर्तन के लिए वामदलों में खासतौर परमाकपा में विद्रोह और तेज होने की चातावनी दे दी है तो पार्टी में बहिस्कृत नेताओं की बहाली की मांग तेज होने लगी है।सोमनाथ चटर्जी की वापसी के लिए अलग मुहिम भी चल पड़ी है।


प्रभात खबर के मुताबिक लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद माकपा में भी विरोध व बदलाव की आवाज उठने लगी है। पार्टी नेतृत्व हालांकि इस ओर ध्यान न दे कर विरोध के सुर को कमजोर करना चाह रहा है। पर ऐसा लगता नहीं है कि नेतृत्व अपने मकसद में कामयाब हो पायेगा। विरोध की आवाज कम होने के बजाय और भी बुलंद होने लगी है।


सभी दलों की नजर अब अगले वर्ष होने वाले कोलकाता नगर निगम के चुनाव पर टिक गयी है। इस बीच 111 नंबर वार्ड के माकपा पार्षद चयन भट्टाचार्य ने भी पार्टी नेतृत्व के खिलाफ आवाज बुलंद कर दी है।


अपने फेसबुक अकाउंट पर श्री भट्टाचार्य ने लिखा है कि माकपा समेत सभी वामदलों में सबसे बड़ी समस्या सुविधावाद का जोर पकड़ना है। पिछले 20 वर्ष में यह किसी जानलेवा वायरस की तरह पनपा है। इसके लिए दल के सभी स्तर पर मध्य वर्ग का वर्चस्व हो जाना है। यही कारण है कि पिछले 15-20 वर्ष के दौरान किसानों व श्रमिकों के बीच से कोई नेता उभर कर सामने नहीं आया। पार्टी नेतृत्व की क्षमता पर सीधे सवाल उठाते हुए श्री भट्टाचार्य लिखते हैं कि हमारी पार्टी के कामकाज को जो लोग संभालते हैं, उनमें से अधिकतर का राजनीतिक ज्ञान अधूरा है। पार्टी की रणनीति, रणकौशल आदि के बारे में उनकी सोच स्पष्ट नहीं है। इसके साथ ही श्री भट्टाचार्य यह भी मानते हैं कि ऊपर से लेकर निचले सभी स्तर पर पार्टी में बुराई आ गयी है।



दैनिक जागरण में छपी एक रपट के मुताबिक वर्ष 2011 में विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद माकपा के राज्य सचिव विमान बोस के हटने की मांग भले ही नहीं उठी हो, लेकिन इस लोकसभा चुनाव के बाद यह स्वर सुनाई पड़ने लगा है। लोकसभा के चुनावी नतीजों का विश्लेषण और मंथन करने के बाद अनुभवी राजनीतिक पंडित यह भी कह रहे हैं कि बंगाल में कांग्रेस और माकपा की राजनीतिक जमीन को भाजपा बड़े स्केल पर हथिया कर मुख्य विपक्षी दल बनने की क्षमता तक हासिल कर सकती है। दक्षिण कोलकाता संसदीय सीट के भवानीपुर विस सेग्मेंट में भाजपा ने तो सत्तारूढ़ तृणमूल को ही पछाड़ कर सबको चकित कर दिया है। यह भवानीपुर इलाका खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का विधानसभा क्षेत्र है।


लोगों की यह भी राय बन गई है कि माकपा के पास नए दौर की सोच नहीं है, कोई विजन नहीं है। उसकी राजनीति तीन-चार दशक पुरानी है। सफेद बालों और धोती कुर्ता वाले माकपा के उम्र दराज और वृद्ध नेताओं के पास राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ज्वलंत मुद्दों पर भले ही अच्छे विचार हों, लेकिन युवाओं के लिए कुछ वे खास डेलिवर करने स्थिति में नहीं है, वहीं मुकाबले में भाजपा के आक्रामक हाईटेक प्रचार और नरेंद्र मोदी के युवाओं में सपने जगाने की कला ने बंगाल में पार्टी का वोट गुणात्मक तौर पर बढ़ा दिया है। बंगाल में हाल के वर्षो में वाम दलों को नए युवा मेम्बर बनाने में कोई सफलता नहीं मिली है, जो बचे खुचे युवा कार्यकर्ता थे उन्होंने 2011 की हार के बाद इसे गुड बाई कर दिया।


