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Thursday, February 9, 2012

मोदी सरकार की चुप्पी, लापरवाही से हुए दंगे

मोदी सरकार की चुप्पी, लापरवाही से हुए दंगे

hursday, 09 February 2012 09:24

अमदाबाद, 9 फरवरी (एजेंसी)। गुजरात दंगों के मामले पर गुजरात हाईकोर्ट ने नरेंद्र मोदी सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने बुधवार को कहा कि गोधरा कांड के बाद जो दंगे हुए वे सरकार की निष्क्रियता और लापरवाही की वजह से हुए। सरकार चाहती तो इस अराजक स्थिति को पैदा होने से रोक सकती थी। 
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश भास्कर भट्टाचार्य और न्यायमूर्ति जेबी पर्दीवाला की पीठ ने यह टिप्पणी राज्य में उस अवधि के दौरान 500 से अधिक धार्मिक ढांचों को क्षतिग्रस्त किए जाने के लिए मुआवजे का आदेश देते हुए की। अदालत ने कहा कि राज्य अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से भी लापरवाही हुई है। इस तरह की निष्क्रियता और लापरवाही से बड़े पैमाने पर धार्मिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया है। उसने कहा कि सरकार इस तरह के स्थलों की मरम्मत और मुआवजे के लिए जिम्मेदार है। अदालत ने कहा कि जब सरकार ने मकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को तबाह किए जाने के लिए मुआवजा दिया था तो उसे धार्मिक ढांचों के लिए भी मुआवजे का भुगतान करना चाहिए।
अदालत ने यह भी आदेश दिया कि राज्य के 26 जिलों के प्रमुख न्यायाधीश अपने-अपने जिलों में धार्मिक ढांचों के संबंध में मुआवजे के लिए आवेदन हासिल करेंगे और इसपर फैसला करेंगे। उनसे छह महीने के भीतर अदालत को अपना फैसला भेजने को कहा गया है। अदालत इस्लामिक रिलीफ कमेटी ऑफ गुजरात (आईआरसीजी) की दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। गोधरा कांड के बाद हुए दंगों में 1200 से अधिक लोग मारे गए थे और राज्य के कई हिस्सों में तबाही हुई थी। आईआरसीजी की याचिका में अदालत से 2003 में दंगों के दौरान धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाए जाने के लिए मुआवजा देने का सरकार को निर्देश देने की मांग की गई थी। यह निर्देश इस आधार पर देने की मांग की गई थी कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी अनुशंसा की थी। राज्य सरकार ने सिद्धांत रूप में सुझाव स्वीकार कर लिया था। राज्य सरकार ने याचिका का यह कहते हुए विरोध किया था कि यह संविधान के अनुच्छेद 27 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है जो किसी धर्म को प्रोत्साहन देने के लिए कोई भी कर लगाने से सरकार को रोकती है।

सरकार ने यह भी कहा कि दंगों के दौरान क्षतिग्रस्त हुए धार्मिक स्थलों को बहाल करने या मरम्मत करने के लिए मुआवजे की कोई नीति नहीं है। आईआरसीजी के वकील एमटीएम हाकिम ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताकर इसकी सराहना की। इस फैसले में धार्मिक ढांचों को नुकसान पहुंचाए जाने पर मुआवजे का आदेश दिया गया है। हाकिम ने कहा कि संभवत: यह पहला मौका है जब अदालत ने 2002 के दंगों के दौरान निष्क्रियता और लापरवाही के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। दिल्ली में कांग्रेस महासचिव बी के हरिप्रसाद ने कहा कि जहां तक दंगों और फर्जी मुठभेड़ों का सवाल है तो सुप्रीम कोर्ट से लेकर किसी भी अदालत में मोदी को आरोपित किया गया है। भाजपा प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि हम हाई कोर्ट के आदेश का अध्ययन कर रहे हैं। आदेश को पढ़ने के बाद ही हम कोई जवाब देंगे।


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