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कांग्रेस से आगे रहने में ही खुश है भाजपा

कांग्रेस से आगे रहने में ही खुश है भाजपा


Wednesday, 07 March 2012 09:32

विवेक सक्सेना 
नई दिल्ली, 7 मार्च। उत्तर प्रदेश में बड़ी मुश्किल से अपनी सीटें बचा पाई भाजपा को इस बात का संतोष है कि  वह कांग्रेस से आगे रहने में कामयाब रही। पार्टी नेता उत्तर प्रदेश में हुई अपनी फजीहत को बड़ी होशियारी से छिपाते हुए यह दावे कर रहे हैं कि पांच राज्यों के चुनाव नतीजे यूपीए विरोधी मूड दर्शाते हैं। वे राज्य में पार्टी की हार के लिए दो दलों के बीच हुए ध्रुवीकरण को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में सबसे बड़े राज्य, उत्तर प्रदेश में अपनी पूरी ताकत झोंक देने के बाद भी एक सीट की भी बढ़त हासिल न कर पाने के बावजूद भाजपा अपनी पीठ थपथपा रही है। पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी खुद इस चुनाव की देखरेख कर रहे थे। हालांकि उनका कहना है कि राज्य में टिकट वितरण में अनंत कुमार, रामलाल, सौदान सिंह और अरुण जेटली ने मिल कर एक एक सीट का फैसला किया था।
उनके मुताबिक जहां तक भाजपा का सवाल है, हम नतीजों से संतुष्ट हैं। हमने गोवा में जीत दर्ज की। हमारा गठबंधन पंजाब में फिर से सरकार बनाने जा रहा है। यह ऐतिहासिक घटना है। इससे पहले मीडिया कह रहा था कि वहां भाजपा की वजह से अकालियों की सरकार नहीं बन पाएगी। उत्तर प्रदेश में जीत के लिए मुलायम सिंह को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि यहां नतीजे  हमारी उम्मीद से कम रहे। बसपा को हटाने के लिए लोगों ने सपा को समर्थन दिया। दो दलों के बीच धु्रवीकरण उत्तर प्रदेश में हमारे खराब प्रदर्शन की वजह हो सकता है। इस चुनाव में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के बारे में गडकरी ने कहा कि कांग्रेस के नतीजे अपेक्षा से कम रहे।
पार्टी यह मानने के  लिए तैयार नहीं है कि बाबू सिंह कुशवाहा के आने से उसको नुकसान पहुंचा। गडकरी का दावा है कि इस हार के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है। सबने बहुत अच्छा काम किया। वे यह भी मानने को तैयार नहीं हैं कि राज्य में मुख्यमंत्री पद का कोई एक चेहरा न होने के कारण पार्टी को नुकसान पहुंचा। उनका दावा था कि भाजपा में नेतृत्व मायने नहीं रखता है। हमारे यहां तो कार्यकर्ता और संगठन के आधार पर चुनाव लड़ा जाता है।

भाजपा के खराब प्रदर्शन पर चर्चा करने की जगह उन्होंने कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी की आलोचना करते हुए कहा कि गांधी परिवार का वंशज उत्तर प्रदेश में प्रचार का चेहरा था इसलिए उनके लिए परिणाम शर्मनाक हैं। उन्होंने दावा किया, कि उत्तर प्रदेश में चुनाव के नतीजे 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले राजग के पक्ष में सकारात्मक संकेत देते हैं। लोकसभा चुनाव में जिन सीटों  पर कांग्रेस ने बढ़त हासिल की थी, उन्हें वह विधानसभा चुनाव में बनाए रख पाने में असफल साबित हुई।
इस चुनाव नतीजे को कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी बताते हुए पार्टी अध्यक्ष दावा करते हैं कि रायबरेली, अमेठी तक में कांग्रेस के हार जाने का मतलब है कि जनता ने उसके लिए खतरे की घंटी बजा दी है। वे इस दलील से आत्ममुग्ध हैं कि इस जीत का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि सपा और बसपा का खेल विधानसभा चुनाव तक ही सीमित है। लोकसभा चुनाव में तो भाजपा व कांग्रेस का मुकाबला होगा। वहां हम उसे कड़ी चुनौती देंगे। हम चुनाव नतीजों की समीक्षा बाद में करेंगे। यह सच है कि हमें सौ फीसद सफलता नहीं मिली पर इससे हतोत्साहित होने की जरूरत नहीं है।
भाजपा मणिपुर में अपना खाता खुल जाने से खुश है। उसे उम्मीद है कि जोड़ तोड़ के जरिए उत्तराखंड में भी वह सरकार बना ही लेगी। गोवा में चुनावी जीत से वे उत्साहित हैं। उनका कहना है कि गोवा में चुनाव परिणाम ने हमारे ऊपर अल्पसंख्यक विरोधी होने के आरोप को पूरी तरह गलत साबित किया है। पार्टी के छह ईसाई उम्मीदवार विजयी हुए हैं। जबकि एक अन्य अल्पसंख्यक उम्मीदवार ने हमारे समर्थन से जीत दर्ज की है। 
नरेंद्र मोदी के इस चुनाव का बहिष्कार के बाद भी पार्टी इसे किसी तरह क ा मतभेद मानने को तैयार नहीं है। इसे सिरे से खारिज करते हुए गडकरी दावा करते हैं कि पार्टी के सभी सदस्यों ने एक इकाई के रूप में काम किया। यह पूछे जाने पर कि क्या नरेंद्र मोदी के चुनाव प्रचार नहीं करने का उत्तर प्रदेश में भाजपा को नुकसान हुआ, गडकरी ने कहा कि गुजरात में सद्भावना यात्रा में व्यस्त होने के कारण उन्होंने प्रचार में शामिल होने में असमर्थता जताई थी। लेकिन उनकी शुभेच्छा साथ थी।

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