यादवपुर विवि के सेंटर फार क्वालिटी कंट्रोल से जुड़े एक प्रोफेसर कहते हैं कि साढ़े तीन दशक के अपने लम्बे शासन में बंगाल में बुनियादी जरूरतों तक को डेलिवर न कर पाना वाम शासन की बहुत बड़ी नाकामी है। राजनीतिशास्त्र के कुछ वरिष्ठ अध्यापकों का भी यह मानना है कि बंगाल में तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस, और भाजपा के तीन तरफा दबाव में माकपा को अपनी खोई राजनीतिक जमीन और विस्तृत लाल साम्राज्य शायद ही दोबारा मिले। चुनावी हार के बाद माकपा के बड़े नेता हताशा में समर्थकों को कुछ समय तक निष्क्रिय रहने और राजनीतिक घटनाक्रम देखने की सलाह दे रहे हैं। वहीं महानगर में माकपा और कांग्रेस की हार की कीमत पर बढ़ी अपनी ताकत से भाजपा अब 2015 के कोलकाता नगर निगम चुनाव की रणनीति तय करनी शुरू कर दी है।



ममता बनर्जी के मंत्रिमंडल में फेरबदल


पश्चिम बंगाल में अपने 18 महीने पुराने मंत्रिमंडल में फेरबदल करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आगामी पंचायत चुनावों को ध्यान में रखते हुए बुधवार को आठ नये चेहरों को शामिल किया। नये चेहरों में ज्यादातर सदस्य ग्रामीण क्षेत्र की पृष्ठभूमि वाले हैं।खास बात यह है कि दीदी के परिवर्तन में खास रोल निभाने वाले परिवर्तनपंथी बुद्धिजीवियों को भी दीदी के गुस्से की आंच का अहसास होने लगा है।मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल करते हुए कई मंत्रियों का विभाग बदल दिया है। इसके अंतर्गत शिक्षा मंत्री व बंगाल के विशिष्ट रंगकर्मी  व्रात्य बसु को पर्यटन विभाग का कार्यभार सौंपा गया है जबकि उनके स्थान पर सूचना प्रसारण व आईटी मंत्री पार्थ चटर्जी को शिक्षा मंत्रालय का दायित्व दिया गया है। मुख्यमंत्री ने राज्य के वित्त मंत्री अमित मित्र पर एक बार फिर से भरोसा जताते हुए उन्हें सूचना व आईटी विभाग का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा है। अमित मित्र के पास पहले से ही वित्त व उद्योग मंत्रालय है। अब वे तीन महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभालेंगे।


समझा जाता है कि बहुचर्चित शिक्षकों की नियक्ति संबंधी  टेट घोटाले की वजह से व्रात्य बसु के पर कुतर दिये गये। चुनाव प्रचार के दौरान बंगाल में अपने छापामार अभियान के दौरान नरेंद्र मोदी ने टेट घोटाले की खूब चर्चा की थी।दूसरी तरफ,मदन मित्रा, अरूप बिस्वास, सुब्रत साहा, मंजुलकृष्ण ठाकुर और चंद्रिमा भट्टाचार्य को राज्य मंत्री से पदोन्नत करके कैबिनेट पद सौंपा गया है।


मंजुल कृष्ण ठाकुर मतुआ माता वीमापाणि देवी के सुपुत्र हैं तो मतुआ वोटों पर वर्चस्व कायम करने के सिलसिले में उनकी पदोन्नति समझी जा सकती है।


लेकिन मदन मित्र पर शारदा फर्जीवाड़े मामले में घनघोर गंभीर आरोप है।पार्टी में मुकुल राय का ओहदा बनाये रखकर और शताब्दी व अर्पिता घोष को सांसद बनाकर दीदी ने फिर संदेश दे दिया कि वे शारदा फर्जीवाड़े मामले में,जिनमें वे खुद और उनके परिजन आरोपों के घेरे में हैं,अपना आक्रामक तेवर बनाये रखने वाले हैं,वहीं टेट घोटाले में वे किसी का बचाव करने के मूड में नहीं हैं।



उधर लोकसभा चुनाव में जिन दो जिलों में तृणमूल का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा उन जिलों के मंत्रियों के विभाग वापस ले लिये गये हैं। मुर्शिदाबाद जिले के सुब्रत साहा से खाद्य प्रशंस्करण विभाग लेकर कृष्णेन्दु नारायणन चौधुरी के दे दिया गया है। कृष्णेन्दु अब तक पर्यटन विभाग का काम देख रहे थे। इसी तरह मालदा जिले की सावित्री मैत्र से महिला व बाल कल्याण विभाग लेकर शशि पांजा को दे दिया गया है। सावित्री व सुब्रत फिलहाल बिना विभाग के मंत्री रहेंगे।


उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव में ४२ में से ३४ सीटें जीतने वाली तृणमूल को मुर्शिदाबाद व मालदा जिले में एक भी सीट नहीं मिली थी।



