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Wednesday, February 8, 2012

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) और जापान की मित्सुबिशी कारपोरेशन ने आज 50 लाख डालर के निवेश से जापान में एक संयुक्त उद्यम के गठन की घोषणा की मुंबई से एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास

भारत की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज  (टीसीएस) ने दुनिया में दूसरे सबसे बड़े आईटी बाजार जापान में अपनी पैठ बढ़ाए जाने के लिए मित्सुबिशी कॉरपोरेशन के साथ संयुक्त उपक्रम बनाए जाने की घोषणा की है।  टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) और जापान की मित्सुबिशी कारपोरेशन ने आज 50 लाख डालर के निवेश से जापान में एक संयुक्त उद्यम के गठन की घोषणा की। यह उद्यम जापनी कंपनियों को आईटी, बीपीओ और बुनियादी सेवाओं के लिए पूर्ण सेवा उपलब्ध कराएगा और वहां एक सर्विस डिलीवरी सेंटर शुरू करेगा।

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने गाड़ियां किराए पर देने वाली यूरोप की सबसे बड़ी कंपनी यूरोपकार के साथ करोड़ों यूरो का समझौता किया है। कंपनी ने बताया कि इस करार के तहत उसे यूरोपकार की सूचना सेवा इकाई 'यूरोपकार इनफार्मेशन सर्विसेज' को फ्रांस में किए जा रहे कारोबार के लिए आईटी सेवाएं उपलब्ध करानी हैं। यूरोपकार से मिले इस नए ऑर्डर से टीसीएस को यूरोप में आतिथ्य क्षेत्र में अच्छी पैठ बनाने का मौके मिलेगा। टीसीएस ने फ्रांस में 1992 में अपना कारोबार शुरू किया था। कंपनी का पेरिस में कार्यालय है।

प्रमुख आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने सिलिकॉन वैली में एक नई इकाई खोली है.

अमेरिका में अपनी उपस्थिति बढ़ाते हुए टीसीएस ने यह इकाई स्थापित की है जिसका अमेरिकी सांसदों और कैलिफोर्निया सरकार ने स्वागत किया है.

याहू के कारपोरेट मुख्यालय से महज कुछ ही दूरी पर स्थित टीसीएस की इकाई कंपनी के मोबिलिटी साल्यूशंस यूनिट के वैश्विक मुख्यालय के तौर पर काम करेगी.


भारतीय सॉफ्टवेयर सेवा एवं बीपीओ निर्यात के लिए राजस्व मौजूदा वित्त वर्ष में 100 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर जाने की संभावना है, लेकिन सुस्त व्यावसायिक परिदृश्य एवं वैश्विक बाजार में अनिश्चितता की वजह से यह रफ्तार वित्त वर्ष 2013 में बरकरार रहने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। 




लगभग 24.5 करोड़ रुपये के शुरुआती निवेश के साथ नए संयुक्त उपक्रम 'निप्पॉन टीसीएस सॉल्युशन सेंटर' में टीसीएस की 60 फीसदी की हिस्सेदारी होगी। यह संयुक्त उपक्रम जापान में एक डिलिवरी सेंटर भी बनाएगा और इसके तहत 1500 नौकरियां सृजित होंगी। 

टीसीएस के लिए यह संयुक्त उपक्रम स्थानीय बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ाए जाने की रणनीति का एक हिस्सा है। मौजूदा समय में जापान से उसकी राजस्व भागीदारी 10 करोड़ डॉलर से भी कम है। इस संयुक्त उद्यम के साथ टीसीएस को अगले चार से पांच वर्षों में राजस्व बढ़ कर 50 करोड़ डॉलर पर पहुंच जाने का अनुमान है। 

टीसीएस के मुख्य कार्याधिकारी एवं प्रबंध निदेशक एन चंद्रशेखरन ने कहा, 'यह जर्मनी और जापान जैसे बाजार पर ध्यान केंद्रित किए जाने की टीसीएस की रणनीति का हिस्सा है। हमारा मानना है कि मित्सुबिशी के साथ भागीदारी जापान में हमारी मौजूदगी बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण होगी। यह नया संयुक्त उपक्रम मजबूत स्थानीय बाजार का अनुभव मुहैया कराएगा और अपनी वैश्विक आईटी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जापानी कारोबार को प्रभावी बनाए जाने में मदद मिलेगी। मित्सुबिशी भी एक प्रमुख औद्योगिक घराना है और इससे टीसीएस को व्यावसायिक अवसर तलाशने का मौका मिलेगा।'

निप्पॉन टीसीएस सॉल्युशन सेंटर जापानी कंपनियों के लिए संपूर्ण रूप से आईटी, बीपीओ और इन्फ्रास्ट्रक्चर सेवाओं की पेशकश करेगा। यह  दूसरी बार है जब टीसीएस ने नए बाजार में प्रवेश करने के लिए संयुक्त उपक्रम के मार्ग को अपनाया है। टीसीएस की वर्ष 2001 से चीन में उपस्थिति कायम है, लेकिन घरेलू चीनी बाजार में विस्तार के तहत इसने 2007 में चीन की सरकार के साथ संयुक्त उद्यम स्थापित किया। टीसीएस की जापान में भी लगभग 20 वर्षों से उपस्थिति कायम है। 

देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) का शुद्घ मुनाफा 31 दिसंबर को समाप्त हुई तीसरी तिमाही में 18.2 फीसदी बढ़कर 2,803 करोड़ रुपये रहा। कंपनी के शुद्घ लाभ में आई इस बढ़ोतरी की वजह प्रमुख बाजारों और उद्योगों में कंपनी का चौतरफा बेहतर प्रदर्शन रहा है। समीक्षाधीन तिमाही में टीसीएस का राजस्व सालाना आधार पर 36.6 फीसदी बढ़कर 13,204 करोड़ रुपये रहा। कंपनी के दो प्रमुख बाजार- यूरोप में राजस्व 18.1 फीसदी बढ़ा जबकि अमेरिका में इसमें 14.8 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया। 

तिमाही दर तिमाही आधार पर कंपनी का शुद्घ लाभ 21.8 फीसदी और राजस्व में 13.5 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस तेजी में कुल कारोबार में आई 3.2 फीसदी तेजी का भी योगदान है। कंपनी का कहना है कि रुपये में गिरावट के चलते उसका परिचालन मार्जिन में भी तिमाही आधार पर 27.1 फीसदी से 218 आधार अंक बढ़कर 29.2 फीसदी हो गया है। 

टीसीएस के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी एन चंद्रशेखरन ने कहा, 'ग्राहक आधारित हमारी नीति और उसके सही कार्यान्वयन के कारण ही हम इस तिमाही में अच्छा प्रदर्शन कर पाए हैं। हमारे विकास का दायरा काफी व्यापक है और इसमें सभी उद्योगों और बाजारों की खासी हिस्सेदारी है।'

आईएफआरएस रिपोर्टिंग मानकों के अनुसार चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में कंपनी की शुद्घ आय 56.8 करोड़ डॉलर रही, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही से 9.1 फीसदी ज्यादा है। जबकि इस दौरान कंपनी का राजस्व पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 20.6 फीसदी बढ़कर 259 करोड़ डॉलर रहा। इस तिमाही में कंपनी ने 40 नए ग्राहक जोड़े। 

कंपनी के मुख्य वित्त अधिकारी एस महालिंगम ने बताया, 'हमने विकास, मुद्रा विनिमय में आ रहे उतार-चढ़ाव का फायदा उठाकर लागत प्रबंधन पर जोर देकर अपने परिचालन मार्जिन में खासा इजाफा किया है।' उन्होंने बताया, 'पिछले तीन महीनों में मुद्रा और बाजार में अस्थिरता बढ़ी है और हम उसी के अनुसार रणनीति बना रहे हैं।'

इस दौरान 10 करोड़ डॉलर की पूंजी वाले कंपनी के ग्राहकों की संख्या बढ़कर 14 हो गई, जो सितंबर तिमाही में 12 थी। दिसंबर तिमाही में कंपनी ने 18,907 कर्मचारियों की नियुक्ति की, जिसके बाद कुल कर्मचारियों की संख्या बढ़कर अब 2,26,751 हो गई है। इस दौरान कंपनी छोडऩे वाले कर्मचारियों की दर घटकर 12.8 फीसदी रह गई।

भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियों के प्रमुख संगठन नैशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर ऐंड सर्विसेज कंपनीज (नैसकॉम) ने वर्ष 2011-12 की तुलना में 2012-13 में सॉफ्टवेयर निर्यात में गिरावट आने की भविष्यवाणी की है। नैसकॉम ने वित्त वर्ष 2013 में आईटी एवं बीपीओ निर्यात राजस्व 11-14 फीसदी की दर से बढऩे का अनुमान व्यक्त किया है जबकि घरेलू राजस्व में 13-16 फीसदी तक की वृद्घि की संभावना जताई गई है। 

सकारात्मक बात यह है कि वैश्विक बाजार में चुनौतियों के बावजूद भारतीय आईटी-बीपीओ क्षेत्र अपनी विकास रफ्तार को बनाए हुए है और पिछले साल घोषित राजस्व अनुमान को पूरा करने में सफल रहा है। 

भारत का आईटी सेवा एवं बीपीओ निर्यात 2011-12 में 16-18 फीसदी की दर से बढ़ कर 70 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। नैसकॉम ने अनुमान व्यक्त किया है कि भारतीय सॉफ्टवेयर सेवा एवं बीपीओ से राजस्व इस साल 101 अरब डॉलर को पार करेगा। इसमें से 69 अरब डॉलर निर्यात से आएगा। घरेलू आईटी सेवा राजस्व वित्त वर्ष 2012 में 16.7 फीसदी बढ़ कर 32 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। 

इसके अलावा वैश्विक आउटसोर्सिंग में भारत की भागीदारी बढ़ कर 58 फीसदी हो गई है जो 2010 में 55 फीसदी थी। वैश्विक भागीदारी में 3 फीसदी की बढ़त से संकेत मिलता है कि भारत आईटी-बीपीओ सेवाओं के लिए दुनिया के प्रमुख सोर्सिंग केंद्र के रूप में अपनी नंबर वन की हैसियत को बनाए हुए है। 

नैसकॉम के चेयरमैन राजेन्द्र पवार के अनुसार वित्त वर्ष 2013 के परिदृश्य को लेकर इस साल अक्टूबर में स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो जाएगी। हम अक्टूबर में इस अनुमान को संशोधित करेंगे। माहौल अस्पष्ट बना हुआ है।

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Palash Biswas
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