आठ नये  सदस्यों में छह तृणमूल कांग्रेस के वर्तमान विधायक हैं जबकि दो अन्य सदस्य कृष्णेंद्रू नारायण चौधरी और हुमायूं कबीर कल ही कांग्रेस से तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए हैं। ममता बनर्जी सरकार ने कल सत्ता में 18 महीने पूरे किये हैं।


इस फेरबदल का उददेश्य उन छह पदों को भरना है जो कांग्रेस द्वारा ममता बनर्जी सरकार से हटने के बाद इस पार्टी के मंत्रियों के इस्तीफे के बाद खाली हुई थीं। पांच वर्तमान सहित 13 मंत्रियों को राज्यपाल एमके नारायणन ने राजभवन में एक सामान्य समारोह में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।


मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, उनकी मंत्रिपरिषद के सदस्य और विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी सहित कई अन्य गणमान्य लोग इस मौके पर उपस्थित थे।


नये चेहरों कृष्णेंद्रू चौधरी और राजीव बनर्जी को भी कैबिनेट पद दिया गया है। मोंतुराम पाखिरा, गयासुद्दीन मुल्ला, पुंडरिकाक्ष साहा, हुमायूं कबीर, बेचाराम मन्ना और स्वप्न देबनाथ छह नये राज्यमंत्री हैं।


हिंदुस्तान मोटर्स को लेकर बंगाल सरकार ने बैठक बुलाई


पश्चिम बंगाल के श्रम विभाग ने हिंदुस्तान मोटर्स को लेकर जारी गतिरोध को दूर करने के लिए एक त्रिपक्षीय बैठक बुलाई है। कंपनी ने शनिवार को उत्तरपाड़ा संयंत्र में काम निलंबित करने की घोषणा की।


धन की भारी किल्लत और एंबेसडर कारों की सुस्त मांग से परेशान कंपनी प्रबंधन द्वारा संयंत्र में काम निलंबित करने की घोषणा से कारखाने के करीब 2,500 कर्मचारियों का भविष्य अधर में लटक गया है जिनमें प्रबंधकीय विभागों के कर्मी भी शामिल हैं।


राज्य के श्रम आयुक्त जावेद अख्तर ने बताया, 'श्रम विभाग ने हिंदुस्तान मोटर के मुद्दे पर कल श्रम उपायुक्त के कार्यालय पर एक त्रिपक्षीय बैठक बुलाई है। अख्तर ने कहा, 'कंपनी के उत्तरपाड़ा संयंत्र में काम निलंबित करने की घोषणा की है। हमारा प्रयास रहेगा कि हम हिंदुस्तान मोटर्स प्रबंधन को तालाबंदी हटाने के लिए राजी करें।' कंपनी के मानव संसाधन पेशेवरों ने बताया कि कोई भी प्रबंधन धन की कमी या उत्पाद की सुस्त मांग के चलते तालाबंदी की घोषणा नहीं करता। 'वित्तीय संकट या मांग में गिरावट के मामले में कर्मचारी किसी भी तरह जिम्मेदार नहीं है और बाजार की स्थितियों का अध्ययन कर उसके मुताबिक कार्रवाई करने में प्रबंधन विफल रहा है।'


पश्चिम बंगाल से 10 बांग्लादेशी गिरफ्तार

गौरतलब है कि बंगाल में ध्रूवीकरण का खेल श्रीरामपुर में नरेंद्र मोदी की चुनाव सभा से शुरु हुआ,जहां तीसरे चरण के मतदान से ऐन पहले मोदी ने बांग्लादेशी घुसपैठियों को निकाल फेंकने की घोषणा कर दी तो दीदी ने मोदी के खिलाफ बाकायदा जिहाद का ऐलान कर दिया।इस बीच बांग्लादेशी करार देकर झारखंड से लोगों को निकाला गया चुनाव नतीजा आने से पहले।तो अब बंगाल में भी पुलिस ने वैध कागजात के बगैर घूम रहे 10 बांग्लादेशियों को रविवार को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, इन लोगों को एक बस की तलाशी के दौरान गिरफ्तार किया गया। बस दक्षिणी दिनाजपुर जिले में स्थित बालूरघाट जा रही थी।


बालूरघाट में पुलिस अधिकारी स्वपन बनर्जी ने बताया, "हमने बालूरघाट आ रही एक बस से कुछ बांग्लादेशियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। उनके पास वैध कागजात नहीं थे।" गौरतलब है कि हाल के महीनों में पुलिस और सीमा सुरक्षा बल ने करीब 100 बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया है जो अवैध तरीके से पश्चिम बंगाल आए थे।